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डॉ पवन मिश्र
  • Male
  • कानपुर, उ0प्र0
  • India
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डॉ पवन मिश्र commented on डॉ पवन मिश्र's blog post नवगीत- लुटने को है लाज द्रौपदी चिल्लाती है
"आद0 विजय निकोर जी, हृदय से धन्यवाद"
56 minutes ago
डॉ पवन मिश्र commented on डॉ पवन मिश्र's blog post नवगीत- लुटने को है लाज द्रौपदी चिल्लाती है
"आद0 रामबली गुप्त जी, हार्दिक आभार"
57 minutes ago
vijay nikore commented on डॉ पवन मिश्र's blog post नवगीत- लुटने को है लाज द्रौपदी चिल्लाती है
"सुन्दर प्रभावशाली गीत के लिए बधाई, आ० पवन जी।"
2 hours ago
रामबली गुप्ता commented on डॉ पवन मिश्र's blog post नवगीत- लुटने को है लाज द्रौपदी चिल्लाती है
"सुंदर गीत के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीय पवन जी"
15 hours ago
डॉ पवन मिश्र commented on रामबली गुप्ता's blog post कुंडलियाँ-रामबली गुप्ता
"आद0 रामबली जी, सुंदर सर्जना हेतु बधाई प्रेषित है।"
yesterday
डॉ पवन मिश्र commented on डॉ पवन मिश्र's blog post नवगीत- लुटने को है लाज द्रौपदी चिल्लाती है
"आद0 सुरेंद्र नाथ सिंह जी, हार्दिक आभार"
yesterday
डॉ पवन मिश्र commented on डॉ पवन मिश्र's blog post नवगीत- लुटने को है लाज द्रौपदी चिल्लाती है
"आदरणीय मनोज श्रीवास्तव जी, इस उत्साहवर्धक टिप्पणी के लिये हृदय से धन्यवाद"
yesterday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on डॉ पवन मिश्र's blog post नवगीत- लुटने को है लाज द्रौपदी चिल्लाती है
"आद0 पवन मिश्र जी सादर अभिवादन। बेहतरीन सर्जना हुई है, बहुत उम्दा। आपको इस प्रस्तुति पर कोटिश बधाइयाँ निवेदित है। सादर"
yesterday
Manoj kumar shrivastava commented on डॉ पवन मिश्र's blog post नवगीत- लुटने को है लाज द्रौपदी चिल्लाती है
"आदरणीय डाॅ. पवन मिश्र जी सादर वन्दे! बहुत ही अच्छी रचना है। सादर बधाई स्वीकार करें।"
yesterday
डॉ पवन मिश्र commented on डॉ पवन मिश्र's blog post नवगीत- लुटने को है लाज द्रौपदी चिल्लाती है
"आद0 राजेश कुमारी जी। इस दिशा में मेरा ज्ञान बहुत अल्प है। आग्रह है आपसे कि कृपया गीत और नवगीत को समयानुकूल व्याख्यायित कर दीजियेगा।"
yesterday
डॉ पवन मिश्र commented on डॉ पवन मिश्र's blog post नवगीत- लुटने को है लाज द्रौपदी चिल्लाती है
"आद0 राजेश कुमारी जी, हार्दिक धन्यवाद"
Tuesday
डॉ पवन मिश्र commented on डॉ पवन मिश्र's blog post नवगीत- लुटने को है लाज द्रौपदी चिल्लाती है
"जनाब मोहम्मद आरिफ जी इस उत्साहवर्धन के लिये हृदय से आभार"
Tuesday

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on डॉ पवन मिश्र's blog post नवगीत- लुटने को है लाज द्रौपदी चिल्लाती है
"आद० पवन मिश्र जी ,बहुत ही सुंदर गीत हुआ जिसके लिए बहुत बहुत बधाई स्वीकारें .ये गीत है पवन जी नवगीत की श्रेणी में ये नहीं आएगा सादर |"
Tuesday
Mohammed Arif commented on डॉ पवन मिश्र's blog post नवगीत- लुटने को है लाज द्रौपदी चिल्लाती है
"आदरणीय पवन कुमार जी आदाब,                             बहुत ही प्रभावशाली रचना हुई है । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Tuesday
डॉ पवन मिश्र commented on डॉ पवन मिश्र's blog post नवगीत- लुटने को है लाज द्रौपदी चिल्लाती है
"आदरणीय समर साहब, आपके शब्द मेरे लिये किसी देव वाणी से कम नहीं। भाव आप तक पहुंचे लेखन सफल हुआ,,,बहुत बहुत आभार आपका"
Tuesday
Samar kabeer commented on डॉ पवन मिश्र's blog post नवगीत- लुटने को है लाज द्रौपदी चिल्लाती है
"जनाब डॉ.पवन मिश्र जी आदाब,बहुत सुंदर और भवपूर्ण नवगीत लिखा आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Tuesday

Profile Information

Gender
Male
City State
कानपुर
Native Place
देवरिया
Profession
अध्यापक
About me
कर्म से अध्यापक हूँ।मन के भावों की टूटे-फूटे शब्दों में सहज अभिव्यक्ति का प्रयास करता हूँ।

डॉ पवन मिश्र's Blog

नवगीत- लुटने को है लाज द्रौपदी चिल्लाती है

अब तो आओ कृष्ण धरा ये थर्राती है।

लुटने को है लाज द्रौपदी चिल्लाती है।।

द्युत क्रीड़ा में व्यस्त युधिष्ठिर खोया है,

अर्जुन का गांडीव अभी तक सोया है।

दुर्योधन निर्द्वन्द हुआ है फिर देखो,

दुःशासन को शर्म तनिक ना आती है।।

लुटने को है लाज द्रौपदी चिल्लाती है।।

धधक रही मानवता की धू धू होली,

विचरण करती गिद्धों की वहशी टोली।

नारी का सम्मान नहीं अब आँखों में,

भीष्म मौन फिर गांधारी सकुचाती है।।

लुटने को है लाज द्रौपदी चिल्लाती…

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Posted on December 11, 2017 at 8:30pm — 15 Comments

ग़ज़ल- आज फिर उसने कुछ कहा मुझसे

२१२२ १२१२ २२

आज फिर उसने कुछ कहा मुझसे।

आज फिर उसने कुछ सुना मुझसे।।

बाद मुद्दत के आज बिफ़रा था।

आज दिल खोल कर लड़ा मुझसे।।

जिसकी क़ुर्बत में शाम कटनी थी।

हो गया था वही ख़फ़ा मुझसे।।

दूर दिल से हुए सभी शिकवे।

टूट कर ऐसे वो मिला मुझसे।।

दरमियाँ है फ़क़त मुहब्बत ही।

अब कोई भी नहीं गिला मुझसे।।

चांद तारे या वो फ़लक सारा।

बोल क्या चाहिए ? बता मुझसे।।

क़ुर्बत= सामीप्य

फ़लक=…

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Posted on December 3, 2017 at 1:30pm — 16 Comments

ग़ज़ल- नवजीवन की आशा हूँ

22 22 22 2


नवजीवन की आशा हूँ।
दीप शिखा सा जलता हूँ।।

रक्त स्वेद सम्मिश्रण से।
लक्ष्य सुहाने गढ़ता हूँ।।

जीवन के दुर्गम पथ पर।
अनथक चलता रहता हूँ।।

प्रभु पर रख विश्वास अटल।
बाधाओं से लड़ता हूँ।।

घोर तिमिर के मस्तक पर।
अरुणोदय की आभा हूँ।।

भावों का सम्प्रेषण मैं।
शंखनाद हूँ कविता हूँ।।

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Posted on February 5, 2017 at 6:58pm — 12 Comments

नवगीत- आया जाड़ा हाड़ कँपाने

अँगड़ाई ले रही प्रात है,

कुहरे की चादर को ताने।

ओढ़ रजाई पड़े रहो सब,

आया जाड़ा हाड़ कँपाने।।

तपन धरा की शान्त हो गयी,

धूप न जाने कहाँ खो गयी।

जिन रवि किरणों से डरते थे,

लपट देख आहें भरते थे।

भरी दुपहरी तन जलता था,

बड़ी मिन्नतों दिन ढलता था।

लेकिन देखो बदली ऋतु तो,

आज वही रवि लगा सुहाने।

आया जाड़ा हाड़ कँपाने।।

गमझा भूले मफ़लर लाये,

हाथों में दस्ताने आये।

स्वेटर टोपी जूता मोजा,

हर आँखों ने इनको…

Continue

Posted on January 22, 2017 at 8:30pm — 11 Comments

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At 5:52pm on January 1, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
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