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ग़ज़ल (ख़त्म कर के ही मुहब्बत का सफ़र जाऊंगा)

(फाइ इलातु न _फ इ लातुन _फ इ लातुन _फ़े लुन)

ख़त्म कर के ही मुहब्बत  का सफ़र जाऊंगा l
तू ने ठुकराया तो कूचे में ही मर जाऊँगा l

जो भी कहना है वो कह दीजिए ख़ामोश हैं क्यूँ
आपका फ़ैसला सुनके ही मैं घर जाऊँगा l

वकते आख़िर है मेरा पर्दा हटा दे अब तो
छोड़ कर मैं तेरे चहरे पे नज़र जाऊँगा l

आ गए वक़ते सितम अश्क अगर आँखों में
मैं सितमगर की निगाहों से उतर जाऊँगा l

लौट कर आऊंगा मैं सिर्फ़ तू इतना कह दे
जिंदगी भर मैं उसी रह पे ठहर जाऊँगा l

मैं इबादत की तरह करता रहा इश्क़ मगर
सोचती ही रही दुनिया के मैं डर जाऊँगा l

उसने तस्दीक सहारा न दिया गर मुझको
छोड़ कर उसका मैं दर कौन से दर जाऊँगा l

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 7, 2018 at 1:29pm

आ. भाई तस्दीक अहमद जी, अच्छी गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।

Comment by राज़ नवादवी on November 7, 2018 at 10:30am

आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहब, आदाब. अच्छी ग़ज़ल हुई है, दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ. सादर 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on November 6, 2018 at 8:38pm

जनाब मिर्ज़ा जावेद साहिब, ग़ज़ल पसंद करने और आपकी हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on November 6, 2018 at 8:37pm

मुहतरम जनाब तेज वीर साहिब , ग़ज़ल पर आपकी सुंदर प्रतिक्रिया और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on November 6, 2018 at 8:36pm

मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब आदाब  , ग़ज़ल पर आपकी खूबसूरत प्रतिक्रिया और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I 

Comment by mirza javed baig on November 6, 2018 at 7:50pm

मुहतरम जनाब तसदीक़ साहिब उम्दा अशआर के, लिए बहुत बहुत मुबारक बाद 

Comment by TEJ VEER SINGH on November 6, 2018 at 2:44pm

हार्दिक बधाई आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहब जी।बेहतरीन गज़ल।

मैं इबादत की तरह करता रहा इश्क़ मगर 
सोचती ही रही दुनिया के मैं डर जाऊँगा l

Comment by Samar kabeer on November 6, 2018 at 12:16pm

जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।

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