For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सदा बिखरी रहे ये हंसी..

हँसमुखी चेहरे पर ये कोलगेट की मुस्कान,

बिखरी रहे ये हँसी,दमकता रहे हमेशा चेहरा,

दामन तेरा खुशियों से भरा रहे,

सपनों की दुनियां आबाद बनी रहे,

हँसती हुई आँखें कभी नम न पड़े,

कालजयी जमाना कभी आँख मिचौली न खेले,

छलाबी दुनियां से ठग मत जाना,

खुशियों की यादों के सहारे,

दुखों को पार लगा लेना,

कभी ऐसा भी पल आये जीवन में,

निराशा में हिम्मत मत हारना,

हो चाहे दुनियां इधर-उधर,

ले बड़े  बुजुर्गों के अनुभवों को साथ,

एक अच्छे खिवयै की तरह,

नौका पार लगा लेना ,

ये सीख हमेशा याद रखना,

आज गम हैं,तो कल ख़ुशी आएगी,

आज तूफ़ान हैं तो कल शांति होगी।

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Views: 84

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on July 13, 2018 at 5:40pm

अच्छी प्रस्तुति है आदरणीया..

Comment by vijay nikore on July 12, 2018 at 1:02pm

रचना अच्छी लगी...बहुत ही अच्छा आश्वासन दे रही है।

Comment by Samar kabeer on July 11, 2018 at 11:27am

मोहतरमा बबीता गुप्ता जी आदाब,अच्छी प्रस्तुति है, बधाई स्वीकार करें ।

Comment by babitagupta on July 10, 2018 at 6:23pm

सधन्यवाद ,आदरणीय आरिफ सरजी।

Comment by Mohammed Arif on July 9, 2018 at 6:17pm

आदरणीया बबीता गुप्ता जी आदाब,

                                 बाज़ारवाद से ग्रसित विज्ञापनों की शैलीनुमा सीख देती बेहतरीन रचना  । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

Comment by babitagupta on July 9, 2018 at 3:10pm

आदरणीया नीलम दी ,श्याम सरजी,सुशील सरजी ,नमस्कार ,रचना  की   सराहना करने के लिए सधन्यवाद।

Comment by Shyam Narain Verma on July 9, 2018 at 2:49pm
सुन्दर सार्थक रचना  ने लिये आपको बधाई ….
Comment by Sushil Sarna on July 9, 2018 at 1:06pm

आदरणीया बबिता जी भाव पूर्ण सृजन के लिए हार्दिक बधाई।

Comment by Neelam Upadhyaya on July 9, 2018 at 12:54pm

अच्छी रचना की प्रस्तुति के लिए बधाई स्वीकार करें आदरणीया बबिता गुप्ता जी ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

amita tiwari posted a blog post

ये जो है लड़की

ये जो है लड़कीउसकी जो आँखेआँखों में सपनासपने में घरउसका अपना घरजिसके बाहरवो लिख सकेयह  मेरा घर है…See More
35 minutes ago
Manan Kumar singh posted a blog post

गजल(डरे जो बहुत....)

122 122  122  12डरे जो बहुत,बुदबुदाने लगे मसीहे,लगा है, ठिकाने लगे।1तबाही का' आलम बढ़ा जा रहाचिड़ी के…See More
38 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"बहुत बहुत धन्यावाद आ० शेख उस्मानी जी "
8 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"शुक्रिया आ० सुशील सरना जी "
8 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"जन्मदिन पर आपकी और ओबीओ परिवार की नेह सिंचित सद्भावनाएं शुभकामनाएं मुझे मिली, मेरा सौभाग्य है... आप…"
8 hours ago
Samar kabeer commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ६१
"जनाब राज़ नवादवी साहिब आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । 'जिसको…"
11 hours ago
Samar kabeer commented on V.M.''vrishty'''s blog post मौत की उम्मीद पर (ग़ज़ल)
"चेहरा पैमाना बना है खूबियों का आज-कल' ये मिसरा तो ठीक है,राज़ साहिब,"पैमाना" का अर्थ…"
11 hours ago
Samar kabeer commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ६२
"//हिन्दुओं में मृत्यु के पश्चात लाश को नहाने की परंपरा है, मेरा अभिप्रेय इसी से है// मरने के पश्चात…"
11 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post सत्यव्रत (लघुकथा)
"//उसने झूठ भरी आवाज़ में कहा "लेकिन बेटे इस वृद्धाश्रम में कोई कमी नहीं।"//  इस…"
11 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani left a comment for Chandresh Kumar Chhatlani
"आदाब। आपकी अद्वितीय लघुकथा ''सत्यव्रत" भी मंच पर "फ़ीचर" किये जाने पर तहे…"
11 hours ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post पीढ़ी को समझा दे पंकज, खेती ख़ातिर खेत बचा ले----ग़ज़ल
"आदरणीय लक्ष्मण धामी सर ग़ज़ल को शुभकामनाएं देने के लिए बहुत-बहुत आभार"
11 hours ago
Dr. Vijai Shanker commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post सत्यव्रत (लघुकथा)
"आदरणीय चंद्रेश कुमार जी , निसंदेह बहुत ही अच्छी लघु - कथा है , प्रेरक भी है। पर इसमें एक जबरदस्त…"
12 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service