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नादिर ख़ान
  • Male
  • Bilaspur,chhattisgarh
  • India
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नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-112
"आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी उम्दा पेश कश  ....."
Feb 9
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-112
"आदरणीय कनक हरलालका जी उम्दा पेशकश के लिए बधाई स्वीकारें । "
Feb 9
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-112
"हौसला अफजाई का शुक्रिया "
Feb 9
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-112
"सतविन्दर जी उम्दा प्रयास हेतु बधाई "
Feb 9
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-112
"वाह आदरणीय अति उत्तम बधाई स्वीकारें ...."
Feb 9
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-112
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी उम्दा रचनाकर्म हुआ है बहुत बधाई सुंदर  पेशकश ....."
Feb 9
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-112
"(चुनाव -2020)   आँखों पर डाले जा रहे हैं आभाष के पर्दे पैरों में बांधी जा रही है झूठ की बेड़ियाँ दिलों में उठाई जा रही है नफ़रत की दीवार मस्तिष्क में खोदी जा रही है वैचारिक मतभेद की खाई फायदे ..... और सिर्फ फायदे पर हो रहे हैं विचार…"
Feb 9
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-112
"जनाब तनवीर साहब  सराहनीय कोशिश के साथ  अच्छी ग़ज़ल कहने के लिए मुबारकबाद….."
Oct 26, 2019
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-112
"आदरणीया अंजलि गुप्ता जी बहुत ही उम्दा ग़ज़ल से मंच को नवाज़ा आपने बहुत बहुत मुबारकबाद आपको।"
Oct 26, 2019
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-112
"देखा क़माल ऐसा सियासत के बाग़ मेंफल उस दरख़्त पे हैं जो फलदार भी नहीं आंखों का नीर तो कभी का सूख ही चुकाक्या धमनियों में रक्त का संचार भी नहीं जनाब अजय गुप्ता साहब अच्छेअशआर हुए  हैं बधाई स्वीकारें"
Oct 26, 2019
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-112
"आदरणीय दंडपाणि जी शानदार मतले के साथ जानदार ग़ज़ल कही। . बहुत मुबारकबाद ….."
Oct 26, 2019
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-112
"आदरणीय सुरेंद्रनाथ जी  बहुत ही उम्दा ग़ज़ल कही आपने हर शेर कमाल का  है"
Oct 26, 2019
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-112
"वाह  तस्दीक भाई बहुत ख़ूब....."
Oct 26, 2019
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-112
"गफ़लत की नींद से हुए बेदार भी۔नहीं।अंजामे कार के लिए तैयार भी नहीं। तू भी भलाई कर कोई, मैं भी भला करूं।रस्ता ये साफ़ है कोई तकरार भी नहीं। अच्छी ग़ज़ल हुयी है जनाब आसिफ साहब मुबारकबाद स्वीकारें | गुणीजनों की इस्लाह को ध्यान में रखकर…"
Oct 26, 2019
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-112
"यूँ तो हमारे प्यार से इंकार भी नहीं लेकिन जुबां पे उनकी तो इकरार भी नहीं   डूबे गुरूर में वो समझदार भी नहीं छू ले बुलंदियों को ये आसार भी नहीं   खामोशियों के साथ निभाते हैं रस्म सब अब दोस्तों में मीठी सी तकरार भी नहीं   वो ख्वाहिशें…"
Oct 25, 2019
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"मिसाल अब वो हमारी दोस्ती की खूब देता है गिला शिकवा तो उसको फायदा होने से पहले था"
Sep 28, 2019

Profile Information

Gender
Male
City State
Bilaspur,chhattisgarh
Native Place
Bhilai Nager,Chhattisgarh
Profession
govt. employee
About me
simplicity

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नादिर ख़ान's Blog

झूम के देखो सावन आया ....

खुशियों की सौगातें लाया

झूम के देखो सावन आया

 

चंचल सोख़ हवा इतराई

बारिश की बौछारें लाई

महक उठा अब मन का आँगन

भीनी भीनी सी खुशबू छाई

 

देख छटा हर मन हर्षाया

झूम के देखो सावन आया ...

 

 

मन की बगिया महक रही है

पंछी बन के चहक रही है

इच्छाओं को पंख मिल गए

दिल की धड़कन बहक रही है

 

मौसम में है खुमार छाया

झूम के देखो सावन आया ...

 

धरती बाहों को…

Continue

Posted on August 14, 2018 at 11:21pm — 6 Comments

सहे ज़ुल्म हमने सदा हँसते हँसते

      (122  122  122  122)

कोई बात दिल में छुपाते नहीं हैं

मगर आँसुओं को दिखाते नहीं हैं

 

सहे ज़ुल्म हमने सदा हँसते हँसते

मिले ज़ख्म कितने गिनाते नहीं हैं

 

ये बातें हैं दिल की सुनो तुम भी…

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Posted on February 18, 2018 at 8:00pm — 6 Comments

डुबो देगी हमें ये बेईमानी

(1222 1222 122)

जिन्हें आने की फुरसत ही नहीं है

उन्हे मिलने की हसरत ही नहीं है

 

अगर तुझमें शराफत ही नहीं है

मुझे तेरी ज़रूरत ही नहीं है

 

डुबो देगी हमें ये बेईमानी

ये इंसानों की फ़ितरत ही नहीं है

 

उगलते हैं ज़ुबाँ से आग अपनी

बची इनमें शराफत ही नहीं है

 

चलो छोड़ो जुदा थी राह अपनी

हमें तुमसे शिकायत ही नहीं है

 

असल मुद्दों से ही भटकाये रखना

सियासत की रिवायत ही नहीं…

Continue

Posted on February 4, 2018 at 6:31pm — 10 Comments

हाइकू

1

इंसानी भूल

लापरवाह लोग

धूल ही धूल

2

प्यारी सी धुन

सुबह का मौसम

प्यार से सुन 

3…

Continue

Posted on December 29, 2017 at 10:30pm — 4 Comments

Comment Wall (14 comments)

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At 11:00pm on August 24, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय नादिर खान साहब आदाब , बहुत शुक्रिया आपकी हौसलाअफजाई का
At 11:34pm on April 13, 2019, dandpani nahak said…
बहुत शुक्रिया आदरणीय नादिर ख़ान साहब
At 10:50pm on April 20, 2017, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय नादिर जी आपका दोस्त बनना मेरे लिए सुखद अहसास वाला है सादर
At 9:34pm on February 3, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
आदरणीय नादिर खान सर, ओबीओ परिवार की ओर से आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें।
At 5:50pm on November 18, 2015, pratibha pande said…

 आपका हार्दिक आभार आदरणीय  

At 10:05pm on April 3, 2014, Mukesh Verma "Chiragh" said…

नादिर जी
आपको मित्र रूप मे पाकर मुझे बहुत खुशी हुई.
खुश रहिए.. धन्यवाद

At 1:08pm on January 4, 2014, Razia mirza said…

बहोत बहोत शुक्रिया ओ बी ओ परिवार में मुझे शामिल करने के लिये।

At 7:58pm on November 20, 2013, annapurna bajpai said…

हमारे ओबीओ परिवार एवं मेरी मित्र मंडली मे आपका हार्दिक स्वागत है । 

At 7:07pm on April 23, 2013, Usha Taneja said…

मित्रता स्वीकार के लिए हार्दिक धन्यवाद! 

At 11:51pm on February 22, 2013, बृजेश नीरज said…

आपने मुझे मित्रता योग्य समझा इसके लिए आपका आभार!

 
 
 

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"जी सर सुधार कर लेता हूँ बहुत बहुत शुक्रिया, सर एक शंका थी "गीत ग़म का तूने ही "करने से…"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"आ. भाई दण्डपाणि जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
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Md. Anis arman replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"सर कहां चूक हो गई मुझसे? "
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Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"जनाब दण्डपाणि 'नाहक़' जी आदाब, तरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें ।"
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"कृपया नाम से पहले आदर सूचक शब्दों का प्रयोग करें ।"
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Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
""गीत तूने ग़म का ही  हमको सुनाया उम्रभर  ज़िन्दगी तुझको हसीं नग़्मा समझ बैठे थे…"
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