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घर में किसी बुजुर्ग ने, दिया आप को नाम
नाम बड़ा अब कीजिये, करके अच्छे काम
करके अच्छे काम, बढ़े कद जिससे अपना
जग हित हो हर श्वांस, बड़ा ही देखें सपना
पद वैभव सम्मान, ख्याति हो दुनिया भर में
उत्तम जन कुलश्रेष्ठ, आप ही हों हर घर में।।

जह्र फिजा में है घुला, नगर शहर या गाँव
बाग बगीचे काट कर, खोजे मानव छाँव
खोजे मानव छाँव, भला अब कैसे पाए
जब खुद गड्ढा खोद, उसी में गिरता जाए
धुन्ध धुँआ बारूद, बहें मिल खूब हवा में
कैसे लें अब साँस, घुला जब जह्र फिजा में।।

मास्क लगाकर सब चलें, हर कोई हलकान
वायु प्रदूषण यूँ बढ़ा, मिलता नहीं निदान
मिलता नहीं निदान, श्वांस लें कैसे खुलकर
धूम धूल बारूद, हवा में उड़ती घुलकर
स्वयं करे जब धुंध-धुँआ अवशिष्ट जलाकर
हो तब हाहाकार, चलें सब मास्क लगाकर।।

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by vijay nikore on November 19, 2019 at 12:11am

इस सुन्दर रचना के लिए बधाई, मित्र सुरेन्द्र जी।

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on November 18, 2019 at 7:09pm

बेहतरीन कुण्डलिया और सार्थक सन्देश भी. बहु बहुत बधाई आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह जी!

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on November 12, 2019 at 9:37pm

आद0 अग्रज समर कबीर जी सादर प्रणाम। रचना पर आपकी उपस्थिति का बेसब्री से इन्तिजार रहता है। आपकी प्रतिक्रिया परिष्करण के लिए बेहद सटीक होती है। आभार आपका। सादर

Comment by Samar kabeer on November 9, 2019 at 4:04pm

जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह जी आदाब,अच्छे कुण्डलिया छन्द लिखे आपने,बधाई स्वीकार करें ।

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on November 9, 2019 at 5:23am

आद0 लक्ष्मण धामी जी सादर अभिवादन। आपने रचना पढ़ी और अपनी खूबसूरत प्रतिक्रिया से मुझे पुरस्कृत किया,, हृदय तल से आभार आपका।

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on November 9, 2019 at 5:21am

आद0 फूल सिंह जी सादर अभिवादन।रचना पर आपने वक़्त दिया। और रचना अच्छी लगी,, इसके लिए हृदय तल से आभारी हूँ। सादर

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 8, 2019 at 8:13pm

आ. भाई सुरेंद्र सिह जी, उत्तम कुंडलियाँ हुई हैं । हार्दिक बधाई।

Comment by PHOOL SINGH on November 8, 2019 at 12:56pm

एक बहतरीन प्रस्तुति के लिए बधाई 

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