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क्षणिकाएँ ....

लील लेती है
एक ही पल में
कितने अंतरंग पलों का सौंदर्य
विरह की
वेदना

...............

उड़ती रही
देर तक
खिन्न सी एक तितली
मृदा में गिरे
मृत पुष्प में
जीवन ढूँढती

..........................

कह रहे थे दास्ताँ
बेरहम आँधियों की
बिखरे तिनके
घौंसलों के

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 34

Comment

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Comment by vijay nikore on Thursday

सुन्दर, बहुत सुन्दर क्षणिकाओं के लिए हार्दिक बधाई, आदरणीय सुशील जी।

Comment by Sushil Sarna on September 10, 2019 at 2:54pm

आदरणीय समर कबीर जी, आदाब , सृजन पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार।

Comment by Samar kabeer on September 7, 2019 at 11:36am

जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत उम्द: क्षणिकाएँ लिखीं आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

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