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झूम के देखो सावन आया ....

खुशियों की सौगातें लाया

झूम के देखो सावन आया

 

चंचल सोख़ हवा इतराई

बारिश की बौछारें लाई

महक उठा अब मन का आँगन

भीनी भीनी सी खुशबू छाई

 

देख छटा हर मन हर्षाया

झूम के देखो सावन आया ...

 

 

मन की बगिया महक रही है

पंछी बन के चहक रही है

इच्छाओं को पंख मिल गए

दिल की धड़कन बहक रही है

 

मौसम में है खुमार छाया

झूम के देखो सावन आया ...

 

धरती बाहों को फैलाये

अपना आँचल भी लहराये

उमड़ पड़े हैं नदियाँ नाले

आसमान अमृत बरसाये

 

सबको ऐसा उत्सव भाया

झूम के देखो सावन आया....

 

 

धीरे धीरे गरजो मेघा

खेतों में ही बरसो मेघा

छत टूटी कच्ची दीवारें

उलझन को कुछ समझो मेघा

 

रौद्र रूप से जी घबराया

झूम के देखो सावन आया ....

 

बगियाँ सारी खिली खिली हैं

हर डाली में एक कली है

पत्ते भी अब राग सुनायें

तेज़ हवाएँ खूब चली हैं

 

कुदरत ने क्या रंग दिखाया

झूम के देखो सावन आया....

 

ले किसान हल निकल पड़े हैं

बैल भी अब तैयार खड़े हैं

मिट्टी में आ गई जवानी

अब खेतों में मोती जड़े हैं

 

उम्मीदों की चाबी लाया

झूम के देखो सावन आया....

 

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

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Comment

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Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on August 16, 2018 at 1:41pm
आद0 नादिर खान जी सादर अभिवादन। गीत का अच्छा प्रयास हुआ है। कहीं-कहीं लय भंग है, गुनगुनाते रहें तो वह भी दूर हो जाएगी। गुणीजनों की बातों को संज्ञान में लीजिये। मेरी बधाई स्वीकार कीजिये
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 16, 2018 at 1:12pm

आ. भाई नादिर जी, सुंदर गीत हुआ है । हार्दिक बधाई ।

Comment by नादिर ख़ान on August 15, 2018 at 4:06pm

आदरणीया बबीता जी हौसला अफजाई का शुक्रिया ....

Comment by नादिर ख़ान on August 15, 2018 at 4:05pm

आदरणीय समर साहब बेशकीमती सुझाओं के लिए बहुत शुक्रिया आपका .... पहली बार गीत लिखने की कोशिश की है ।

Comment by babitagupta on August 15, 2018 at 3:21pm

उम्दा पंक्तियाँ वरखा रानी की बहार पर,बेहतरीन रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार कीजियेगा आदरणीय सरजी।

Comment by Samar kabeer on August 15, 2018 at 2:57pm

जनाब नादिर ख़ान साहिब आदाब,सावन के मौसम पर गीत का अच्छा प्रयास हुआ है, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

'चंचल सोख़ हवा इतराई'

इस पंक्ति में 'सोख़' को "शौख़" कर लें ।

' भीनी भीनी सी खुशबू छाई'

ये पंक्ति लय में नहीं है,इसे यूँ कर लें:-

"भीनी भीनी ख़ुश्बू छाई"

कृपया ध्यान दे...

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"ऐसा नहीं होगा,मुतमइन रहें ।"
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"आदरणीय सत्यनारायण जी, आपकी सहभागिता के लिए हार्दिक धन्यवाद ..  आपकी प्रस्तुति के सभी दोहे…"
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"वाह वाह !  आपकी प्रस्तुति के लिए सादर धन्यवाद आदरणीय. सभी दोहे सार्थक और चित्रानुरूप हुए…"
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"अवश्य,मुहतरम ,चर्चा तो ज़रूरी है,लेकिन सार्थक चर्चा,जिसका कुछ नतीजा भी निकले,होता ये है कि चर्चा…"
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