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Ravi Shukla
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सतविन्द्र कुमार राणा commented on Ravi Shukla's blog post तरही ग़ज़ल : साफ छुपते भी नहीं सामने आते भी नहीं
"वाह वाह, उम्दा गजल आदरणीय रवि सर"
Thursday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Ravi Shukla's blog post तरही ग़ज़ल : साफ छुपते भी नहीं सामने आते भी नहीं
"वाह आदरणीय शुक्ला जी बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल कही है.."
Oct 7
mirza javed baig left a comment for Ravi Shukla
"मोहतरम जनाब रविरवि शुक्ला जी आदाब  मुझे अपने फ्रेंड्स लिस्ट में जोड़ने के लिए शुक्रिया  आपसे बहुत कुछ सीखने का अवसर मिलेगा। "
Oct 5
mirza javed baig and Ravi Shukla are now friends
Oct 5
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"आदरणीय निलेश जी बहुत-बहुत शुक्रिया गजल आपको पसंद आई मेहनत सफल हो गई ।बांग्लादेश कैसे गए हैं"
Sep 28
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"आदरणीय जावेद साहब ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफजाई का बहुत-बहुत शुक्रिया"
Sep 28
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"आदरणीय सुरेंद्र नाथ जी गजल मैं आपकी शिरकत और उत्साहवर्धन के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद"
Sep 28
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"आदरणीय नादिर खान साहब गजल में आपकी उपस्थिति और उत्साहवर्धन का हार्दिक धन्यवाद"
Sep 28
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"आदरणीय मोहम्मद आरिफ साहब गजल में शिरकत और हौसला अफजाई का बहुत-बहुत शुक्रिया"
Sep 28
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"आदरणीय नरेंद्र सिंह जी ग़ज़ल में आपकी उपस्थिति का बहुत-बहुत धन्यवाद आदरणीय समर साहब ने आपको कई बार कहा है कि ऐसी औपचारिक टिप्पणी न दे मंच पर एक शिष्टाचार है अगर उसको आप भी निभाएंगे तो अच्छा लगेगा"
Sep 28
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"आदरणीय समर साहब आदाब गजल को आप का आशीर्वाद मिला बहुत बहुत शुक्रिया"
Sep 28
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"आदरणीया अंजली जी ग़ज़ल में शिरकत और हौसला अफजाई का बहुत-बहुत शुक्रिया"
Sep 28
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"आदरणीय अफ़रोज साहब ग़ज़ल में शिरकत और हौसला अफजाई का बहुत-बहुत शुक्रिया"
Sep 28
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"आदरणीय अरुण जी मुशायरे में सहभागिता के लिए बधाई स्वीकार करें मिसरो में रब्त की कमी थोड़ी सी समझ आ रही है देखिएगा"
Sep 28
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"आदरणीय गंगाधर जी पिछले कई मुशायरा ओं से आपकी ग़ज़ल के साथ मौजूदगी दर्ज होती रही है इस बार भी हुई है इसके लिए आपको बहुत-बहुत बधाई लेकिन यह ग़ज़ल भाव और शिल्प दोनों ही पक्षों पर अभी समय चाहती है कृपया देखिएगा"
Sep 28
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"आदरणीय मुनीश जी गजल के लिए बधाई कुबूल करें एक शेर में ठूंठ सा सहरा कहा है इसके आशय तक नहीं पहुंच सके"
Sep 28

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Ravi Shukla's Blog

तरही ग़ज़ल : साफ छुपते भी नहीं सामने आते भी नहीं

2122  1122  1122  22/112

कोई पूछे तो मेरा हाल बताते भी नहीं,

आशनाई का सबब सबसे छुपाते भी नहीं।

शेर कहते हैं बहुत हुस्न की तारीफ़ में हम

पर कभी अपनी ज़बाँ पर उन्हें लाते भी नहीं।

जब भी देते हैं किसी फूल को हँसने की दुआ,

शाख़ से ओस की बूंदों को गिराते भी नहीं।

ये तुम्हारी है अदा या है कोई मजबूरी,

प्यार भी करते हो और उसको जताते भी नहीं।

सिर्फ़ अल्फ़ाज़ से पहचान…

Continue

Posted on August 29, 2018 at 4:00pm — 16 Comments

गीत : एक भारत श्रेष्ठ भारत

एक भारत श्रेष्ठ भारत आइये मिलकर बनाएं

देश का  सम्मान गौरव लक्ष्य हासिल कर बढ़ाएं

 

शांति के हम पथ प्रदर्शक ध्वज अहिंसा ले चलेंगे

विश्‍व गुरु बन कर पुन: संस्थापना सच की करेंगे

दें नहीं उपदेश अपने आचरण से  कर दिखाएं

 

धर्म पूजा, जाति भाषा, वेश भूषा, बोलियाँ सब

एकता के सूत्र में बंध कर चली है टोलियाँ सब

संगठन में शक्ति है, ऐसी लिखें फिर से कथाएं

 

रेल का हमको दिखाई दे रहा है पथ समांतर

मूल में इसके छिपा है साथ…

Continue

Posted on July 25, 2017 at 11:00am — 9 Comments

तरही ग़ज़ल

221 2121 1221 212



आए वो बज़्म ए शौक में आ कर चले गए,

फ़ित्ना सा एक दिल में उठा कर चले गए।



महफ़िल में आये जलवः दिखा कर चले गए,

जादू सा एक पल में जगा कर चले गए।



आने का और जाने का होता नहीं यकीन,

कुछ लोग इस तरह से भी आकर चले गए।



आँचल सरक के दोश से पहलू में क्या गिरा,

बैठे भी वो नहीं थे लजा कर चले गए।



पुरसान-ए-हाल के लिये यूँ आये मेरे पास

गोया कि एक रस्म निभा कर चले गए



आये वो दर्द बाँटने लेकिन… Continue

Posted on July 18, 2017 at 1:53pm — 18 Comments

तरही गजल : फूल जंगल में खिले किन के लिये

2122 2122 212

कार्ड काफी था न लॉगिन के लिए

वो हमे भी ले गए पिन के लिए



चाँद पर जाकर शहद वो खा रहे

आप अब भी रो रहे जिन के लिए



शेर को आता है बस करना शिकार

फूल जंगल में खिले किन के लिए



गुठलियों के दाम भी वो ले गया

उसने शीरीं आम जब गिन के लिये



आ गई अब ब्रेड में बीमारियाँ

जी रहे थे क्या इसी दिन के लिए



आये थे जापान से कल लौट कर

फिर उड़े वो रूस बर्लिन के लिए



पास पप्पू एक दिन हो…

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Posted on May 9, 2017 at 11:46am — 27 Comments

Comment Wall (12 comments)

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At 12:59am on October 5, 2018, mirza javed baig said…

मोहतरम जनाब रविरवि शुक्ला जी आदाब 

मुझे अपने फ्रेंड्स लिस्ट में जोड़ने के लिए शुक्रिया 

आपसे बहुत कुछ सीखने का अवसर मिलेगा। 

At 9:25am on September 9, 2018, Ajay Tiwari said…

आदरणीय रवि जी,

आपकी मैत्री हासिल करना किसका सौभाग्य नहीं होगा. और मुझे ख़ुशी है कि ये सौभाग्य अब मुझे भी प्राप्त है. हार्दिक आभार.

At 5:11pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय रवि शुक्ला जी प्रणाम
प्रथम तो मैं देरी से आपका आभार व्यक्त करते हुए शर्मिंदा हूँ और माफ़ी चाहता हूँ अपने मेरी पहली ही ग़ज़ल पढ़ी तथा इस पर अपने विचार व्यक्त किये मैं आपका शुक्रगुज़ार हूँ मेरी पहली ही ग़ज़ल में बहुत ख़ामियां है मुझे भरोषा है की आप जैसे गुणीजनों के सानिध्य में मैं कुछ सीख सकूँगा
आपका बहुत बहुत आभार
At 3:39pm on April 5, 2017, Gurpreet Singh said…

आदरणीय रवि शुक्ला जी आपसे बहुत अच्छी चैटिंग हो रही थी... लेकिन ऐन वक़्त पर मेरे नेट ने धोखा दे दिया ( ये अक्सर मेरे साथ ऐसा ही करता है ) और आप से  बात चीत बीच में ही कट गई ,,, खैर फिर मौका मिला तो बात आगे बढ़ांएंगे,,, संपर्क करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद 

At 11:45pm on July 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय रवि शुक्ल जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  ग़ज़ल - व्यापार होना चाहिए को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 8:23pm on December 17, 2015, Nirdosh Dixit said…
प्रणाम स्वीकारें आदरणीय शुक्ल जी, सादर आभार आपका।
At 11:19pm on November 7, 2015, जयनित कुमार मेहता said…
आपका हार्दिक आभार आदरणीय रवि जी..
At 7:31pm on November 4, 2015,
सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh
said…

क्षमा कीजियेगा आ० रवि शुक्ल जी आज ही आपका कमेंट देखा...

करवाचौथ पर लिखा गया मेरा गीत मात्रिक गीत नहीं है... इसे फायलुन X 4 की आवृति पर  लिखा गया है..

मात्रिक गीतों में मात्रा को गिराकर पढने का कोई विधान नहीं होता .. 

मात्रिक गीत (गीतिका छंद पर आधारित) के  कुछ  उदाहरण देखिये 

http://www.openbooksonline.com/profiles/blogs/5170231:BlogPost:557225

http://www.openbooksonline.com/profiles/blogs/5170231:BlogPost:518431

मंच पर गीत नवगीत पर एक आलेख देखिये 

http://www.openbooksonline.com/group/chhand/forum/topics/5170231:Topic:358338?commentId=5170231%3AComment%3A359492&xg_source=activity&groupId=5170231%3AGroup%3A156482

At 9:36pm on September 16, 2015, shree suneel said…
आदरणीय रवि शुक्ला जी, हार्दिक बधाई आपको 'महीने का सक्रिय सदस्य' चुने जाने पर, मेरी ओर से. सादर.
At 2:01pm on September 16, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

रवि शुक्ला जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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