For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

दुश्मनी से डर कैसा दोस्ती से डरते हैं

दुश्मनी से डर कैसा दोस्ती से डरते हैं..
खाये हैं फ़रेब इतने हर ख़ुशी से डरते हैं..

जब से आशियाँ अपना जल गया गुलिस्ताँ में..
हो कहीं उजाला हम रौशनी से डरते हैं..

हम तो धूप के राही साथ-साथ सूरज है..
जिस्म जिनके नाज़ुक हैं चाँदनी से डरते हैं..

कुछ न कुछ तो होगा ही इसलिए जहां वाले..
आदमी की सूरत में आदमी से डरते हैं..

मौसम-ए-बहारां में दिल है मुतमइन लेकिन..
हम ग़मों के मौसम की वापसी से डरते हैं..

उँगलियाँ न उठ जायें तार तार दामन पर..
शायद इस लिए "गुलशन" बेख़ुदी से डरते हैं..

Views: 139

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Albela Khatri on June 14, 2012 at 1:22pm


जनाब अशफ़ाक अली ( गुलशन खैराबादी)  साहेब,
बहुत ख़ूब.........

जब से आशियाँ अपना जल गया गुलिस्ताँ में..
हो कहीं उजाला हम रौशनी से डरते हैं..

हम तो धूप के राही साथ-साथ सूरज है..
जिस्म जिनके नाज़ुक हैं चाँदनी से डरते हैं..

__गज़ब के अशआर...बधाई ! 

Comment by Bishwajit yadav on June 13, 2012 at 2:35pm
प्रणाम गुलशन जी
दुश्मनी से डर कैसा दोस्ती से डरते हैं..
खाये हैं फ़रेब इतने हर ख़ुशी से डरते है
बहुत बेजोड क्या बात है
"टच माई दिल"
Comment by yogesh shivhare on June 12, 2012 at 6:37pm

कुछ न कुछ तो होगा ही इसलिए जहां वाले..
आदमी की सूरत में आदमी से डरते हैं..

 

बहुत खूब लिखा है जनाब ..आपने हकीकत को क्या खूब पेश की है

Comment by SHARIF AHMED QADRI "HASRAT" on June 12, 2012 at 4:20pm

janab mohtram ashfaq saaheb is khoobsoorat ustadaana kalam ke liye dil se mubarakbaad pesh karta hoon kubool kijiye

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 12, 2012 at 3:02pm

आदरणीय गुलशन जी , सादर 

बहुत सुन्दर भावों से सजी गजल कहते हैं 

एक नजर हम पे भी कभी पड़ोस में रहते हैं 

बधाई.

Comment by Arun Sri on June 12, 2012 at 10:21am

हम तो धूप के राही साथ-साथ सूरज है..
जिस्म जिनके नाज़ुक हैं चाँदनी से डरते हैं..

वाह ! वाह ! क्या उम्दा गज़ल कही ! बहुत बढ़िया !

Comment by Yogi Saraswat on June 12, 2012 at 10:20am

कुछ न कुछ तो होगा ही इसलिए जहां वाले..
आदमी की सूरत में आदमी से डरते हैं..

क्या बात है श्री असफाक अली साब ! बहुत बढ़िया ग़ज़ल ! एक एक अश'आर खूबसूरत !

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on June 12, 2012 at 9:17am

waah waah ..................bahut khoob ,daad kubool kijiye aadarneey

Comment by UMASHANKER MISHRA on June 11, 2012 at 11:16pm

आपके इस गज़ल की प्रशंसा के लिए शब्द नहीं है मेरे पास

असफाक जी. जो भाव मेरे मन में दुष्यंत जी के लिए है

वही भाव आपके प्रति है. आपकी सभी गजलें मन को भाती हैं

आपका आभार बहेतरीन ग़ज़लों के लिए

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post शृंगारिक दोहे :
"आ. भाई सुशील जी, सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
53 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post अथ अभिकल्पित-आचार-संहिता (आलेख)
"आ. भाई शेख उस्मानी जी, बेहतरीन आलेख के लिए कोटि कोटि बधाई।"
57 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई नवीन जी, सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Anamika singh Ana's blog post गीत
"आ. अनामिका जी, इस बेहतरीन गीत के लिए हार्दिक बधाई।"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on TEJ VEER SINGH's blog post बौना आदमी - लघुकथा -
"आ. भाई तेजवीर सिंह जी सादर अभिवादन। सुंदर- संदेशपरक लघुकथा पर ढेरों बधाई ।"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दोहे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई नरेन्द्र सिह जी, सादर अभिवादन। दोहों पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार।"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दोहे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई तस्दीक अहमद जी, सादर अभिवादन। दोहों पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
1 hour ago
TEJ VEER SINGH posted a blog post

गंगा - लघुकथा -

गंगा - लघुकथा -शंकर सेना में  हवलदार था। उसकी पोस्टिंग सिलीगुड़ी में थी। आज उसका अवकाश था तो अपनी…See More
8 hours ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या माह अप्रैल 2019 – एक प्रतिवेदन                                      डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्य संध्या माह अप्रैल 2019 का आगाज रविवार दिनांक 28अप्रैल 2019 को श्री…See More
8 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post मेरा भारत महान - लघुकथा -
"हार्दिक आभार आदरणीय शेख उस्मानी साहब जी।"
10 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on TEJ VEER SINGH's blog post मेरा भारत महान - लघुकथा -
"आदाब। कच्चा चिट्ठा। हार्दिक बधाई आदरणीय तेजवीर सिंह साहिब इस बढ़िया व उम्दा रचना के लिए।"
13 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दोहे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन। दोहों पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
14 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service