For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

थामूँ तोरी बाँहे गोरी / तिन्ना छंद

2 2 2 2

चोरी-चोरी।
ओ री छोरी।
थामूँ तोरी।
बाँहे गोरी।

जागे नैना।
पूरी रैना।
खोएँ चैना।
भूले बैना।

आजा चूमूँ।
थोड़ा झूमूँ।
सांसे घोलूँ।
तेरा होलूँ।

- विमल शर्मा 'विमल'
स्वरचित

Views: 213

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by विमल शर्मा 'विमल' on Monday

आद० लक्ष्मण धामी जी ..हार्दिक आभार आपका

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 20, 2019 at 4:49am

आ. विमल जी, बेहतरीन रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by विमल शर्मा 'विमल' on October 27, 2019 at 9:31pm
बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार आदरणीय विजय जी
Comment by vijay nikore on October 25, 2019 at 2:31pm

अति सुन्दर रचना के लिए हार्दिक बधाई, मित्र विमल जी।

Comment by विमल शर्मा 'विमल' on October 18, 2019 at 12:36pm
आदरणीय 'समर कबीर' साहब एवं 'प्रशांत दीक्षित सागर ' साहब आपके उत्साहवर्धन हेतु हृदय की अनंत गहराईयों से बहुत बहुत धन्यवाद आपका....आप अपना आशीष ऐसे ही प्रदान करते रहें।
Comment by प्रशांत दीक्षित 'सागर' on October 18, 2019 at 7:47am

चोरी-चोरी।
ओ री छोरी।
थामूँ तोरी।
बाँहे गोरी।

बहुत अच्छा है सर ।

Comment by Samar kabeer on October 17, 2019 at 11:41am

जनाब विमल शर्मा 'विमल' जी आदाब,अच्छी कविता हुई,बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

विमल शर्मा 'विमल' commented on विमल शर्मा 'विमल''s blog post रंग हम ऐसा लगाने आ गये - विमल शर्मा 'विमल'
"आदरणी अग्रज लक्ष्मण धामी जी कोटिशः आभार एवं धन्यवाद"
3 hours ago
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post कैसे कहें की इश्क़ ने क्या क्या बना दिया - सलीम 'रज़ा'
"नज़रे इनायत के लिए बहुत शुक्रिया नीलेश भाई , आप सही कह रहें हैं कुछ मशवरा अत फरमाएं।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कठिन बस वासना से पार पाना है-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'( गजल )
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन । गजल के अनुमोदन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
yesterday
Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : इक दिन मैं अपने आप से इतना ख़फ़ा रहा
"आपकी पारखी नज़र को सलाम आदरणीय निलेश सर। इस मिसरे को ले कर मैं दुविधा में था। पहले 'दी' के…"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएँ : ....
""आदरणीय   Samar kabeer' जी सृजन पर आपकी ऊर्जावान प्रतिक्रिया का दिल से…"
yesterday
PHOOL SINGH commented on PHOOL SINGH's blog post पिशुन/चुगलखोर-एक भेदी
"भाई विजय निकोरे आपने मेरी रचना के अपना समय निकाला उसके लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद "
yesterday
PHOOL SINGH commented on PHOOL SINGH's blog post एक पागल की आत्म गाथा
"कबीर साहब को मेरी रचना के लिए समय निकालने के लिए कोटि कोटि धन्यवाद "
yesterday
Nilesh Shevgaonkar commented on SALIM RAZA REWA's blog post कैसे कहें की इश्क़ ने क्या क्या बना दिया - सलीम 'रज़ा'
"आ. सलीम साहब,अच्छा प्रयास है। . पोस्ट करने की जल्दबाज़ी में यूसुफ़ तो नहीं था वो मेरा चाहने…"
yesterday
Nilesh Shevgaonkar commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : इक दिन मैं अपने आप से इतना ख़फ़ा रहा
"बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है आ. महेंद्र जी। .ख़ुद को लगा दी ..ख़ुद को लगा के . बस ऐसी ही छोटी…"
yesterday
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- तू ये कर और वो कर बोलता है.
"शुक्रिया आ. समर सर,आपके कहे अनुसार ज़बां का टाइपो एरर मूल प्रति में दुरुस्त क्र लिया है. मेरे…"
yesterday
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- तू ये कर और वो कर बोलता है.
"शुक्रिया आ. लक्ष्मण जी "
yesterday
Mahendra Kumar posted blog posts
yesterday

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service