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Samar kabeer's Discussions (6,648)

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"यमित जी, मैं तो बरसों से मोबाइल से ही ओबीओ चलाता हूँ मुझे कभी कोई दिक़्क़त नहीं हुई ।"

Samar kabeer replied Oct 7 to खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...

3377 Oct 7
Reply by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

"दोस्तो आदाब, यह सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि जनाब अशोक कुमार रक्ताले जी के सम्पा…"

Samar kabeer replied Oct 2 to खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...

3377 Oct 7
Reply by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

"भाई विजय निकोर जी आदाब, आपका तह-ए-दिल से शुक्र गुज़ार हूँ । उम्मीद है आप ख़ैरियत से हो…"

Samar kabeer replied Sep 29 to खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...

3377 Oct 7
Reply by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

"कभी कभी नेटवर्क समस्या के कारण ऐसा हो जाता है, बहरहाल आपका बहुत बहुत शुक्रिय: ।"

Samar kabeer replied Sep 28 to खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...

3377 Oct 7
Reply by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

"जनाब डॉ. विजय शंकर जी, आपकी महब्बतों और दुआओं के लिये तह-ए-दिल से शुक्र गुज़ार हूँ, स…"

Samar kabeer replied Sep 28 to खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...

3377 Oct 7
Reply by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

"ओबीओ लाइव तरही मुशाइर:-अंक-135 को सफल बनाने के लिए सभी ग़ज़लकारों और पाठकों का दिल से…"

Samar kabeer replied Sep 25 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135

284 Sep 25
Reply by नादिर ख़ान

"भाई सौरभ जी, इस बिंदु पर मैंने अभी तक एक भी टिप्पणी नहीं की है, इसका सिर्फ़ एक ही मक़स…"

Samar kabeer replied Sep 25 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135

284 Sep 25
Reply by नादिर ख़ान

"नतले में 'तां' की क़ैद हो गई है, दिनेश जी से सहमत हूँ, जल्दी में टिप्पणी की तो ख़याल न…"

Samar kabeer replied Sep 25 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135

284 Sep 25
Reply by नादिर ख़ान

"जनाब नादिर ख़ान जी आदाब, तरही मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल कही आपने, बधाई स्वीकार करें । 'फिरत…"

Samar kabeer replied Sep 25 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135

284 Sep 25
Reply by नादिर ख़ान

"'दिल में बसा है यार मेरा इस क़दर हसींलड़ जायेगें उसके लिए सारे जहाँ से हम' इस शैर मे…"

Samar kabeer replied Sep 25 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135

284 Sep 25
Reply by नादिर ख़ान

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ग़ज़ल - इक अधूरी 'आरज़ू' को उम्र भर रहने दिया

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"आदरणीय बृजेश कुमार ब्रज जी आदाब, ,ग़ज़ल तक पहुंचने और हौसला अफ़जाई करने के लिए तहे दिल से…"
2 hours ago
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"आदरणीय बृजेश कुमार ब्रज जी आदाब, ,ग़ज़ल तक पहुंचने और हौसला अफ़जाई करने के लिए तहे दिल से शुक्रिया"
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अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (दिलों से ख़राशें हटाने चला हूँ )
"जनाब बृजेश कुमार ब्रज जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई का तह-ए-दिल से…"
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