For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अकेलापन —डॉo विजय शंकर

जिंदगी जीने का मौक़ा ,
भीड़ से निकल कर मिलता है ,
माहौल कुछ इस कदर
असर करता है।
अकेले हों तो ख़ुद से बात
करने का मौक़ा मिलता है l
भीड़ में तो आदमी बस
दूसरों की सुनता है।
हर आदमी कोई न कोई
सवाल लिए मिलता है ,
आपको अपनी सुनाता है ,
फिर भी आपके जवाब
को कौन सुनता है ?
शायद इसीलिये अकेलापन
आपको बहुत कुछ सीखने
समझने का मौक़ा देता है।
जिंदगी जीने का मौक़ा तो
भीड़ से निकल कर ही मिलता है।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 100

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Dr. Vijai Shanker on November 8, 2019 at 7:28pm

आदरणीय फूल सिंह जी , कविता स्वीकृति प्रदान करने के लिए आभार एवं बधाई के लिए ह्रदय से धन्यवाद , सादर।

Comment by PHOOL SINGH on November 8, 2019 at 12:59pm

डॉ साहब बहुत सुंदर रचना बधाई स्वीकारे

Comment by Dr. Vijai Shanker on November 8, 2019 at 8:03am

आदरणीय लक्ष्मण धामी “मुसाफिर” जी , कविता स्वीकर करने के लिए आभार एवं बधाई के लिए ह्रदय से बहुत बहुत धन्यवाद , सादर।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 8, 2019 at 7:10am

आ. भाई विजय जी, अच्छी प्रस्तुति हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Dr. Vijai Shanker on November 8, 2019 at 7:05am

आदरणीय सुरेद्रनाथ सिंह जी , कविता स्वीकर करने के लिए आभार एवं बहुत बहुत धन्यवाद , सादर।

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on November 7, 2019 at 10:54pm

आद0  डॉ. विजय शंकर जी सादर अभिवादन। बढ़िया प्रस्तुति है। इस रचना के बाबत आद0 अग्रज समर साहब के बातों से मैं भी सहमत हूँ। बधाई स्वीकार कीजिये। सादर

Comment by Dr. Vijai Shanker on November 7, 2019 at 9:20pm

आदरणीय समर कबीर साहब, नमस्कार , आपकी प्रतक्रिया इसी लिए तो प्रतीक्षित रहती है कि कहीं भी कुछ क्षीणता हो आप न केवल पकड़ लेते हैं , सुझाव भी सुन्दर देते हैं , बहुत बहुत आभार , आगे से पूरा ध्यान रखूँगा। कविता स्वीकृति प्रदान करने के लिए आभार एवं धन्यवाद , सादर।

Comment by Samar kabeer on November 7, 2019 at 11:48am

जनाब डॉ. विजय शंकर जी आदाब,कविता का मफ़हूम अच्छा है,लेकिन हर दूसरी पंक्ति में 'है' का दुहराव कविता को कमज़ोर कर रहा है,मुझे इस कविता में आपका ख़ास अंदाज़ देखने को नहीं मिला, हो सकता है ये मेरी अपनी सोच का नतीजा हो,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Dr. Vijai Shanker on November 5, 2019 at 9:36pm

आदरणीय सुशील सरना जी , रचना को स्वीकार कर मान देने के लिए एवं बधाई के आभार एवं धन्यवाद , सादर।The 

Comment by Sushil Sarna on November 5, 2019 at 4:56pm

वाह आदरणीय डॉ विजय शंकर जी वाह , बहुत खूब .. अकेलेपन की व्यथा को चित्र्ति करती अति सुंदर रचना। दिल से बधाई।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"आदरणीय मोहम्मद अनीस अरमान जी बहुत ही बेहतरीन गजल हुई बधाइयां कबूल करें"
3 hours ago
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"आदरणीय लक्ष्मण धामी भाई जी बहुत बेहतरीन गजल हुई शशे दर शेर दाद कबूल करें"
3 hours ago
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"आदरणीय मनन कुमार सिंह जी गजल कहने के लिए बहुत-बहुत बधाइयां अच्छी ग़ज़ल हुई बाकी गुनी जनों की बात पर…"
3 hours ago
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"आदरणीय तस्दीक अहमद जी बेहतरीन ग़ज़ल कहने के लिए बहुत-बहुत बधाइयां। इस शेर का भाव स्पष्ट नहीं हो पा…"
4 hours ago
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"अजय गुप्ता जी एक बेहतरीन और उम्दा ग़ज़ल के लिए बहुत-बहुत बधाइयां शेर दर शेर दाद कबूल कीजिए"
4 hours ago
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
" आदरणीय महेंद्र जी बहुत ही बेहतरीन गजल हुई दाद के साथ मुबारकबाद कबूल कीजिए।"
4 hours ago
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"बहुत उम्दा अशआर हैं अंजली जी। विशेष तौर पर मक़्ता बहुत पसंद आया।"
5 hours ago
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"अच्छी ग़ज़ल हुई है सुरेंद्र जी। बधाई आपको"
5 hours ago
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"शुक्रिया अनीस भाई"
5 hours ago
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"शुक्रिया तसदीक़ साहब"
5 hours ago
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"शुक्रिया सुरेंद्र जी"
5 hours ago
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"शुक्रिया अंजली जी"
5 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service