For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

प्रतिबंधित मुलाकात हुई है-ग़ज़ल

22 22 22 22

उनसे मेरी बात हुई है
प्रतिबंधित मुलाक़ात हुई है

सारे स्वप्न तरल हैं मेरे
देखो तो बरसात हुई है

स्याही बन कर भस्म्है बिखरी
यूँ न अधेरी रात हुई है

मन खुद में ही खोज खुदी से
शांति कहाँ, आयात हुई है

दिल वो जीते दर्द मग़र हम
मत समझो बस मात हुई है

मौलिक अप्रकाशित

Views: 174

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on January 9, 2018 at 4:27pm

आदरणीय अफरोज जी आपका सुझाव उचित है लेकिन मुझे लगता है कि मैंने शब्दों को उनके लिंग के अनुरूप ही स्थान दिया है

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on January 9, 2018 at 4:26pm

आदरणीय सुरेंद्र सर आपके सुझाव पर विचार अवश्य होगा

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on January 9, 2018 at 4:26pm

आदरणीय आरिफ सर बहुत-बहुत आभार

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on January 9, 2018 at 4:25pm

आदरणीय मनोज भाई, शुक्रिया; अंतिम शेर में मैंने कहना चाहा है कि

जिसको दिल की हिफाजत सौंपा गया है वह अपने आप में खुद ही एक आघात है

बाकी, हो सकता है कहन कमज़ोर हो।

Comment by Afroz 'sahr' on January 9, 2018 at 4:02pm
आदरणीय पंकज मिश्रा जी इस रचना पर बधाई स्वीकार करें। मतले के सानी मिसरे की तक़्तीअ को लेकर असमंजस
है। कृपा कर स्पष्ट करें।5वें शेर में लफ़्ज़ "हिफ़ज़त" स्त्रीलिंग है।इसी शेर में लफ़्ज़ "आघात" पुल्लिंग है,,,,
Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on January 9, 2018 at 11:27am

आद0 पंकज जी सादर अभिवादन। बेहतरीन ग़ज़ल कही आपने। एक बात कहना चाहूंगा,वैसे ग़ज़ल में मात्रा पतन का लाभ लिया जाता है, पर अगर इस बह्र में न लिया जाए तो लय और बढ़िया रहती है। सादर

आपको शैर दर शैर मुबारकबाद पेश करता हूँ।

Comment by Mohit mishra (mukt) on January 9, 2018 at 8:54am

आदरणीय पंकज जी अच्छी ग़ज़ल भावपक्ष से ,शिल्प पर गुणीजन राय देंगे। रचना के लिए बधाई , सादर

Comment by Mohammed Arif on January 9, 2018 at 7:46am

आदरणीय पंकज मिश्रा जी आदाब,

                                    बहुत ही बेहतरीन हिंदी ग़ज़ल । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए । बाक़ी गुणीजनों का इंतज़ार करें ।

Comment by Manoj kumar Ahsaas on January 8, 2018 at 10:48pm

अच्छी ग़ज़ल हुई है भाई जी

अंतिम शेर को देख ले

सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दुख बयानी है गजल - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. वृष्टि जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद ।"
2 minutes ago
V.M.''vrishty'' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दुख बयानी है गजल - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, सादर अभिनंदन! चित्ताकर्षक भावपूर्ण रचना। वाकई ग़ज़ल के इतिहास और वर्तमान रूप…"
58 minutes ago
V.M.''vrishty'' commented on Sushil Sarna's blog post पागल मन ..... (400 वीं कृति )
"आदरणीय सुशील सरना जी,प्रणाम! अनुभूति की गहराई लिए बेहद खूबसूरत रचना। बहुत बहुत बधाई!"
1 hour ago
V.M.''vrishty'' commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post युग द्रष्टा कलाम
"आदरणीय डॉ छोटेलाल सिंह जी, सादर अभिनंदन! आपकी रचना बहुत सुंदर और प्रेरणादायी है। बधाई स्वीकार करें।"
1 hour ago
V.M.''vrishty'' commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "केरेक्टर ढीला क्यूं?" (लघुकथा)
"आदरणीय उस्मानी जी, सादर प्रणाम! अद्भुत प्रयोग किया है आपने। आपकी कल्पनाशक्ति वाकई काबिले-तारीफ है।…"
1 hour ago
Neelam Upadhyaya commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "केरेक्टर ढीला क्यूं?" (लघुकथा)
"आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी, 'हैज़-की'  और अपने 'केरेक्टर-कीज़-दल'  के…"
1 hour ago
Neelam Upadhyaya commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post युग द्रष्टा कलाम
"आदरणीय डॉ छोटेलाल सिंह जी, आपने डॉ ए पी जे कलाम साहब के जन्मदिन के उपलक्ष में इतनी सुंदर और प्रेरक…"
2 hours ago
Neelam Upadhyaya commented on amita tiwari's blog post ये जो है लड़की
"आदरणीया  अमिता तिवारी जी, अच्छी रचना हुयी है, बधाई। "
2 hours ago
Neelam Upadhyaya replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आदरणीया  डॉ संध्या तिवारी जी, जन्म दिन की हार्दिक बधाई। "
2 hours ago
Neelam Upadhyaya replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आदरणीया डॉ. प्राची सिंह जी, आपकोजन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं।"
2 hours ago
राज़ नवादवी commented on V.M.''vrishty'''s blog post मौत की उम्मीद पर (ग़ज़ल)
"जी जनाब समर कबीर साहब, सादर. "
2 hours ago
राज़ नवादवी commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ६१
"आदरणीय समर कबीर साहब, आदाब. इस्लाह का बहुत बहुत शुक्रिया. अमल में लाता हूँ. बिन्ते अशीयत- रात की…"
2 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service