For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सौदागर

” प्रोफेसर सैन और प्रोफेसर देशपांडे  सरकारी मुलाजिम हैं, तनख्वाह भी एकै जैसी मिलत है लेकिन ई दुइनो जब से निरीक्षक भइ गए हैं तब से प्रोफेसर सैन तो बड़ी बड़ी लग्जरी गाड़ियों में दौरा करत है और बड़े आलीशान होटलों में बसेरा करत हैं लेकिन ..लेकिन बेचारे देशपांडे कभी धर्मशाला में ठहरत हैं तो कभी सरकारी गेस्ट हाउसन  में ...कभी ऑटो से चलत हैं तो कभी बस में ....जब सब सुख सुबिधा बरोबर है तब  ई फरक काहे है ई बात  तनिक हमरी  समझ में नाहीं  आवत है  “ राहुल ने अपने मित्र सुजीत से बडी जिज्ञासा के साथ पूंछा

“ अरे ! ईमें कौन बात है , प्रोफेसर सैन के बाप दादा ने खूब पैसा कमाया होगा और उसी के दम पर वो शाही जिन्दगी जिया करत हैं “

“ अरे !  काहे का बाप दादा का पैसा , हम ई प्रोफेसर साहिब के बाप का भी इतिहास जानत हैं और बाबा का भी ...एक छोटी सी राशन की दुकान की दम पर दुई वक़्त की रोटी बड़ी मुश्किल से नसीब होती थी “

“ अरे ! तो हो सकता है सैन साहिब सौदागर हों “

“सौदागर, कईसन सौदागर ....बिन दूकान , बिन सौदा के ई कैसे सौदागर हुयी सकत है “ झुंझलाते हुए राहुल ने सुजीत से सवाल किया

“ अरे !सौदागर बने के खातिर ई कौन जरूरी है कि सौदा भी हो और दुकान भी – अरे सौदा जमीर का भी तो हुए सकत है “ सुजीत ने गंभीर होते हुए कहा

मौलिक व अप्रकाशित 

Views: 158

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Neelam Upadhyaya on September 26, 2018 at 4:19pm

आदरणीय  आशुतोष मिश्रा जी, नमस्कार। अच्छी  लघुकथा की प्रस्तुति के लिए बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Dr Ashutosh Mishra on September 26, 2018 at 1:31pm

आदरणीय लक्ष्मण जी आदरणीय समर सर , भाई ब्रिजेश जी , आदरणीय विजय सर आप सबकी प्रतिक्रिया से उत्साहित महसूस कर रहा हूँ . रचना पर आप सबकी प्रतिक्रिया के लिए ह्रदय से आभारी हूँ सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on September 26, 2018 at 1:29pm

आदरणीय शेख शहजाद उस्मानी जी आपके मशविरे मेरे लिए बेशकीमती होते हैं लघु कथा बिधा पर लिखने का प्रयास आपकी रचनाओं को पढ़कर ही शुरू किया है और लगातार आपकी रचनाएं पढता हूँ .मशविरे के लिए ह्रदय से आभारी हूँ आपके मार्गदर्शन के अनुरूप फिर प्रयास करूंगा ..सादर 

Comment by vijay nikore on September 24, 2018 at 6:40am

लघुकथा अच्छी लगी। बधाई आदरणीय आशुतोष जी।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on September 21, 2018 at 10:30am

बिलकुल सही जगह पे चोट करती हुई लघुकथा..वाह

Comment by Samar kabeer on September 19, 2018 at 10:32pm

जनाब डॉ.आशुतोष मिश्रा जी आदाब,अच्छी लघुकथा हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 19, 2018 at 5:47pm

आ. भाई आषुतोश जी, बेहतरीन कथा हुयी है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on September 19, 2018 at 3:14pm

विरम चिन्ह संबंधित कुछ टंकण त्रुटियां रह गई हैं!

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on September 19, 2018 at 3:13pm

 बेहतरीन क्षेत्रीय भाषा-संवादों में जमीर के सौदे और सौदागरों की हक़ीक़त पर ध्यान आकृष्ट कराती बढ़िया लघुकथा हेतु सादर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं मुहतरम जनाब डॉ. आशुतोष मिश्रा  साहिब। पहले लम्बे संवाद में बीच में उस पात्र की गतिविधियों या भावों को संक्षेप में कहकर उस संवाद को दो या तीन भागों मेन बांटा जा सकता है मेरे विचार से , या फिर उस संवाद के बीच-बीच में दूसरे पात्र के जवाबी लघु संवाद जोड़कर। सादर।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Asif zaidi commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post उम्मीद का पेड़  (लघुकथा )
"वाह वाह श्रीवास्तव जी बहुत बढ़िया लघुकथा की मुबारकबाद "
3 hours ago
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 कबीर सर सादर नमन  आपका स्वास्थ्य ठीक न होने के बाद भी अपने इतनी मेहनत की यह मेरे लिए बहुत…"
4 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post रंग-ए-रुख़सार निखरने का सबब क्या आखिर(३९ )
"आदरणीय Samar kabeer साहेब आदाब | आपकी पारखी नज़रों से गुज़रकर ग़ज़ल कामयाब हुई | हौसला आफजाई…"
5 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post रंग-ए-रुख़सार निखरने का सबब क्या आखिर(३९ )
" आदरणीय  Sushil Sarna जी आपकी हौसला आफजाई के लिए दिली शुक्रिया | "
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहे ... एक भाव कई रूप ... नर से नारी माँगती ..
"आ. भाई सुशील जी, सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
9 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post पत्थरों पे हैं इल्ज़ाम झूठे सभी-गजल
"आ. भाई सतविंद्र जी, अच्छा प्रयास हुआ है । हार्दिक बधाई।"
9 hours ago
Sushil Sarna commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'कागा उवाच' (लघुकथा) :
"आदरणीय शेख़ उस्मानी साहिब, आदाब .... बहुत ही सुंदर और सारगर्भित लघु कथा हुई है। अपडेट रहना ही पड़ेगा…"
9 hours ago
Sushil Sarna commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post रंग-ए-रुख़सार निखरने का सबब क्या आखिर(३९ )
"आदरणीय गहलोत जी खूबसूरत अशआर की ग़ज़ल के लिए दिल से बधाई।"
9 hours ago
Sushil Sarna commented on विनय कुमार's blog post चिट्ठियाँ --
"आदरणीय विनय कुमार जी चिट्ठियों के माध्यम से अंतस भावों का सुंदर चित्रण हुआ है। हार्दिक बधाई।"
9 hours ago
Sushil Sarna commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post नवगीत-वेदना ने नेत्र खोले-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आदरणीय बृजेश जी सुंदर भावों को चित्रित करते इस नवगीत के लिए हार्दिक बधाई।"
9 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post नवगीत-वेदना ने नेत्र खोले-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आ. भाई बृजेश जी, सुंदर नवगीत हुआ है । हार्दिक बधाई।"
10 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कैसे बाँचें पीढ़ियाँ, रंगों का इतिहास - दोहे ( लक्ष्मण धामी' मुसाफिर' )
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन। दोहों पर उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार।  क्या " इधर "…"
10 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service