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Anil Kumar Singh's Discussions (177)

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"नाहक जी मतले के ऊला पर नज़र ए सानी हो "

Anil Kumar Singh replied Nov 27, 2021 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137

81 Nov 28, 2021
Reply by Saurabh Pandey

"मान्यवर अप आपने कमेंट को ध्यान से पढ़ें . आपने नुमाया तौर पर अरूज के ऐतबार से 'राह' क…"

Anil Kumar Singh replied Nov 27, 2021 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137

81 Nov 28, 2021
Reply by Saurabh Pandey

"जी बिल्कुल लिए जा सकता है . शकील बदायूंनी का शेर मैंने सौरभ पाण्डेय जी के प्रतिउत्त…"

Anil Kumar Singh replied Nov 27, 2021 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137

81 Nov 28, 2021
Reply by Saurabh Pandey

"ग़ज़ल पर ग़ौर फरमाने का बेहद शुक्रिया मुहतरम दयाराम मैथानी जी  ."

Anil Kumar Singh replied Nov 27, 2021 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137

81 Nov 28, 2021
Reply by Saurabh Pandey

"मुसाफ़िर जी ग़ज़ल पर नज़र ए इनायत का बेहद शुक्रिया मोहतरम. रहे इश्क़ दुरुस्त तजवीज़ हैं ज…"

Anil Kumar Singh replied Nov 27, 2021 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137

81 Nov 28, 2021
Reply by Saurabh Pandey

"जी तबसिरात का शुक्रिया . 'कितना ' लफ़्ज़ जरूर बे ख़याली में कहाँ गया मगर मोहतरम 'रहे इ…"

Anil Kumar Singh replied Nov 27, 2021 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137

81 Nov 28, 2021
Reply by Saurabh Pandey

"गिरह  - नहीं राह कोई सूझे न पता है मंज़िलों का ये कहाँ पहुँच गए हम तेरी बज़्म से निकल…"

Anil Kumar Singh replied Nov 26, 2021 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137

81 Nov 28, 2021
Reply by Saurabh Pandey

"1121 2122 1121 2122रहे इश्क़ में चलें हम कितना सँभल सँभल के न हो साथ गर तुम्हारा रह ज…"

Anil Kumar Singh replied Nov 26, 2021 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137

81 Nov 28, 2021
Reply by Saurabh Pandey

"ईता की ऐब को सुधार दिया है मोहतरम  दौर ए ख़िज़ाँ में दुनियाँ तुझको हमने ही आबाद किया फ…"

Anil Kumar Singh replied Oct 29, 2021 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136

343 Oct 30, 2021
Reply by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

"दंड पाणि जी अच्छी ग़ज़ल की मुबारक़ बाद क़बूल करें ."

Anil Kumar Singh replied Oct 29, 2021 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136

343 Oct 30, 2021
Reply by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

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शिशिर के दोहे -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

ठण्ड कड़ाके की पड़े, सरसर चले समीर।नित्य शिशिर में सूर्य का, चाहे ताप शरीर।१।*दिखे शिशिर में जो…See More
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Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: आख़िरश में जिसकी खातिर सर गया
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: आख़िरश में जिसकी खातिर सर गया
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- कहीं ये उन के मुख़ालिफ़ की कोई चाल न हो
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