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dandpani nahak commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल -दौर वह यारो गया और उसके दीवाने गए
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी नमस्कार बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें ! मतला क्या शानदार है ! सभी शैर बहुत ही खूब हुए हैं बधाई"
Sunday
dandpani nahak commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post मक़ाम ऐसे चाहत में आने लगे हैं (ग़ज़ल - शाहिद फ़िरोज़पुरी)
"आदरणीय रवि भसीन ' शाहिद ' साहब आदाब ! बेहतरीन ग़ज़ल के लिए बहुत बधाई ! वाह बहुत खूब जनाब !उम्दा ग़ज़ल ! शैर दर शैर दाद क़ुबूल फरमाएं !' नया जौर का सोचते हैं तरीक़ा ' वाह वाह क्या कहने ! 'नये जौर का सोचते हैं तरीक़ा' नया और नये…"
Jul 27
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-121
"बहुत बहुत धन्यवाद जनाब मो. अनीस अरमान जी "
Jul 25
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-121
"बहुत बहुत धन्यवाद जनाब मो. अनीस अरमान जी "
Jul 25
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-121
"आदरणीय चेतन प्रकाश साहब आदाब ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है  हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
Jul 25
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-121
"मुआफी चाहता हुआ आदरणीय भूलवश आपके पेज की जगह यहाँ पोस्ट हो गयी "
Jul 25
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-121
"आदरणीय दिनेश कुमार विश्वकर्मा जी आदाब एक बेहतरीन ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें  मतला क्या खूब ! वाह !तीसरा और चौथा शैर लाज़वाब !पाँचवां,  छठा, सातवां वाह एक से एक शैर वाह क्या कहने  बहुत खूब ! "
Jul 25
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-121
"आदरणीय मो. अनीस अरमान जी आदाब ! बेहतरीन ग़ज़ल हुई है  हार्दिक बधाई स्वीकार करें ! मतला बहुत उम्दा और तीसरा शैर ख़ास तौर पे बहुत  पसंद आया वाह ! उम्दा ग़ज़ल !"
Jul 25
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-121
"आदरणीय रूपम कुमार 'मीत' जी आदाब बाहर अच्छी ग़ज़ल हुई है  हार्दिक बधाई स्वीकार करें !"
Jul 25
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-121
"आदरणीय मुनीश "तन्हा"नादौन जी आदाब बेहतरीन ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
Jul 25
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-121
"आदरणीय मुनीश "तन्हा"नादौन जी आदाब बेहतरीन ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
Jul 25
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-121
"आदरणीय दयाराम मेठानी जी आदाब ! बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है  हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
Jul 25
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-121
"आदरणीय दयाराम मेठानी जी आदाब ! बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है  हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
Jul 25
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-121
"आदरणीय बासुदेव अग्रवाल 'naman' जी आदाब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें ' दूसरा और तीसरा शैर ख़ास तौर पे पसंद आया  बहुत बहुत बधाई "
Jul 25
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-121
"आदरणीय बासुदेव अग्रवाल 'naman' जी आदाब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें ' दूसरा और तीसरा शैर ख़ास तौर पे पसंद आया  बहुत बहुत बधाई "
Jul 25
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-121
"आदरणीय अनिल कुमार सिंह जी आदाब बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें मतला क्या खूब हुआ है  दूसरा शैर लाज़वाब वाह क्या कहने चौथा शैर ख़ास तौर पर पसंद आया वाह !और गिरह का शैर तो वाह क्या कहने बेहतरीन  बहुत बहुत बधाई आदरणीय "
Jul 25

Profile Information

Gender
Male
City State
arang
Native Place
arang
Profession
service

Dandpani nahak's Blog

ग़ज़ल 2122 1212 22

इश्क़ हो या कि हादसा कोई
सब का होता है कायदा कोई

वो पुराने ज़माने कि बात हैं
अब नहीं करता हैं वफ़ा कोई

ज़िन्दगी के जद्दोजहद अपने
मौत का हैं न फ़लसफ़ा कोई

सब यहाँ बे अदब हैं मेरी जां
अब करे क्या मुलाहिज़ा कोई

दिल का हैं टूटने का ग़म 'नाहक'
था सलामत मुआहिदा कोई


मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on April 9, 2020 at 2:17am

122 122 122 12 ग़ज़ल

कभी इस तरह से भी सोचा है क्या
भला ज़िन्दगी का भरोसा है क्या

यूँ रहता है जैसे यहाँ सदियों तक
रहेगा मगर ये तो धोका है क्या

नकाबों में दिल्ली है सरकारें दो
अजीबो गरीब ये तमाशा है क्या

अगर ना सियासत हो दिल्ली में तो
तभी कुछ किया जा भी सकता है क्या

दिवाली मनाई है दिल्ली ने भी
खुदा ने दिवाला निकाला है क्या

मौलिक एवम् अप्रकाशित

Posted on November 3, 2019 at 11:41pm — 1 Comment

इस दीवाली

इस दीवाली सिर्फ दीये मत जलाना तुम

बनकर प्रकाश अँधेरे में उतर जाना तुम



देखना कहीं कोई मासूम

बुझी फुलझड़ियों में गुमसुम

चिंगारी ढूंढ रहा हो तो

उसके पास जाना तुम



रौशन कर दुनिया उसको गले लगाना तुम

इस दीवाली सिर्फ दीये मत जलाना तुम



और देखना घर की झुर्रियाँ सभी

दूर कर के दिलों की दूरियाँ सभी

साथ मिलके सब अपनों के

एक एक कर जलाना मजबूरियाँ सभी



एकता में बल है कितना ये बताना तुम

इस दीवाली सिर्फ दीये मत जलाना… Continue

Posted on October 27, 2019 at 4:24pm — 8 Comments

ग़ज़ल

जरुरी नहीं वो भला हो
अगर सच भी जो बोलता हो

रहे गुण सभी आदमी में
मुसीबत में तो काम का हो

बहुत जानता तो अच्छा
नहीं जानता क्या बुरा हो

हमेशा ही सच्चाई जीते
है कोई जो ना जानता हो

जो मारे है अंदर का रावण
उसी का ही बस दशहरा हो

मौलिक एवम् अप्रकाशित

Posted on October 18, 2019 at 11:30am — 4 Comments

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At 6:03pm on March 29, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय नाहक जी
बहुत आभार है आपका. मैं कोशिश करूंगा कि भविष्य में और भी बेहतर लिख संकू.
At 10:32am on August 7, 2019, Samar kabeer said…

नाहक़ जी,प्रयासरत रहें ।

At 11:31pm on January 26, 2019, Samar kabeer said…

प्रयासरत रहें ।

At 10:27am on January 25, 2019, Samar kabeer said…

जनाब नाहक़ साहिब आदाब,

कृपया ये ग़ज़ल मुझे वाट्सऐप कर दें, मेरा नम्बर है 09753845522

At 8:06pm on December 15, 2017, dandpani nahak said…
122 122 122 122
हजारों किस्म से नुमायाँ हुए हैं
जहाँ से चले थे वहीँ पे खड़े हैं

निगाहें चुराना उन्होंने सिखाया
हमें भी नज़ारे कहाँ देखनें हैं

जिन्होनें हमें लूटना नाहिं छोड़ा
उन्हें क्या बताएं उन्हीं के धड़े हैं

तुम्हारा हमारा यहाँ क्या बचा है
चलो की यहाँ से रस्ते नापने हैं

हमें जी हजूरी नहीं 'शौक' जाओ
तुम्हारे लिए ही नहीं हम बनें हैं

दण्डपाणि नाहक 'शौक'

मौलिक अप्रकाशित
 
 
 

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