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सतविन्द्र कुमार राणा
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"आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी, उत्साहवर्धन के लिए सादर हार्दिक आभार, नमन सादर"
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"आदरणीय अखिलेश जी सादर हार्दिक आभार, नमन"
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"सुन्दर छन्द में बांधी आपने, टीप हमें यह भाई है भाव आप तक पहुँचे इतना, भी तो पूर्ण बधाई है। सादर हार्दिक आभार नमन सादर आदरणीया डॉ प्राची सिंह जी"
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"आदरणीय सौरभ पांडेय सर, सादर नमन!  प्रयास पर आपकी उपस्थिति एवं उत्साहवर्धक टिप्पणी से सृजन सार्थक हुआ। सादर आभार"
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"आदरणीया प्रतिभा दीदी, सादर नमन। उत्साहवर्धन के लिए सादर हार्दिक आभार।"
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"आदरणीय सत्यनारायण जी उत्साहवर्धन के लिए सादर आभार, नमन  "
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"आदरणीय अजय भाई जी, अनुमोदन एवं हौंसलाफ़जाई के लिए सादर हार्दिक आभार"
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"आदरणीय सत्यनारायण सिंह जी, सुन्दर भावपूर्ण सृजन। सादर बधाई"
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"आदरणीय अखिलेश कृष्ण जी, सादर नमन! सुन्दर ताटक छन्द रचे हैं। सादर बधाई"
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"मन उपवन में खालीपन जो उसको भरने आ जाओ घन घेरे हो सकल गगन को कुछ पानी बरसा जाओ हरी-भरी दिखती है लेकिन सूनी-सूनी डाली है नीड़ रहित है अंग-अंग औ बिन पंछी सब खाली है प्यारे पाखी जल्दी आकर अपनापन छितरा जाओ घन घेरे हो सकल गगन को कुछ पानी बरसा…"
yesterday
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"तीनों छंदों में सावन के, मोहक  चित्र उकेरे भाते हैं हर जन को भाई, रंग यहाँ बहुतेरे। हार्दइक बधाई आदरणीय अशोक जी"
Sunday
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"सुन्दर बिम्बों को चुन-चुन कर, कह कर छंदों की माला गीत अनोखा रचा आपने, बंद-बंद भाने वाला। हार्दिक बधाई आदरणीया प्रतिभा दीदी"
Sunday
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 99 in the group चित्र से काव्य तक
"छन्न पकैया छन्न पकैया छन्द कहे मतवालें *रंग* वर्तनी ठीक रहेगी, इसको तनिक सँभालें। बधाई आ अजय भाई जी"
Sunday
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-105
"आदरणीय शेख शहजाद जी, दूसरी प्रस्तुति के लिए भी सादर बधाई। चर्चा से अच्छी जानकारी मिली, सादर"
Jul 13
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-105
"आदरणीय जवाहर लालजी,दूसरी प्रस्तुति भी उत्तम और सन्देशप्रद बन पड़ी है। बधाई सादर"
Jul 13
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-105
"आदरणीया प्रतिभा दीदी, सादर नमन। प्रदत विषय पर अद्भुत सर्जना हुई है। सादर बधाई।"
Jul 13

Profile Information

Gender
Male
City State
करनाल हरियाणा
Native Place
गाँव व डाक बालराजपूतान
Profession
अध्यापक
About me
I am a simple person living simply.I have interests in reading,movies and enjoy these timely.try to write somthings when there is time to do so.Believe in nationalism as an ideology.

सतविन्द्र कुमार राणा's Blog

पत्थरों पे हैं इल्ज़ाम झूठे सभी-गजल

212 212 212 212

अब नए फूल डालों पे आने लगे

और' भ्रमर फिर ख़ुशी से हैं गाने लगे।

पत्थरों पे हैं इल्जाम झूठे सभी

राही के ही कदम डगमगाने लगे।

रहबरी तीरगी की रहे कर ते जो

अब वो सूरज को दीपक दिखाने लगे।

वादा वो ही किया जो था तुमने कहा

घोषणा क्यों चुनावी बताने लगे।

जिनको सोचा नजर हैं सही रख रहे

गौर कर देखा सारे ही काने लगे।

भैंस बहरी नहीं अब समझ लेगी सब

बीन ये सोच कर फिर बजाने…

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Posted on March 21, 2019 at 11:30am — 2 Comments

हम मानेंगे बात जो हमको प्यारी है- ग़ज़ल

22 22 22 22 22 2

नमक मसाले से बनती तरकारी है

सच मानों यह असली दुनियादारी है।

देख सलीका नकली बातें करने का

असली पर ही पड़ जाता कुछ भारी है।

छेदों से ही जिसकी है औक़ात यहाँ

छलनी ही समझाती, क्या खुद्दारी है?

होते हों कितने भी पहलू बातों के

हम समझेंगे जितनी अक्ल हमारी है।

तुम मानों जो तुमको अच्छा है लगता

हम मानेंगे बात जो हमको प्यारी है ।

आज लबादे में लिपटे अल्फ़ाज़ सभी

जिनको सुनना जनता की…

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Posted on March 4, 2019 at 9:00am — 4 Comments

करो कुछ याद उनको जो गये हैं- ग़ज़ल

1222 1222 122

ये देखा और' सुना इस फरवरी में

बहकता दिल ज़रा इस फरवरी में।

किसी की कोशिशें कुछ काम आई

कोई जम कर पिटा इस फरवरी में।

दिखावे में ढली है जिंदगी बस

रहे सच से जुदा इस फरवरी में।

मुहब्बत को समेटा है पलों ने

हुआ ये क्या भला इस फरवरी में?

कहीं पर नेह की कोंपल भी फूटी

किसी का दिल जला इस फरवरी में।

करो कुछ याद उनको जो गये हैं

वतन पर जां लुटा इस फरवरी में।

मौलिक…

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Posted on February 12, 2019 at 7:30pm — 2 Comments

नफरतों को छोड़ लगता- ग़ज़ल

ग़ज़ल

2122 2122 2122 212

नफरतों को छोड़ लगता पास चल कर आ गए

हो न कुर्सी दूर फिर, वो दल बदल कर आ गए।

जंगलों पे राज करने का जुनूँ जो सर चढ़ा

शेर जैसी शक्ल में गीदड़ भी ढल कर आ गए।

इश्क में देखो उन्होंने यूँ निभाई है वफ़ा

चाहने वाले के सारे ख़्वाब दल कर आ गए।

ठंड की जो चाह में उन तक गए ले मन-बदन

गुप्त शोलों में वो बस चुपचाप जल कर आ गए।

सामने कमजोर प्राणी उनको जो दिखने लगा

है गज़ब सारे शिकारी ही मचल कर आ…

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Posted on January 27, 2019 at 6:30am — 8 Comments

Comment Wall (8 comments)

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At 6:46am on July 2, 2018, राज़ नवादवी said…

"आदरणीय सतविन्द्र कुमार राणा  साहब, तरही मुशायरे में मेरी ग़ज़ल में शिरकत का दिल से शुक्रिया. समयाभाव था, कमेंट बॉक्स बंद हो चुका है. इसलिए यहाँ से आभार प्रकट कर रहूँ हूँ.सादर "

At 7:34am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
आदरणीय सतविंदर भाई ये मार्गदर्शन आपके द्वारा ही दिया गया है। हार्दिक आभार ।
At 7:41am on January 27, 2016, Omprakash Kshatriya said…
बहुतबहुत शुक्रिया आप का आदरणीय सतविंदर कुमार जी . आप ने मेरा जन्म दिन याद रख कर मुझे अमूल्य/अतुल्य शुभकामनाएं दी. इस हेतु मैं आप का आजीवन ऋणी रहूंगा .
At 8:46pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर शुभकामनाएं!
At 6:59pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 7:16pm on December 18, 2015, सतविन्द्र कुमार राणा said…
बहुत बहुत आभार आदरणीयEr Ganesh Jee Bagi सर।
At 7:54pm on December 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सतविंदर कुमार जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:59am on October 2, 2015,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

भाई सतविंदरजी, 

आपका हार्दिक धन्यवाद कि आपको मेरी विवेचना तोषकारी लगी है.

आप किसी आयोजन या इवेण्ट पर अपनी भावनाएँ उसी थ्रेड में पोस्ट किया करें. यदि आपने अपना धन्यवाद ज्ञापन संकलित लघुकथाओं के पोस्ट में ही किया होता या अब भी कर दें तो यह अधिक उचित होगा.

पुनः धन्यवाद, भाईजी

 
 
 

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