For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

३ क्षणिकाएं :

तृप्त हो गए
चक्षु
पिघला कर
एक पाषाण से बोझ को
हृदय की
स्मृति श्रृंखला से

.......................

मृत्यु
किसी जीवंत स्वप्न का
यथार्थ है
ज़िंदगी
यथार्थ का
आभास है
प्रीत
आभास में निहित
विश्वास है

...............................

कुछ टूटा
कुछ छूटा
प्रीत पथ के
अंतस से
वेदना साकार हुई
बुत बनी आँखों से
अनुत्तरित एकांत
विकलता का पर्याय बना
बीता क्षण
स्मृतिपृष्ठ का
अविनाशी अध्याय बना

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 42

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil Sarna on Wednesday

आदरणीय Mahendra Kumar जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का हार्दिक आभार।

Comment by Sushil Sarna on Wednesday

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का हार्दिक आभार।

Comment by Mahendra Kumar on Wednesday

आदरणीय सुशील सरना जी, आपकी तीनों क्षणिकाएँ उम्दा हैं. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. //विश्वास है// सादर.

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on Wednesday

आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। तीनों क्षणिकाएँ उत्तम हैं। इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Sushil Sarna on January 11, 2019 at 6:51pm

आदo  सुचिसंदीप अग्रवाल जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का हार्दिक आभार।

Comment by Sushil Sarna on January 11, 2019 at 6:50pm

आदरणीय  PHOOL SINGH जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का हार्दिक आभार।

Comment by Sushil Sarna on January 11, 2019 at 6:50pm

आदरणीय  Samar kabeer जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का हार्दिक आभार।

Comment by सुचिसंदीप अग्रवालl on January 11, 2019 at 8:53am

सुशील सरना जी, बहुत ही उम्दा, उत्तम रचना। सृजन हेतु हार्दिक बधाई

Comment by PHOOL SINGH on January 10, 2019 at 12:00pm

"सरना जी" बहुत सूंदर रचना बधाई स्वीकारें

Comment by Samar kabeer on January 9, 2019 at 11:36am

जनाब सुशील सरना जी आदाब,तीनों क्षणिकाएँ उत्तम हैं,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani commented on Hari Prakash Dubey's blog post एक बोझ भरी गठरी: लघुकथा
"आदाब। कड़वा सत्य, किंतु नकारात्मक संदेश देती विचारोत्तेजक रचना। हार्दिक बधाई आदरणीय हरिप्रकाश दुबे…"
25 minutes ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 93 in the group चित्र से काव्य तक
"आदाब। ये हुई न बेहतरीन तीखी सारगर्भित प्रतीकात्मकता युक्त दोहावली! हार्दिक बधाई आदरणीय सतविंदर…"
32 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 93 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश भाई जी, आपके सभी दोहे राज्य विशेष को इंगित करते प्रस्तुत हुए हैं। जबकि…"
33 minutes ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 93 in the group चित्र से काव्य तक
"आदाब। बेहतरीन भावाव्यक्ति।  हार्दिक बधाई आदरणीय  अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव …"
37 minutes ago
amod shrivastav (bindouri) commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post मेरे घर अब उजाला बन के मुझमे कौन रहता है
"जी दादा प्रणाम  दादा मार्गदर्शन का शुक्रिया , व्याकरण  की अशुद्धियाँ दूर क्ररने के लिए…"
43 minutes ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 93 in the group चित्र से काव्य तक
"आदाब। प्रदत्त चित्राधारित बेहतरीन विचारोत्तेजक हिदायतें देते दोहा-छंदों हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय…"
44 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 93 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत ही सटीक सुझाव है, आदरणीय। इसी तरह, त्रिकल शब्द के बाद त्रिकल शब्द का समुचित निर्वहन…"
46 minutes ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 93 in the group चित्र से काव्य तक
"आदाब। आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी की टिप्पणी महत्वपूर्ण है। छंदों में प्रतीकात्मकता होती, तो बेहतर होता।…"
47 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 93 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहब, आपकी कोशिशें और संलग्नता साहित्य को मंशा रहित रखने की तार्किक यत्न…"
49 minutes ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 93 in the group चित्र से काव्य तक
"आदाब। शहतूत/पासा/कंस आदि के प्रतीकात्मक प्रयोग के साथ बेहतरीन दोहा-छंदों हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय…"
51 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 93 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत सही और सार्थक सुझाव है, आदरणीय।  त्रिकल शब्द के बाद त्रिकल शब्द का ऐसे ही समुचित निर्वहन…"
54 minutes ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 93 in the group चित्र से काव्य तक
"आदाब। बहुत दिनों बाद हो रहे दोहा-छंदोत्सव के आग़ाज़ पर प्रदत्त चित्र के भाव-आयामों को शाब्दिक करते…"
54 minutes ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service