For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

जुबां से फूल झड़ते हैं मगर पत्थर उछालें वे
गजब दिलदार हैं, महबूब हैं बस खार पालें वे।1

लगाते आग पानी में, हमेशा ही लगे रहते
बुझे क्यूँ रार की बाती, नई तीली निकालें वे।2

दिलों की आग जब उठकर दिलों को यूँ बुलाती है
करेंगे और क्या बस शीत जल हर बार डालें वे।3

समझना हो गया मुश्किल चलन अब के रफ़ीकों का
सियाही लिख नहीं सकती है' कितना रोज सालें वे।4

हकीकत फासलों में कैद होकर छटपटाती है
सुनेंगे तो नहीं कुछ गाल जितना भी बजालें वे।5
"मौलिक व अप्रकाशित"

Views: 63

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Manan Kumar singh on September 21, 2019 at 1:56pm

आभार आदरणीय।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on September 21, 2019 at 12:28pm

वाह बढ़िया ग़ज़ल कही है आदरणीय..

Comment by Manan Kumar singh on September 20, 2019 at 10:00am

आपका बहुत बहुत आभार आदरणीय बसंत शर्मा जी।

Comment by बसंत कुमार शर्मा on September 19, 2019 at 9:45pm
आदरणीय मनन कुमार सिंह जी सादर नमस्कार
बधाई हो आपको बढ़िया ग़ज़ल की
Comment by Manan Kumar singh on September 19, 2019 at 8:03pm

जी जनाब समर जी,नमस्ते।आपका बहुत बहुत शुक्रिया।

Comment by Samar kabeer on September 19, 2019 at 2:31pm

जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 102 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सत्यनारायण जी, आपकी रचना के लिए आपका सादर धन्यवाद.  आपने इस बार की विभीषिका का…"
4 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 102 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभा जी, आयोजन में आपकी उपस्तिथि प्रतीक्षित थी। इस बार के आयोजन के दोनों छंदों में आपकी…"
11 minutes ago
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 102 in the group चित्र से काव्य तक
"कही बात पूरी सही छन्द है लुभाता हमें देख लो बंद है पढ़ें बिन जिन्हें बस नहीं हम रहें बधाई बधाई बधाई…"
3 hours ago
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 102 in the group चित्र से काव्य तक
"कुदरत की हो मार या, ये शोषक के काम ख़बरी सच्चे को कहाँ, मिलता है आराम मिलता है आराम, चैन कब उसे…"
3 hours ago
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 102 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सत्यनारायण जी, सादर नमन! उत्साहवर्धन के लिए सादर हार्दिक आभार।"
3 hours ago
Dr. Geeta Chaudhary commented on प्रशांत दीक्षित 'सागर''s blog post याद उनको कभी,मेरी आती नहीं
"प्रशांत दीक्षित जी बहुत सुंदर रचना, आपको ढेरों शुभकमनाएं.."
4 hours ago
SALIM RAZA REWA posted a blog post

जब तलक ख़ुद ख़ुदा नहीं चाहे - सलीम रज़ा

हौसला जिसका मर नहीं सकता मुश्किलों से वो डर नहीं सकतालोग कहते हैं ज़ख़्म गहरा हैमुद्दतों तक ये भर…See More
4 hours ago
प्रशांत दीक्षित 'सागर' posted a blog post

याद उनको कभी,मेरी आती नहीं

212 212 212 212याद उनको कभी,मेरी आती नहीं ।और ख्वाबों से मेरे,वो जाती नहीं ।।सो रही अब भी वो, चैन…See More
4 hours ago
Satyanarayan Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 102 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभा पांडे जी कुण्डलिया एवं शक्ति छंद में दोनों प्रस्तुतियां अतिसुन्दर बन पड़ी है हार्दिक…"
6 hours ago
Satyanarayan Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 102 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सतविन्द्र कुमार राणा जी प्रदत्त चित्र पर सुन्दर भावाभियक्ति हेतु हार्दिक बधाई स्वीकार…"
6 hours ago
प्रशांत दीक्षित 'सागर' commented on प्रशांत दीक्षित 'सागर''s blog post ग़ज़ल - चरागाँ इक मुहब्बत का जला दो तुम
"Bilkul Sir"
6 hours ago
Satyanarayan Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 102 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश जी प्रदत्त चित्र के भाव को परिभाषित करती सुन्दर कुण्डलिया छंद की प्रस्तुति हेतु…"
6 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service