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"हिन्दी दिवस पर विशेष" हिन्दी ग़ज़ल

कितनी प्यारी ये मनभावन हिन्दी है
भारत की वैचारिक धड़कन हिन्दी है

जो लिखता हूँ हिन्दी में ही लिखता हूँ
मेरी ख़ुशियों का घर आँगन हिन्दी है

रफ़ी, लता,मन्नाडे को तुम सुन लेना
इन सबकी भाषा और गायन हिन्दी है

भारत में कितनी हैं भाषाएँ लेकिन
सारी भाषाओँ का यौवन हिन्दी है

पहले मैं अक्सर उर्दू में लिखता था
अब तो मेरा सारा लेखन हिन्दी है

मुझको तो लगती है ये भाषा अपनी
लेकिन कुछ लोगों की उलझन हिन्दी है

गर्व करे हर भारतवासी ये बोले
मेरे देश की भाषा पावन हिन्दी है

औरों की तो बात "समर" मैं क्या बोलूँ
मेरे माथे का तो चंदन हिन्दी है

"समर कबीर"
मौलिक/अप्रकाशित

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Comment by Ajay Tiwari on Wednesday

आदरणीय समर साहब, ये ग़ज़ल हिंदी के प्रति आपके लगाव का आईना है. आप जैसे लोगों से ही देश की साझा संस्कृति जीवित है. हार्दिक बधाई.

  

Comment by Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' on September 18, 2018 at 4:51pm

"औरों की तो बात "समर" मैं क्या बोलूँ
मेरे माथे का तो चंदन हिन्दी "................वाह...आदरणीय समर कबीर साहब..हिन्दी के प्रति आपकी अपार  श्रद्धा को नमन....बहुत-बहुत बधाई....

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on September 18, 2018 at 8:54am

वाह आदरणीय क्या ही मनभावन ग़ज़ल कही है..."लेकिन कुछ लोगों की उलझन हिंदी है" सत्य का सटीक चित्रण।

Comment by Mohammed Arif on September 17, 2018 at 7:33pm

वाह! वाह! वाह! बहुत ख़ूब ! क्या ख़ूबसूरत तुहफ़ा दिया है हिंदी दिवस के पावन अवसर पर । पढ़कर मज़ा आ गया । यह आपका हिंदी के प्रति समर्पण को भी प्रदर्शित करता है । शे'र दर शे'र दाद के साथ दिली मुबारकबाद आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब ।

Comment by रामबली गुप्ता on September 17, 2018 at 1:24pm

वाह वाह वाकई मजा आया पढ़कर आदरणीय समर भाई साहब। इस खूबसूरत ग़ज़ल के लिए हृदय से बधाई स्वीकार करें। सादर

Comment by बसंत कुमार शर्मा on September 15, 2018 at 9:00pm

शुभ संध्या आदरणीय समीर कबीर जी, वाह वाह अद्भुत गजल कही आपने आनंद आ गया , बहुत बहुत बधाई आपको 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 15, 2018 at 8:57pm

आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन । इस बेहतरीन गजल के लिए हार्दिक बधाई ।

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on September 15, 2018 at 8:56pm

आद0 समर साहब सादर प्रणाम। हिंदी दिवस पर ओ बी ओ के पाठकों के लिए उपहार स्वरूप यह ग़ज़ल बेहतरीन।

जो लिखता हूँ हिन्दी में ही लिखता हूँ
मेरी ख़ुशियों का घर आँगन हिन्दी है

क्या बात, बहुत खूबसूरत....

भारत में कितनी हैं भाषाएँ लेकिन
सारी भाषाओँ का यौवन हिन्दी है।।

कमाल की बात कही आपने।

हिंदी ग़ज़ल बहुत पसंद आई हमको। बहुत बहुत बधाई आपको इस ग़ज़ल पर। 

Comment by TEJ VEER SINGH on September 14, 2018 at 11:10am

हार्दिक बधाई आदरणीय समर क़बीर साहब जी। आदाब। हिंदी दिवस के पावन अवसर पर मातृ भाषा हिंदी को प्रोत्साहन देती सुंदर रचना।भारत में कितनी हैं भाषाएँ लेकिन
सारी भाषाओँ का यौवन हिन्दी है

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