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पानी पर चंद दोहे :

पानी पर चंद दोहे :

प्यासी धरती पर नहीं , जब तक बरसे नीर।
हलधर कैसे खेत की, हरित करे तकदीर।१ ।

पानी जीवन जीव का, पानी ही आधार।
बिन पानी इस सृष्टि का, कैसे हो शृंगार।२ ।

पानी की हर बूँद में, छुपा हुआ है ईश।
अंतिम पल इक बूँद से, मिल जाता जगदीश।३ ।

पानी तो अनमोल है, धरती का परिधान।
जीवन ये हर जीव को, प्रभु का है वरदान।४ ।

बूँद बूँद अनमोल है, इसे न करना व्यर्थ।
अगर न चेते आज तो, होगा बड़ा अनर्थ।५ ।

जल संरक्षण के लिए, किया न अगर प्रयास।
कैसे मानव फिर भला, बुझ पाएगी प्यास।६ ।

श्यामवर्ण सा हो गया, दूषित गंगा नीर।
धरती दूषित नीर की, किसे सुनाये पीर।७ ।

कैसे बदलें मेघ अब, धरती की तकदीर।
जंगल सारे कट गए, बरसे कैसे नीर।८।

जल बिन जीना है कठिन, मानव को है ज्ञान।
क्यों संरक्षण की तरफ, जाता उसका ध्यान।९ ।

कहीं बुझाता प्यास ये, कहीं करे संहार।
पानी तेरे रूप की महिमा अपरम्पार।१० ।

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Sushil Sarna yesterday

आदरणीय  Mahendra Kumar जी सृजन पर आपकी ऊर्जावान प्रतिक्रिया का दिल से आभार।आदरणीय आप सही हैं टंकण त्रुटि रह गई। अभी संशोधित करता हूँ। हार्दिक आभार इस त्रुटि की तरफ ध्यान आकर्षित करने का। 

Comment by Mahendra Kumar on Wednesday

पानी पर बढ़िया दोहे कहे हैं आपने आदरणीय सुशील सरना जी। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।

मुझे लगता है कि "पानी का हर बूँद में" की जगह "पानी की हर बूँद में" होना चाहिए। देख लीजिएगा।

सादर।

Comment by Sushil Sarna on Tuesday

आदरणीय  vijay nikore जी सृजन पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का तहे दिल से शुक्रिया।

Comment by vijay nikore on Saturday

आप दोहों की विधा में माहिर हैं, अच्छे लिखे। बधाई, मित्र सुशील जी।

Comment by Sushil Sarna on Saturday

आदरणीय  SALIM RAZA REWA'  जी आपकी ऊर्जावान प्रशंसा से सृजन धन्य हुआ , तहे दिल से शुक्रिया।

Comment by Sushil Sarna on Saturday

आदरणीय  सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'  जी आपकी ऊर्जावान प्रशंसा से सृजन धन्य हुआ , तहे दिल से शुक्रिया।

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on November 28, 2019 at 8:42pm

आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। बेहतरीन रचना पर दिल खोल कर बधाई स्वीकार कीजिये। सादर

Comment by SALIM RAZA REWA on November 26, 2019 at 8:39pm

पानी पर सुन्दर दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई

Comment by Sushil Sarna on November 26, 2019 at 4:04pm

आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब , सृजन पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का तहे दिल से शुक्रिया।

Comment by Sushil Sarna on November 26, 2019 at 4:04pm
आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सृजन पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का तहे दिल से शुक्रिया।

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