For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

एक दुजे के अब हबीब नहीं रहे हैं
लोकतंत्र औ हम करीब नहीं रहे हैं

फसल की वाज़िब मिले क़ीमत ऐसी तो
हम किसानों के नसीब नहीं रहें हैं

खत्म करके सब गरीबों को मुल्क से
घोषणा कर दो गरीब नहीं रहे हैं

हर ज़ुल्म हमने सहे हैं मगर फिर भी
यूँ कभी भी बेतर्तीब नहीं रहें हैं

मंदिर मस्जिद एक साथ न हो कभी भी
इस क़द्र तंग तहज़ीब नहीं रहे हैं


दण्डपाणि नाहक
मौलिक एवम् अप्रकाशित

Views: 99

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 25, 2018 at 7:14am

आ. दण्डपाणि जी, हार्दिक बधाई ।

Comment by surender insan on March 23, 2018 at 10:44pm

आद. दण्डपाणि जी सादर नमन।वाह अच्छा प्रयास है आपका बधाई। मोहतरम समर साहब की सलाह पर गौर करे।

स्थापित शायरों का कलाम पढ़े। भाषा का ख्याल रखते हुए वाक्य रचना करे। यही पटल पे बहुत से लेख है ग़ज़ल की बाबत उन्हें पढ़े। यक़ीनन आप और अच्छा कहेंगे।

सादर जी।

Comment by Nilesh Shevgaonkar on March 22, 2018 at 7:23pm

अच्छा प्रयास है आ. दण्डपाणी जी 
बहर यानी लय का अभ्यास/ अध्ययन कीजिये 
सादर 

Comment by Mohammed Arif on March 22, 2018 at 4:39pm

आदरणीय दंडपाणि जी आदाब,

                        ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है । आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब की इस्लाह का तत्काल प्रभाव से संज्ञान लें । प्रयास हेतु हार्दिक बधाई ।

Comment by Samar kabeer on March 22, 2018 at 3:07pm

जनाब दण्डपाणि नाहक़ जी आदाब,  बह्र के साथ ग़ज़ल के शिल्प और व्याकरण पर अभी बहुत मिहनत की ज़रूरत है,इसके लिए पुराने शायरों का कलाम पढ़ें और ओबीओ पटल पर मौजूद ग़ज़लों और आलेखों का अध्यन करें ।

इस प्रयास हेतु बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Nita Kasar commented on Manan Kumar singh's blog post बाज़ (लघुकथा)
"आज की ज्वलंत समस्या पर प्रकाश डाला है जो सोशल मीडिया और अख़बारों में प्रमुखता से सामने आई है…"
22 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ६२
"आद0 राज़ नवादवी जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल कही आपने। कुछ शैर तो यकीनन दिल को छू गए। बधाई स्वीकार…"
25 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on रामबली गुप्ता's blog post मत्तगयंद सवैया-रामबली गुप्ता
"आद0 रामबली जी सादर अभिवादन। बढ़िया भक्ति भाव से भरी छंद रचना की आपने। बधाई स्वीकार कीजिये"
29 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on V.M.''vrishty'''s blog post मौत की उम्मीद पर (ग़ज़ल)
"आद0 वी. एम वृष्टि जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल कही आपने। शैर दर शैर बधाई स्वीकार कीजिये"
31 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'मेरी आवाज़ सुनो!' (लघुकथा)
"आद0 शेख शहज़ाद उस्मानी साहब सादर अभिवादन। वाकई में यहां पर सबको अपनी ज़िन्दगी खुल कर जीने का अधिकार…"
33 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on V.M.''vrishty'''s blog post इंसान का अस्तित्व
"आद0 वीएम वृष्टि जी सादर अभिवादन। बढिया अतुकांत लिखी आपने। इस प्रस्तुति पर बधाई निवेदित है।"
37 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post मेरी हर निशानी मिटाने से पहले
"आद0 नवीन मणि त्रिपाठी जी सादर अभिवादन। बढिया ग़ज़ल कही आपने। शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता…"
39 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post पढ़ो तो इसको’ फाड़ो मत- गजल
"आद0 बसन्त कुमार शर्मा जी सादर अभिवादन। ग़ज़ल का बेहतरीन प्रयास किया है आपने। आली जनाब समर साहब ने…"
41 minutes ago
डॉ छोटेलाल सिंह commented on V.M.''vrishty'''s blog post मस्तिष्क और हृदय
"वाह वृष्टि जी आपकी सुधा वृष्टि से मन अभिभूत हुआ इस कालजयी रचना के लिए बहुत बहुत बधाई"
1 hour ago
डॉ छोटेलाल सिंह commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दुख बयानी है गजल - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आदरणीय धामी साहब उत्तम गजल के लिए बहुत बहुत बधाई"
1 hour ago
डॉ छोटेलाल सिंह commented on रामबली गुप्ता's blog post मत्तगयंद सवैया-रामबली गुप्ता
"आदरणीय रामबली जी आप तो इस विधा के माहिर हैं आपकी काबिलियत को नमन"
1 hour ago
डॉ छोटेलाल सिंह commented on V.M.''vrishty'''s blog post काली स्याही
"आ वृष्टि जी जबरदस्त भावों को समाहित की हुई आकर्षक रचना के लिए हार्दिक बधाई"
1 hour ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service