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जब कभी दौरे जाम होता है
सब यहाँ इंतजाम होता है

सच ही कहता हूँ मेरे साकी के
दोनों हाथों में जाम होता है

और मै उस जगह नही पीता
जिस जगह एहतराम होता है

उसके बच्चों का बस ख़ुदा जाने
किस तरह इंतजाम होता है

डूब कर जब ग़ज़ल कहे शायर
उसका पुख्ता कलाम होता है

शायरी दिल को छू गई जिसकी
उसका महफ़िल में नाम होता है

किस से शिकवा करूँ मैं फिर "गुलशन"
हर तरह मेरा काम होता है

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Comment

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मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 22, 2012 at 9:27am

//शायरी दिल को छू गई जिसकी
उसका महफ़िल में नाम होता है//

सच्ची बात गुलशन साहब, अच्छी रचना |


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 20, 2012 at 3:50pm

किस से शिकवा करूँ मैं फिर "गुलशन"
हर तरह मेरा काम होता है

वाह !

Comment by Rekha Joshi on May 20, 2012 at 10:35am

शायरी दिल को छू गई जिसकी 
उसका महफ़िल में नाम होता है|

ashfaq ji ,shaayri dil ko chhu gai badhai

Comment by Nilansh on May 20, 2012 at 10:01am

और मै उस जगह नही पीता
जिस जगह एहतराम होता है


bahut sunder gulshan ji

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on May 19, 2012 at 10:16pm

और मै उस जगह नही पीता
जिस जगह एहतराम होता है

उसके बच्चों का बस ख़ुदा जाने 
किस तरह इंतजाम होता है

बहुत खूब   असफाक भाई ...सुन्दर सन्देश ...भ्रमर  ५ 

Comment by MAHIMA SHREE on May 19, 2012 at 8:47pm

उसके बच्चों का बस ख़ुदा जाने
किस तरह इंतजाम होता है

बहुत खूब .. बधाई आपको



Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 19, 2012 at 7:00pm
आदरणीय गुलशन भाई  जी, सादर 

उसके बच्चों का बस ख़ुदा जाने 
किस तरह इंतजाम होता है
बहुत khoob, badhai


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 19, 2012 at 1:51pm

nice ghazal

Comment by MOHD. RIZWAN (रिज़वान खैराबादी) on May 19, 2012 at 12:42pm

Very Nice


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