For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अस्तित्व ....

एक अस्तित्व
शून्य हुआ
एक शून्य
अस्तित्व हुआ
धूप-छाँव के बंधन का
हर एक सूरज
अस्त हुआ
ज़िंदगी ज़मीन की
ज़मीन के पार
चलती रही
और
दूर कहीं
कोई चिता
धू-धू कर
जलती रही

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 56

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil Sarna on February 15, 2018 at 4:52pm

आद. KALPANA BHATT ('रौनक़')   जी सृजन आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया का आभारी है।

Comment by Sushil Sarna on February 15, 2018 at 4:52pm

आदरणीय  vijay nikore  जी सृजन आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया का आभारी है।

Comment by Sushil Sarna on February 15, 2018 at 4:51pm

आदरणीय  narendrasinh chauhan जी सृजन आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया का आभारी है।

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on February 13, 2018 at 7:09pm

बहुत सुन्दर रचना | हार्दिक बधाई आदरणीय |

Comment by vijay nikore on February 13, 2018 at 1:36pm

बहुत ही सुन्दर भाव प्रेषित किया है, सरलता का प्रवाह भी अच्छा लगा। हार्दिक बधाई, आ० सुशील जी।

Comment by narendrasinh chauhan on February 12, 2018 at 9:44pm
खुब सुन्दर रचना
Comment by Sushil Sarna on February 12, 2018 at 4:02pm


आदरणीय सोमेश कुमार जी सृजन आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया का आभारी है। ये दार्शनिक भाव क्षणिका की प्रस्तुति है।

Comment by somesh kumar on February 12, 2018 at 10:33am
यह किसी पीड़ा का दृश्य लगता है क्या इसे दृश्य कविता कह सकते हैं ?

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Balram Dhakar commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल- बलराम धाकड़ ( मसौदा भी ज़रूरी है...)
"हौसला अफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया, आ० कल्पना जी । सादर।"
24 minutes ago
Balram Dhakar commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल- बलराम धाकड़ ( मसौदा भी ज़रूरी है...)
"बहुत बहुत धन्यवाद, आ० श्याम जी। सादर।"
25 minutes ago
Balram Dhakar commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल- बलराम धाकड़ ( मसौदा भी ज़रूरी है...)
"बहुत बहुत शुक्रिया, जनाब उस्मान साहब। आपको ग़ज़ल पसन्द आई, मेरा लिखना मुक़म्मल हुआ। सादर।"
26 minutes ago
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post मिज़ाज (लघुकथा)
"गहन कटाक्ष| हार्दिक बधाई इस रचना के लिए| "
32 minutes ago
Nilesh Shevgaonkar commented on Samar kabeer's blog post तरही ग़ज़ल
"वाह सर, हमेशा की तरह शानदार.. बधाई"
37 minutes ago
Shyam Narain Verma commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post मिज़ाज (लघुकथा)
"बहूत उम्दा लघुकथा आदरणीय, हार्दिक बधाई l सादर"
1 hour ago
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Kumar Gourav's blog post कुलीन(लघुकथा)
"बहुत बढ़िया कटाक्ष| हार्दिक बधाई इस बेहतरीन लघुकथा के लिए आ कुमार गौरव जी| "
1 hour ago
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल- बलराम धाकड़ ( मसौदा भी ज़रूरी है...)
"बहुत खुबसूरत ग़ज़ल कही है आपने आ बलराम जी | हार्दिक बधाई भैया| "
1 hour ago
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post एक और रत्नाकर(लघुकथा)
"धन्यवाद् आदरणीय शहजाद उस्मानी जी| "
1 hour ago
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post एक और रत्नाकर(लघुकथा)
"धन्यवाद् आदरणीय बृजेश जी| "
1 hour ago
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post एक और रत्नाकर(लघुकथा)
"नमस्ते आ समर भाई जी, आपकी तबियत अब कैसी है? सादर आभार भाई जी, आप को कथा पसंद आयी सफल हुआ मेरा…"
1 hour ago
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post एक और रत्नाकर(लघुकथा)
"धन्यवाद जनाब मोहम्मद आरिफ साहब|"
1 hour ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service