For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

हरजाई ....

ये
वो गालियां हैं
जहां
अंधेरों में
सह्र होती है
उजाले उदास होते हैं
पलकों में
खारे मोती

होते हैं

बे-लिबास जिस्म,
लिपे -पुते चेहरे,
शायद
बाजार में
बिकने की
ये पहली जरूरत है

इक रोटी के लिए
सलवटों से खिलवाड़
रौंदे गए जिस्म की
बिलखती दास्ताँ हैं

भोर
एक कह्र ले कर आती है
पेट की लड़ाई
शुरू हो जाती है
दिन ढलने के साथ -साथ
पुरानी कहानी
फिर दोहराई जाती है

चेहरे के मेकअप की तरह
दुःख पर
हंसी का मेकअप लगाया जाता है
जिस्म के हर कोने को
तरतीब से सजाया जाता है
शमा जलाई जाती है
महफ़िल सजाई जाती है
कदम थिरकने लगते हैं
थाप लगाई जाती है
फिर
हर अँधेरे की
बोली लगाई जाती है

वासना की आंधी में
सब कुछ उजड़ जाता है
सपनों के नीड़ में
नीर उतर आता है

रात के रिश्ते
रात के साथ
फ़ना हो जाते हैं
सह्र के दर्द
सह्र के साथ उभर आते है

भोर होते ही
इनकी आँखों में
कह्र होता है
इक अश्क
दिल का नगर भिगोता है
एक तन्हाई साथ होती है


फिर रात में
सह्र होती है
बार बार जिस्म की
रुसवाई होती है
मजबूरी की दहलीज़ पर
समझौते साँस लेते हैं
बिकें नहीं तो क्या करें ये ज़िस्म
भूख
बड़ी हरजाई होती है

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 47

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil Sarna on May 17, 2018 at 8:23pm
आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से शुक्रिया।
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 16, 2018 at 7:37pm

आ. भाई सुशील जी, अच्छी कविता हुयी है । हार्दिक बधाई ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post क्या मन है बीमार पड़ौसी - गजल - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई विजय निकोर जी, सादर अभिवादन । स्नेहाशीष के लिए आभार।"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post क्या मन है बीमार पड़ौसी - गजल - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई विजय निकोर जी, सादर अभिवादन । स्नेहाशीष के लिए आभार।"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post जीवन में लड़ाते हैं क्यों यार गड़े मुर्दे - गजल
"आ. भाई गरप्रीत जी, सादर अभिवादन । उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद।"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post जीवन में लड़ाते हैं क्यों यार गड़े मुर्दे - गजल
"आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन । प्रशंसा के लिए आभार ।"
3 hours ago
Samar kabeer commented on VIRENDER VEER MEHTA's blog post वापसी.... लघुकथा
"जनाब वीरेन्द्र वीर मेहता जी आदाब,बहुत उम्दा लघुकथा हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post जीवन में लड़ाते हैं क्यों यार गड़े मुर्दे - गजल
"आ. भाई गंगाधर जी, सादर अभिवादन ।गजल की प्रशंसा से मान बढ़ाने के लिए धन्यवाद।"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post जीवन में लड़ाते हैं क्यों यार गड़े मुर्दे - गजल
"आ. भाई समर जी, पुनः उपस्थिति के लिए आभार।"
3 hours ago
Samar kabeer commented on TEJ VEER SINGH's blog post दुर्गा - लघुकथा –
"जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
3 hours ago
Samar kabeer commented on rajesh kumari's blog post नाभी में लेकर कस्तूरी  तय करता मृग कितनी दूरी (गीत राज )
"बहना राजेश कुमारी जी आदाब,बहुत सुंदर गीत लिखा आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । मुझे ऐसा लग…"
3 hours ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएं :
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत उम्दा क्षणिकाएँ हुई हैं,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । झीलें नहीं…"
4 hours ago
Samar kabeer commented on Harihar Jha's blog post अच्छे दिन थे
"जनाब हरिहर झा साहिब आदाब,ये रचना आपने दोबारा पोस्ट कर दी है,देखियेगा ।"
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on VIRENDER VEER MEHTA's blog post वापसी.... लघुकथा
"आ. वीरेंद्र मेहता जी, अच्छी कथा हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
4 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service