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Amit swapnil's Discussions (65)

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"आदरणीय मैंने "और" को 2 में लिया है 21 में नहीं, क्या ये गलत है?"

Amit swapnil replied May 28 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143

235 May 28
Reply by Samar kabeer

"आ. अमीर जी गजल तक आने व इस्लाह का शुक्रिया। मुहतरम, दूसरे शेर का उला बहर में किस वज…"

Amit swapnil replied May 28 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143

235 May 28
Reply by Samar kabeer

"आ. गणवीर जी बहुत शुक्रिया"

Amit swapnil replied May 28 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143

235 May 28
Reply by Samar kabeer

"आ. नाहक जी बहुत शुक्रिया आपका"

Amit swapnil replied May 28 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143

235 May 28
Reply by Samar kabeer

"रिचा जी शुक्रिया"

Amit swapnil replied May 28 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143

235 May 28
Reply by Samar kabeer

"आ. ऋचाजी बढ़िया गजल कही आपने, बधाई  स्वीकार करें।"

Amit swapnil replied May 27 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143

235 May 28
Reply by Samar kabeer

"आ. मेठानीजी बढ़िया गजल कही आपने, बधाई  स्वीकार करें।"

Amit swapnil replied May 27 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143

235 May 28
Reply by Samar kabeer

"आ. दंडपाणिजी बढ़िया गजल कही आपने, बधाई  स्वीकार करें।"

Amit swapnil replied May 27 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143

235 May 28
Reply by Samar kabeer

"आ. सुजानजी बढ़िया गजल कही आपने, बधाई  स्वीकार करें।"

Amit swapnil replied May 27 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143

235 May 28
Reply by Samar kabeer

"आ. गुरप्रीतजी बढ़िया गजल कही आपने, बधाई  स्वीकार करें।"

Amit swapnil replied May 27 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143

235 May 28
Reply by Samar kabeer

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"//अनबुझ का अर्थ यहाँ कभी न बुझने वाली के सन्दर्भ में ही लिया गया है। हिन्दी में इसका प्रयोग ऐसे भी…"
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"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति, स्नेह व सुझाव के लिए आभार। "
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post एक अनबुझ प्यास लेकर जी रहे हैं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई गुमनाम जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व स्नेह के लिए आभार।"
12 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post एक अनबुझ प्यास लेकर जी रहे हैं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई अमीरूद्दीन जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व स्नेह के लिए आभार। अनबुझ का अर्थ यहाँ कभी न…"
12 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post एक अनबुझ प्यास लेकर जी रहे हैं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन।गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार। भूलवश अरकान गलत…"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कभी तो पढ़ेगा वो संसार घर हैं - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई गुमनाम जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और स्नेह के लिए आभार।"
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सत्यउषा अवस्थीअसत्य को धार देकरबढ़ाने का ख़ुमार हो गया हैस्वस्थ परिचर्चा को ग़लत दिशा देनालोगों की…See More
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"आदरणीय गुमनाम पिथौरागढ़ी जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद और ज़र्रा नवाज़ी का तह-ए-दिल से शुक्रिया।"
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