For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

किसी के इश्क में बिस्मिल हमारी बेबसी कब तक(गजल)

1222 1222 1222 1222

रहेगी इश्क में बिस्मिल हमारी बेबसी कब तक

हमारा टूटना कब तक और' उनकी दिल्लगी कब तक।

सिमटकर इक परिंदा जान अपनी दे ही बैठा है

शिकारी! तू पकड़ इस पे रखेगा यूँ कसी कब तक।

यहाँ लोमड़ बने बुद्धू, चले तरकीब गीदड़ की

चलेंगी और ये बातें बताओ बे तुकी कब तक। 

अवामी सोच बढ़ने पर असर झूठा हुआ इनका

ये जुमलों की अरे साहब!, लगेगी यूँ झड़ी कब तक।

बड़ा तूफ़ान आयेगा लगा कर कान ये सुन लो

समंदर की जरा सोचो रहेगी ख़ामुशी कब तक।

बिस्मिल: ज़ख्मी, आहत

मौलिक अप्रकाशित

Views: 62

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Ajay Tiwari on November 17, 2018 at 4:30pm

आदरणीय सतविन्द्र जी, ख़ूबसूरत शेर हुए है. हार्दिक बधाई.

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on November 16, 2018 at 5:32pm

आदरणीय राज नवाद्वि जी सादर नमन, उत्साहवर्धन के लिए तहेदिल आभार

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on November 16, 2018 at 5:31pm

आदरणीय तेजवीर सिंह जी, सादर नमन! हौंसलाफ़ज़ाई के लिए सादर आभार

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on November 16, 2018 at 5:30pm

आदरणीय समर कबीर सर नमन, मार्गदर्शन हेतु तहे दिल शुक्रिया। सादर

Comment by राज़ नवादवी on November 13, 2018 at 11:25am

आदरणीय राणा जी, हार्दिक बधाई. सुन्दर गज़ल की प्रस्तुति. मुबारकबाद. सादर 

Comment by TEJ VEER SINGH on November 13, 2018 at 10:56am

हार्दिक बधाई आदरणीय सतविंदर जी।बेहतरीन गज़ल।

अवामी सोच बढ़ने पर असर झूठा हुआ इनका

ये जुमलों की अरे साहब!, लगेगी यूँ झड़ी कब तक।

Comment by Samar kabeer on November 12, 2018 at 4:49pm

जनाब सतविन्द्र कुमार राणा जी आदाब, तरही ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन समय चाहता है,बधाई स्वीकार करें ।

'किसी के इश्क में बिस्मिल हमारी बेबसी कब तक'

इस मिसरे को यूँ कर लें :-

'रहेगी इश्क़ में बिस्मिल हमारी बेबसी कब तक'

'शिकारी! बोल तो जंजीर उस पर हाँ कसी कब तक'

इस मिसरे का शिल्प कमज़ोर है, और "हाँ" शब्द भर्ती का है दूसरी बात ये कि परिन्दे को ज़ंजीर से नहीं कसा जाता , इसे यूँ कर सकते हैं:;

'शिकारी तू पकड़ इस पे रखेगा यूँ कसी कब तक'

'

लोमड़ बने बुद्धू, चले तरकीब गीदड़ की

चलेंगी और ये बातें बताओ बे तुकी कब तक'

इस शैर का ऊला मिसरा बह्र में नहीं,यूँ कर सकते हैं:-

'चले बुद्धू बने लूमड यहाँ तरकीब गीदड़ की'

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Samar kabeer commented on सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा's blog post छोटी सी प्रेम कहानी ( लघुकथा )
"जनाब सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा जी आदाब,लघुकथा का प्रयास अच्छा है लेकिन अभी कुछ समय चाहता है, इसे कुछ और…"
8 hours ago
Samar kabeer commented on सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा's blog post छोटी सी प्रेम कहानी ( लघुकथा )
"// सूंदर रचना// जनाब फूल सिंह जी,पटल की कुछ रचनाओं पर आपकी टिप्पणियों पढ़ीं,जो इसी तरह की…"
8 hours ago
Samar kabeer commented on अजय गुप्ता's blog post ग़ज़ल (छिपा बैठा चितेरा है)
"जनाब अजय गुप्ता जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । सबसे पहली बात ये कि आपने मंच के…"
8 hours ago
Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post जीवन संगिनी
"जनाब फूल सिंह जी आदाब,अच्छी कविता है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । ' बस ख़्वाहिश ये…"
9 hours ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post रंगहीन ख़ुतूत ...
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी कविता हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें…"
9 hours ago
Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post सबके अपने अपने मठ हैं - नवगीत
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब,नवगीत अच्छा है लेकिन आप जो कहना चाहते हैं वो पूरी तरह उजागर नहीं हो…"
9 hours ago
Samar kabeer commented on TEJ VEER SINGH's blog post कुंठा - लघुकथा -
"जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब,अच्छी लघुकथा हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
9 hours ago
surender insan commented on surender insan's blog post "किसी के साथ भी धोखा नहीं करतें"
"जी बहुत बहुत शुक्रिया आपका। सादर नमन।"
10 hours ago
Profile IconHimanshu Sharma and Muzammil shah joined Open Books Online
13 hours ago
PHOOL SINGH commented on amita tiwari's blog post वह धरती कब की छूट गयी
"सूंदर रचना"
14 hours ago
PHOOL SINGH commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएं जीवन पर :
"सूंदर रचना"
14 hours ago
PHOOL SINGH commented on Ashok Kumar Raktale's blog post सावन आया है
"सूंदर रचना"
14 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service