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ग़ज़ल -- नेकियाँ तो आपकी सारी भुला दी जाएँगी / दिनेश कुमार

2122---2122---2122---212
.
नेकियाँ तो आपकी सारी भुला दी जाएँगी
ग़लतियाँ राई भी हों, पर्वत बना दी जाएँगी
.
रौशनी दरकार होगी जब भी महलों को ज़रा
शह्र की सब झुग्गियाँ पल में जला दी जाएँगी
.
फिर कोई तस्वीर हाकिम को लगी है आइना
उँगलियाँ तय हैं मुसव्विर की कटा दी जाएँगी
.
इनके अरमानों की परवा अह्ले-महफ़िल को कहाँ
सुबह होते ही सभी शमएँ बुझा दी जाएँगी
.
नाम पत्थर पर शहीदों के लिखे तो जाएँगे
हाँ, मगर क़ुर्बानियाँ उनकी भुला दी जाएँगी
.
कौन मुरझाने से रोकेगा गुलों को ऐ 'दिनेश'
बुलबुलें ही बाग़ से जब सब उड़ा दी जाएँगी
.
दिनेश कुमार ( मौलिक व अप्रकाशित )

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Comment by क़मर जौनपुरी on Saturday

बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है। बहुत बहुत मुबारकबाद।

Comment by Samar kabeer on November 14, 2018 at 2:20pm

जनाब सौरभ भाई आदाब,मिज़ाज बख़ैर ।

अब आये हैं तो ब्लॉग पर जनाब श्रीपूनम जौधपुरी साहिब का नवगीत भी देख लें मुझे उस पर आपकी टिप्पणी दरकार है,कृपया कष्ट करें ।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on November 14, 2018 at 2:10pm

भाई दिनेश जी, एक अच्च्छी ग़ज़ल से आपने पटल को समृद्ध किया है. बहुत ख़ूब. अभी पटल पर आना वाकई फल गया. 

हार्दिक बधाइयाँ 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 14, 2018 at 7:45am

आ. भाई दिनेश जी, सुंदर गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on November 11, 2018 at 5:15pm

आद0 दिनेश जी सादर अभिवादन,, बहुत ही उम्दा ग़ज़ल, वाह वाह, बधाई स्वीकार कीजिये

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on November 11, 2018 at 12:01pm

वाह बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल आदरणीय...

Comment by Ajay Tiwari on November 8, 2018 at 8:38pm

आदरणीय दिनेश जी, खूबसूरत ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई.  

Comment by राज़ नवादवी on November 8, 2018 at 1:18pm

आदरणीय दिनेश कुमार जी आदाब, सुन्दर ग़ज़ल हुई है, दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ. सादर 

Comment by Samar kabeer on November 7, 2018 at 5:25pm

जनाब दिनेश कुमार जी आदाब,उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।

Comment by Surkhab Bashar on November 7, 2018 at 3:29pm

आ. दिनेश कुमार जी अच्छी ग़ज़ल की तख़लीक़ हुई मुबारक बाद

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