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विकास - लघुकथा -

विकास - लघुकथा -

"शक़ूर भाई, चलो भी अब, चार बज गये। नेताजी के आने का समय हो गया।"

"मुन्ना जी, हमारे देश के नेता कभी समय से आते हैं क्या? अगर ये लोग इतने ही समय के पाबंद होते तो आज देश की ये हालत नहीं होती।"

"वह सब तो ठीक है पर अपने को इन सब बातों से क्या लेना देना।अपने को तो अपनी दिहाड़ी से मतलब|"

"अरे यार मुझे तो इसका भाषण भी सुनने को मन नहीं करता। अपने ऑटोवालों की यूनियन लीडर से भी घटिया भाषा प्रयोग करता है।"

"भाई जी, हम उसके संस्कार तो बदल नहीं सकते। वैसे भी इस उम्र में वह अब क्या सुधरेगा?"

"कुछ भी हो भाई, इस आदमी ने इस पार्टी को तो आसमान में पहुंचा दिया।"

"हाँ भाई, इसमें तो कोई दो राय नहीं है।"

"पर भाई,  लोग इसको इतनी गालियाँ क्यों देते हैं। क्या सच में यह बेईमान है?"

"हो भी सकता है?"

"तुम यह कैसे कह सकते हो?"

"यार तुम खुद सोचो, पिछले चुनाव में, इसी नेता के भाषण सुनने के लिये इसकी पार्टी ने फ़ंड जुटाने के लिये पांच  पांच रुपये की टिकट लगायी थी।और अब इसके भाषण सुनने के लिये लोगों को पांच पांच सौ रुपये देकर बुलाया जा रहा है।"

मौलिक एवम अप्रकाशित

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Comment by TEJ VEER SINGH on May 17, 2019 at 10:52am

हार्दिक आभार आदरणीय हरिओम श्रीवास्तव जी।

Comment by Hariom Shrivastava on May 15, 2019 at 8:40pm

बहुत सुंदर लघुकथा

Comment by Hariom Shrivastava on May 15, 2019 at 8:39pm

जं

Comment by TEJ VEER SINGH on May 10, 2019 at 5:39pm

हार्दिक आभार आदरणीय नीता कसार जी।

Comment by Nita Kasar on May 10, 2019 at 4:20pm

वर्तमान राजनैतिक  परिस्थति से रूबरू कराती कथा के लिये बधाई आद० तेजवीर सिंह जी ।

Comment by TEJ VEER SINGH on May 8, 2019 at 10:41am

हार्दिक आभार आदरणीय शेख उस्मानी साहब जी।

Comment by TEJ VEER SINGH on May 8, 2019 at 10:40am

हार्दिक आभार आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी।

Comment by TEJ VEER SINGH on May 8, 2019 at 10:39am

हार्दिक आभार आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी।

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on May 8, 2019 at 9:44am

सादर तेजवीर सिंह जी सादर अभिवादन। पिछली बार भूल वश आपकी रचना को शेख शहज़ाद उस्मानी साहब की रचना समझ ली थी। जिसकी वजह से प्रतिक्रिया देते समय नाम गलत लिख दिया। सादर क्षमा प्रार्थी हूँ। पुनः आपको एक अच्छी लघुकथा पर बधाई निवेदित करता हूँ। सादर

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on May 8, 2019 at 7:33am

आदाब आदरणीय   सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'   साहिब। यह बेहतरीन लघुकथा जनाब तेजवीर सिंह साहिब की सधी लेखनी से है।

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