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Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"
  • Male
  • Uttar Pradesh
  • India
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Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s Page

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Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post क्यूँ हर्फ़ अता करते हो, ख़ैरात की तरह-----ग़ज़ल
"आदरणीय बाऊजी, संशोधन अभी कर दे रहा हूँ...बड़ी ग़ल्ती थी"
Feb 12
Samar kabeer commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post क्यूँ हर्फ़ अता करते हो, ख़ैरात की तरह-----ग़ज़ल
"अज़ीज़म पंकज कुमार मिश्रा आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'लफ़्ज़ों में अगर कहना हो "क्या हो मेरे लिए"' इस मिसरे में 'लफ़्ज़' का बहुवचन "अल्फ़ाज़" होता है,देखियेगा ।"
Feb 12
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post क्यूँ हर्फ़ अता करते हो, ख़ैरात की तरह-----ग़ज़ल
"आदरणीय दिगम्बर नासवा सर बहुत बहुत आभार"
Feb 12
दिगंबर नासवा commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post क्यूँ हर्फ़ अता करते हो, ख़ैरात की तरह-----ग़ज़ल
"बहुत ही खूबसूरत शेर हैं सभी ... दिली दाद मेरी ..."
Feb 12
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post क्यूँ हर्फ़ अता करते हो, ख़ैरात की तरह-----ग़ज़ल
"आदरणीय शिज़्ज़ु शकूर सर सादर अभिवादन.....ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति हर इतनी अच्छी टिप्पणी के लिए सादर आभार"
Feb 12
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post क्यूँ हर्फ़ अता करते हो, ख़ैरात की तरह-----ग़ज़ल
"आदरणीय शिज़्ज़ु शकूर सर सादर अभिवादन.....ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति हर इतनी अच्छी टिप्पणी के लिए सादर आभार"
Feb 12

सदस्य कार्यकारिणी
शिज्जु "शकूर" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post क्यूँ हर्फ़ अता करते हो, ख़ैरात की तरह-----ग़ज़ल
"आ. पंकज मिश्रा जी, आपकी ग़जलों का अंदाज़ ही अलग होता है। सादर बधाई आपको इस ग़ज़ल के लिए"
Feb 12
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100
"आदरणीय मिथिलेश सर, बहुत दिनों बाद मेरी किसी रचना पर आपकी उपस्थिति हुई है, देखकर अच्छा लग रहा.......सादर अभिवादन...हार्दिक बधाई"
Feb 11
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100
"आदरणीय कल्पना मैम ग़ज़ल को शुभकामना देने के लिए बहुत बहुत आभार"
Feb 11
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100
"आदरणीया नीलम जी बहुत बहुत आभार"
Feb 11
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100
"आदरणीय योगराज सर सादर प्रणाम। आपके आशीर्वाद की मुझे प्रतीक्षा थी। सादर"
Feb 11
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100
"आदरणीय रक्ताले सर, आपने मेरे लेखन को मान दिया, ग़ज़ल धन्य हुई। सादर"
Feb 11
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100
"आदरणीय दीदी सादर प्रणाम"
Feb 11
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100
"आदरणीय योगराज इस छंद पर और अभ्यास होगा"
Feb 11
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100
"आदरणीय प्रतिभा मैम सादर आभार"
Feb 11

Profile Information

Gender
Male
City State
Azamgarh
Native Place
Azamgarh
Profession
Teaching

Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s Blog

होश की मैं पैमाइश हूँ:........ग़ज़ल, पंकज मिश्र..........इस्लाह की विनती के साथ

22 22 22 2

मयख़ानों की ख़ाहिश हूँ

होश की मैं पैमाइश हूँ

चाँद न कर मुझ पर काविश

ब्लैक होल की नाज़िश हूँ

हल ना कर पाओगे तुम

ज़िद की ऐसी नालिश हूँ

जल जाएगा हुस्न तेरा

मैं सूरज की ताबिश हूँ

आ मत मेरी राहों में

तूफ़ानों की जुंबिश हूँ

मौलिक अप्रकाशित

उर्दू का ज्ञान लगभग शून्य है, इसलिए, मुझे सन्देह है कि शायद मेरे भाव अस्पष्ट हों..….इसलिए हार्दिक विनती है कि इस ग़ज़ल के कथ्य…

Posted on November 13, 2018 at 12:00am — 6 Comments

सिद्धिर्भवति कर्मजा-----ग़ज़ल

22 122 12

गीता में लिक्खा गया
सिद्धिर्भवति कर्मजा

बिन फल की चिंता करे
सद्कर्म करिए सदा

दिखता है जो कुछ यहाँ
सब खेल है काल का

ऊर्जा का सिद्धांत है
लक्षण है जो आत्म का

बदले हैं बस रूप ही
ऊर्जा हो या आत्मा

मौलिक अप्रकाशित

Posted on October 8, 2018 at 4:51pm — 8 Comments

है दूर मंज़िल घना तिमिर है------ग़ज़ल, इस्लाह की गुजारिश के साथ

12122 12122 12122 12122

है दूर मन्ज़िल तिमिर घनेरा, अगर कलम की डगर कठिन है

नहीं थकेंगे कदम हमारे हमारा व्रत भी मगर कठिन है

चलो उठाओ तमाम बातें जवाब सारा कलम ही देगी

चले भले ही कदम अभी कम पता है हमको सफर कठिन है

मना ले जश्नां उड़ा मज़ाकाँ ज़माने दूँगा सलाम लाखों

सलाम वापस इधर ही होंगे हालाँकि तुमसे समर कठिन है

न पूछ काहें मैं अक्षरों की ये धार सब पर बिखेरुँ पल पल

है इक हिमालय यहाँ भी ग़म का सो आँसुओं की लहर कठिन…

Continue

Posted on September 11, 2018 at 7:30pm — 9 Comments

जिगर औ साँस में उतर आई मई (ग़ज़ल, इस्लाह के लिए)

122 212 122 212

ये शेर-ओ-शायरी? मुझे, इश्क़ है भई
सभी से, आप से; किसी ख़ास से नई

क़लम चिल्ला उठी, जहाँ के दर्द से
कुई तड़पा, निगाह नम हो गई

किसी नें राष्ट्र को तरेरी आँख तो
जिगर औ साँस में उतर आई मई

सुनो ए, नाज़नीं घमण्डी होने का
इसे इल्ज़ाम देने को बस तुम नई

महज़ खटती रहीं वो बच्चों के लिए
सभी माताओं की उम्र यूँ ही गई

मौलिक-अप्रकाशित

Posted on August 29, 2018 at 12:00am — 7 Comments

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At 4:23pm on February 28, 2016, kanta roy said…

स्वागत आपका तहेदिल आदरणीय पंकज जी।  

At 6:34pm on October 26, 2015, kanta roy said…

महीने के सक्रीय सदस्य चुने जाने के इस गौरव पल के  लिए ढेरों बधाई आपको आदरणीय पंकज जी।  

At 11:27pm on October 15, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

पंकज कुमार मिश्रा 'वात्स्यायन' जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 5:35pm on August 7, 2015, Ravi Shukla said…

स्‍वागत है पंकज जी आपका

At 11:39am on July 26, 2015, Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" said…
सभी लोगों का सादर अभिवादन
 
 
 

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