For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

रिम झिम रिम झिम बारिश होने लगती है

फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़

यारों में जब रंजिश होने लगती है
चुपके चुपके साज़िश होने लगती है

आँखों में जब सोज़िश होने लगती है
रिम झिम रिम झिम बारिश होने लगती है

बाबू जी का साया सर से उठते ही
धरती की पैमाइश होने लगती है

तुम जब मेरे साथ नहीं होते जानाँ
मुझ पर ग़म की यूरिश होने लगती है

मुझसे कोई काम अटक जाता है जब
उनको मेरी काविश होने लगती है

जब जब भी मैं नाम तुम्हारा लिखता हूँ
हाथों में क्यूँ लरज़िश होने लगती है

बच्चे ग़ुरबत को क्या समझें उनकी तो
रोज़ नई फ़रमाइश होने लगती है

मुझसे कोई भूल "समर" हो जाये तो
महशर जैसी पुरसिश होने लगती है

---

रंजिश :- दुश्मनी
साज़िश :- षडयंत्र
सोज़िश :- जलन
पैमाइश :- माप (नपती)
यूरिश :- हमला
काविश :- तलाश
लरज़िश :- कम्पन्न
ग़ुरबत :- ग़रीबी
महशर :- महाप्रलय के बाद ईश्वर जिस मैदान में हर इंसान से उसके कर्मों का हिसाब लेगा ।
पुरसिश :- पूछताछ (जवाब तलबी)
___

समर कबीर
मौलिक/ अप्रकाशित

Views: 316

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Samar kabeer on September 17, 2017 at 9:40pm
जनाब अफ़रोज़'सहर'साहिब आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिये आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।
Comment by Afroz 'sahr' on September 17, 2017 at 9:26pm
वाह वाहहहहह जनाब समर साहब बेहतरीन ग़ज़ल के लिए ढेरों बधाई
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on September 17, 2017 at 9:23pm

सादर धन्यवाद आदरणीय भाई जी | मुझे लग तो रही थे २२ २२ २२ २२ २२ २ है , पर कंफ्यूज हो रही थी | पुनः धन्यवाद आपका भाई जी |

Comment by Samar kabeer on September 17, 2017 at 9:18pm
बहना कल्पना भट्ट जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिये आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।
क्षमा मांगने की क्या बात है ।फेलुन यानी 22मेरी ग़ज़ल की गिन्ती है 22 22 22 22 22 2
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on September 17, 2017 at 9:13pm

आँखों में जब सोज़िश होने लगती है
रिम झिम रिम झिम बारिश होने लगती है

बाबू जी का साया सर से उठते ही
धरती की पैमाइश होने लगती है बहुत खूब भाई जी | जी भाई जी क्षमा चाहूंगी |

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on September 17, 2017 at 9:11pm

आदरणीय भाई जी फ़ेलुन की गिनती क्या २२ होती है ? यह जो ग़ज़ल आपने लिखी है उसकी गिनती क्या २२१ है ?

Comment by Samar kabeer on September 17, 2017 at 8:55pm
बहना कल्पना भट्ट जी आदाब,बहुत बहुत शुक्रिया आपका,लेकिन आपने जो अशआर पसन्द किये हैं वो इस ग़ज़ल के नहीं,मेरी दूसरी ग़ज़ल के हैं ।
Comment by Samar kabeer on August 5, 2017 at 5:07pm
जनाब भाई विजय निकोर जी आदाब,आपकी प्रतिक्रया पाकर मुग्ध हूँ,ये मेरे लिये बहुत बड़ा सम्मान है कि आपने मेरी इस ग़ज़ल को अपने ख़ूबसूरत अल्फ़ाज़ से नवाजा और इस पर दोबारा तशरीफ़ लाये और मेरी ग़ज़ल का मान बढ़ाया,इस स्नेह के लिए दिल की तमाम तर गहराइयों के साथ शुक्रगुज़ार हूँ आपका ।
Comment by Samar kabeer on August 5, 2017 at 5:03pm
जनाब सुशील सरना जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by vijay nikore on August 5, 2017 at 4:15pm

// आँखों में जब सोज़िश होने लगती है
रिम झिम रिम झिम बारिश होने लगती है

बाबू जी का साया सर से उठते ही
धरती की पैमाइश होने लगती है //

आपके हर एक शेर की अपनी ही खूबी है... ७ जुलाई को यह गज़ल पढ़ने के बाद इसके यह २ शेर तो जाने कब-कब खयालों में गूँजते रहे हैं .. कि जैसे आपकी गज़ल म्रेरे खयालों में खुद-ब-खुद पढ़ी जा रही है।

मंच को यह तोफ़ा देने के लिए आपको फिर से बहुत-बहुत बधाई, भाई समर जी।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Samar kabeer commented on santosh khirwadkar's blog post हुस्न को ......संतोष
"जनाब संतोष जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें ।"
26 minutes ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Dr. Vijai Shanker's blog post उपलब्धियाँ - डॉo विजय शंकर
"शीर्षक सुझाव : //कृत्रिम उपलब्धियां//"
2 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post पराजित हिन्द (लघुकथा)
"हालांकि प्रथम पात्र /जी हुजूर/, /जी-जी हुजूर/कहता हुआ आदरपूर्वक खड़े हुए ही बात कर रहा है, फिर भी…"
2 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Dr. Vijai Shanker's blog post उपलब्धियाँ - डॉo विजय शंकर
"बेहतरीन व्यंग्यात्मक सृजन। हार्दिक बधाई आदरणीय डॉ. विजय शंकर जी।"
2 hours ago
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post सत्यमेव् जयते - डॉo विजय शंकर
"आभार , आदरणीय लक्ष्मण धामी जी , सादर।"
2 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post पराजित हिन्द (लघुकथा)
"वाह। शीर्षक और उस गरिमामय अभिवादन/नारे 'जय हिन्द' के साथ आज के सत्य को पिरोकर बेहतरीन…"
2 hours ago
Kalipad Prasad Mandal commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post ग़ज़ल -कहीं वही तो’ नहीं वो बशर दिल-ओ-दिलदार
"सादर आभार आ सलीम जी "
3 hours ago
SALIM RAZA REWA commented on dr neelam mahendra's blog post क्यों न दिवाली कुछ ऐसे मनायें
"आ. नीलम जी, ख़ूबसूरत लेख के लिए बधाई."
3 hours ago
Dr. Vijai Shanker posted a blog post

उपलब्धियाँ - डॉo विजय शंकर

उप-शीर्षक -आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस से आर्टिफिशल हँसी तक।प्रकृति ,अनजान ,पाषाण ,ज्ञानविज्ञान ,गूगल…See More
3 hours ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post सवालों का पंछी सताता बहुत है-गीत
"आदरणीय लक्ष्मण सर बहुत बहुत आभार"
3 hours ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post सवालों का पंछी सताता बहुत है-गीत
"आदरणीय बाऊजी आपने सही ध्यान धराया है, सादर प्रणाम"
3 hours ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post तब सिवा परमेश्वर के औ'र जला है कौन-----गज़ल, पंकज मिश्र
"आदरणीय आशुतोष सर सादर आभार"
3 hours ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service