For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Rajesh srivastava
  • Male
  • Lucknow UP
  • India
Share

Rajesh srivastava's Friends

  • Er. Ambarish Srivastava
  • mohsin khan
  • Arvind Chaudhari
  • Aparna Bhatnagar
  • Admin

Rajesh srivastava's Groups

 

Rajesh srivastava's Page

Latest Activity

Rajesh srivastava updated their profile
Apr 13, 2018

Profile Information

Gender
Male
City State
Bahrain
Native Place
Lucknow
Profession
Chemical Engg

Rajesh srivastava's Blog

पीड़ा… एक कविता

पीड़ा का इक पल दर्पण

टूटा पल मे, पल मे बिखर गया |

इक मोती सा विश्वास मगर,

अन्तस मे कहीं ठहर गया |



उमडाया ये खालीपन,

गहराया ये सूनापन,

एकान्त अकेला कहीं गुजर गया |

मन ने वीणा के फ़िर तार कसे

उठो, कोई चुपके से ये कह गया |

विचलित होता अन्त:मन,

उभरा हर क्षण ये चिन्तन,

मन अनजाने ये किधर गया |

ह्र्द्य मे अपना सा एह्सास लिये

भींगी आंखो मे जो उभर गया |



करता पल पल ये क्रन्दन,

धडका बूंद बूंद ये जीवन,

छांव ममता…

Continue

Posted on September 25, 2010 at 9:00am — 4 Comments

Comment Wall (4 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

ताप संताप दोहे :

ताप संताप दोहे :सूरज अपने ताप का, देख जरा संताप। हरियाली को दे दिया, जैसे तूने शाप।।भानु रशिम कर…See More
4 hours ago
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल

2122 2122 212हुस्न का बेहतर नज़ारा चाहिए ।कुछ तो जीने का सहारा चाहिए ।।हो मुहब्बत का यहां पर श्री…See More
12 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post किस तरह होते फ़ना प्यार निभाने के लिए (४६ )
"vijay nikore साहेब बहुत बहुत शुक्रिया हौसला आफजाई के लिए | "
yesterday
Pradeep Devisharan Bhatt posted a blog post

-ट्विंकल ट्विंकल लिट्ल स्टार-

ट्विंकल ट्विंकल लिट्ल स्टारबंद करो ये अत्याचारनज़रो में वहशत है पसरीजीना बच्चों का दुश्वारशहर नया हर…See More
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

औरत.....

औरत.....जाने कितने चेहरे रखती है मुस्कराहट थक गई है दर्द के पैबंद सीते सीते ज़िंदगी हर रात कोई…See More
yesterday
Pradeep Devisharan Bhatt commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"बहुत खूब अच्छि गज़ल  हुई ।बधाई"
yesterday
Pradeep Devisharan Bhatt shared Naveen Mani Tripathi's blog post on Facebook
yesterday
vijay nikore commented on बृजेश नीरज's blog post धारा
"रचना अच्छी लगी, बधाई बृजेश जी"
yesterday
vijay nikore commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post किस तरह होते फ़ना प्यार निभाने के लिए (४६ )
"गज़ल अच्छी लिखी है। बधाई गिरधारी सिंह जी"
yesterday
vijay nikore commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद-
"हरि ओम जी, छ्न्द अच्छे लगे। बधाई।"
yesterday
Sonia is now a member of Open Books Online
yesterday
vijay nikore posted a blog post

सूर्यास्त के बाद

निर्जन समुद्र तटरहस्यमय सागर सपाट अपारउछल-उछलकर मानो कोई भेद खोलतीबार-बार टूट-टूट पड़ती लहरें…See More
yesterday

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service