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Rakshita Singh
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Rakshita Singh commented on Rakshita Singh's blog post प्रिय
"आदरणीय महेन्द्र जी नमस्कार, रचना पर आपकी प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ।।"
Jan 14
Mahendra Kumar commented on Rakshita Singh's blog post प्रिय
"अच्छी रचना है आदरणीया रक्षिता सिंह जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Jan 7
Samar kabeer commented on Rakshita Singh's blog post प्रिय
"मोहतरमा रक्षिता सिंह जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
Jan 5
Rakshita Singh posted a blog post

प्रिय

तेरी मीठी बातों से ही भरता मेरा पेट प्रिय,जिस दिन तू गुमसुम रहती है-भूखा मैं सो जाता हूँ !!मैखाना, ये आँखें तेरीपीने दे मत रोक प्रिय,जब जब ये छलका करती हैं-और बहक मैं जाता हूँ !!रहता हूँ तेरे दिल में मैं बनकर तेरा दास प्रिय,जब भी टूटा है दिल तेरा-तब मैं बेघर हो जाता हूँ !!मदहोश सा कुछ हो जाता हूँ जब होती हो तुम साथ प्रिय,छू कर निकलूँ जो लव तेरे तो-ज़ुल्फ़ों में खो जाता हूँ !!तू ही कह दे अब कहाँ गुजारूँतुझ बिन अपनी रात प्रिय,तेरी ही बाहों में अक्सर-थककर के मैं सो जाता हूँ !!तुम बिन मेरा जीवित…See More
Jan 4
Rakshita Singh commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post गजल- नहीं आती
"आदरणीय बसंत जी  नमस्कार  बहुत ही सुंदर  प्रस्तुति, हार्दिक बधाई स्वीकार करें। "
Nov 1, 2018
Rakshita Singh commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ग़ज़ल - ज़माने के लिए
"आदरणीय बसंत जी बहुत ही खूबसूरत गज़ल। बहुत बहुत बधाई"
Sep 15, 2018
Pradeep Devisharan Bhatt commented on Rakshita Singh's blog post विरह गीत
"गीत सुंदर बन पड़ा है। शुभकामनाएँ"
Aug 24, 2018
santosh khirwadkar commented on Rakshita Singh's blog post विरह गीत
"वाह्ह्ह क्या बात है ...बहुत सुंदर गीत!! बधाई!"
Aug 22, 2018
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Rakshita Singh's blog post विरह गीत
"आदरणीया रक्षिता जी विरह गीत पढ़कर बहुत आनन्द आया बहुत बहुत बधाई"
Aug 22, 2018
Naveen Mani Tripathi commented on Rakshita Singh's blog post विरह गीत
"आ0 रक्षिता सिंहः जी बहुत अच्छी रचना के लिए बधाई आपको ।"
Aug 22, 2018
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Rakshita Singh's blog post विरह गीत
"आ. रक्षिता जी, सुंदर रचना हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
Aug 20, 2018
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Rakshita Singh's blog post विरह गीत
"सुंदर रचना हुई है | हार्दिक बधाई आदरणीया |"
Aug 20, 2018
Samar kabeer commented on Rakshita Singh's blog post विरह गीत
"मुहतरमा रक्षिता सिंह जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । पटल पर बहुत समय बाद आपका आना हुआ,पिछली पोस्ट पर आपके प्रतिउत्तर की प्रतीक्षा है ।"
Aug 20, 2018
Neelam Upadhyaya commented on Rakshita Singh's blog post विरह गीत
"बहुत ही अच्छी  रचना ।  प्रस्तुति के लिए बधाई स्वीकार करें रक्षिता जी। "
Aug 20, 2018
Mohammed Arif commented on Rakshita Singh's blog post विरह गीत
"आदरणीया रक्षिता जी आदाब,                         बहुत ही लाजवाब विरह गीत । अच्छा किया जो आपने ने केंद्र में मुरारी को रख लिया । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Aug 20, 2018
Rakshita Singh commented on Rakshita Singh's blog post विरह गीत
"आदरणीय मिर्ज़ा जी, बहुत बहुत धन्यवाद!!"
Aug 19, 2018

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Comment Wall (1 comment)

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At 10:25pm on June 20, 2018, SudhenduOjha said…

आदरणीया सुश्री रक्षिता सिंह जी, नमस्कार। रचना आपको पसंद आई, धन्यवाद....

Rakshita Singh's Blog

प्रिय

तेरी मीठी बातों से ही

भरता मेरा पेट प्रिय,

जिस दिन तू गुमसुम रहती है-

भूखा मैं सो जाता हूँ !!

मैखाना, ये आँखें तेरी

पीने दे मत रोक प्रिय,

जब जब ये छलका करती हैं-

और बहक मैं जाता हूँ !!

रहता हूँ तेरे दिल में मैं

बनकर तेरा दास प्रिय,

जब भी टूटा है दिल तेरा-

तब मैं बेघर हो जाता हूँ !!

मदहोश सा कुछ हो जाता हूँ

जब होती हो तुम साथ प्रिय,

छू कर निकलूँ जो लव तेरे तो-

ज़ुल्फ़ों में खो जाता हूँ…

Continue

Posted on January 3, 2019 at 6:41pm — 4 Comments

विरह गीत

अश्रु भरे नैन,
नाहीं आवे मोहे चैन
कैसे कटें दिन रैन,
इस विरहा की मारी के...

मन में समायो है,
ये जसुदा को जायो
कोई ले चलो री गाम मोहे,
कृष्ण मुरारी के...

कर गयो टोना,
नंनबाबा को ये छोना
देख सांवरो सलौना,
गाऊँ गीत मल्हारी के...

व्याकुल सो मन
अकुलाये से नयन
बिन धीरज धरें ना
चितवन को निहारि के...

(मौलिक व अप्रकाशित)

Posted on August 19, 2018 at 8:58pm — 11 Comments

जरा ज़ुल्फें हटाओ....(ग़ज़ल)

जरा ज़ुल्फें हटाओ चाँद का दीदार मैं कर लूँ !

बस्ल की रात है तुमसे जरा सा प्यार मैं कर लूँ !!



बड़ी शोखी लिए बैठा हूँ यूँ तो अपने दामन में !

इजाजत हो अगरतो इनको हदके पार मैंकरलूँ!!



मुआलिज है तू दर्दे दिल का ये अग़यार कहते हैं!

हरीमे यार में खुद को जरा बीमार मैं कर लूँ !!



यूँ ही बैठे रहें इकदूजे के आगोश में शबभर !

जमाना देख ना पाये कोई दीवार मैं कर लूँ !!



तुझे लेकर के बाहों में लब-ए-शीरीं को मैं चूमूँ !

कि होके बेगरज़ अब इकनहीं…

Continue

Posted on June 28, 2018 at 3:16pm — 11 Comments

आप बीती...

इक आवारा तितली सी मैं

उड़ती फिरती थी सड़कों पे...



दौड़ा करती थी राहों पे

इक चंचल हिरनी के जैसे ...



इक कदम यहाँ इक कदम वहाँ

बेपरवाह घूमा करती थी...



कर उछल कूद ऊँचे वृक्षों के

पत्ते चूमा करती थी...



चलते चलते यूँ ही लब पर

जो गीत मधुर आ जाता था...



बदरंग हवाओं में जैसे

सुख का मंजर छा जाता था...



बीते पल की यादों से फिर

मैं मन ही मन भरमाती थी...



इठलाती थी बलखाती थी

लहराती फिर…

Continue

Posted on June 21, 2018 at 11:30pm — 16 Comments

 
 
 

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