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तमन्ना है कि बैठें पास कुछ बात हो

1222 1222 1222

तमन्ना है कि बैठें पास कुछ बात हो
अगर ख्वाब हो तो फिर कैसे मुलाकात हो

क़यामत भले हो जाये उस के बाद अच्छा
किनारा झील का औ चांदनी रात हो

तभी तो मैं तुम्हारा हूँ कहूँ खुद को
मेरी आँखों से निकले तेरे ज़ज़्बात हो

फिरूँ हूँ मैं तलाश में तेरी ख्वाब मेरे
कभी तो रु ब रु कोई करामात हो

दुआओं में मांगू मैं यही हर पल
ख़ुशी हो पास तेरे और इफरात हो

दण्डपाणि नाहक

मौलिक एवम् अप्रकाशित

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Comment by Samar kabeer on July 20, 2019 at 8:26pm

जनाब दण्डपाणि नाहक़ जी आदाब,ग़ज़ल अभी समय चाहती है,कृपया दिए गए अरकान पर इसकी तक़ती'अ करके देखें,मिसरे बह्र में नहीं हैं ।

कृपया ध्यान दे...

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