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मित्र पर चंद दोहे :

मित्र पर चंद दोहे :

अपने मन को जानिए, अपना सच्चा मित्र।
दिखलाता हर कर्म का, श्वेत श्याम हर चित्र।।

किसको अपना हम कहें, किसको जानें ग़ैर।
मृदु शब्दों की आड़ में, मित्र निकालें बैर।।

सुख में हर जन साथ है, दुख में दीनानाथ।
दुःख में जब सब छोड़ दें, नाथ थामते हाथ।।

जग में सच्चे मित्र की, नहीं रही पहचान ।
कदम कदम विश्वास का ,हो जाता अवसान।।

मन को रोगी कर दिया, मित्र दे गया घात।
थामो मेरा हाथ प्रभु ,तुम बन जाओ तात ।।


सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 24

Comment

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Comment by Sushil Sarna on May 18, 2019 at 6:25pm

आदरणीय  Hariom Shrivastava जी सृजन पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार।

Comment by Hariom Shrivastava on May 14, 2019 at 12:27am

वाहह,वाहहह,मित्रता पर लाजवाब दोहे आदरणीय सुशील सारना जी।

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