For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग-1)

साथियों,
"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -1) अत्यधिक डाटा दबाव के कारण पृष्ठ जम्प आदि की शिकायत प्राप्त हो रही है जिसके कारण "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2) तैयार किया गया है, अनुरोध है कि कृपया भाग -1 में केवल टिप्पणियों को पोस्ट करें एवं अपनी ग़ज़ल भाग -2 में पोस्ट करें.....

कृपया मुशायरे सम्बंधित अधिक जानकारी एवं मुशायरा भाग 2 में प्रवेश हेतु नीचे दी गयी लिंक क्लिक करें 

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)

Views: 11070

Replies are closed for this discussion.

Replies to This Discussion

दुश्मने जाँ कहा गया है मुझे।

ज़िन्दगी भर छला गया है मुझे।।

नर्म लह्ज़े में बात की उनसे।

फिर भी पत्थर कहा गया है मुझे।।

हिचकियाँ आ रही हैं रह रह कर।

याद शायद किया गया है मुझे ।।

जिसको मैं दिल से प्यार करता था।

छोड़ कर वो चला गया है मुझे।।

झूठ कह कर भी बिल्यकीं सच का।

आईना वो दिखा गया है मुझे।।

आंँख से अश्क अब नहीं गिरते।

"सब्र करना तो आ गया है मुझे"।।

जिसका जल्वा है सारे आलम में।

उसका आशिक़ कहा गया है मुझे ||

जब कि शादाब है मेरा ,गुलशन,।

नाम सहरा दिया गया है मुझे।।

मौलिक, अप्रकाशित

बहुत खूब।

आखिरी शेर जानदार

आप का बहुत बहुत शुक्रिया मोहतरम

जनाब अशफ़ाक अली साहिब आदाब, 

ओपनिंग के लिए हार्दिक बधाई। 

आप का बहुत बहुत शुक्रिया

आप का बहुत बहुत शुक्रिया मोहतरम

जनाब अशफ़ाक़ साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल है, बधाई स्वीकार करें ।

दूसरे और छटे शैर में तक़ाबुल-ए-रदीफ़ दोष है ।

मक़्ते का ऊला मिसरा बह्र में नहीं है ।

आप का बहुत बहुत शुक्रिया मोहतरम समर कबीर साहब जोभी गलती है वो लिखदें मेहरबानी होगी

लिख तो दी भाई ।

बहुत-बहुत शुक्रिया

बेहतरीन आग़ाज़ और पेशकश हेतु तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब अशफ़ाक़ अली (गुलशन ख़ैराबादी) साहिब।

आप का बहुत बहुत शुक्रिया जनाब

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"गज़ल का सबसे जानदार शेर नौकरी मत  ढूढ़  तू इस मुल्क में ।अब तेरे हिस्से की थाली जाएगी ।।"
48 minutes ago
प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"फूँक कर छाछ पी रहा है वो ।आदमी दूध का जला क्या है ।। चाँद दिखता नहीं है कुछ दिन से ।घर पे पहरा कोई…"
50 minutes ago
प्रदीप देवीशरण भट्ट shared vijay nikore's blog post on Facebook
56 minutes ago
प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post महक
"बहुत खुब"
57 minutes ago
प्रदीप देवीशरण भट्ट shared डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post on Facebook
57 minutes ago
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

ग़ज़ल - आँसू बहाने के लिए

आप आये अब गले हमको लगाने के लिए जब न आँखों में बचे आँसू बहाने के लिए  छाँव जब से कम हुई पीपल अकेला…See More
2 hours ago
TEJ VEER SINGH posted a blog post

इलाज़  - लघुकथा  -

इलाज़  - लघुकथा  -मिश्रा जी की उन्नीस वर्षीय मंझली बेटी मोहल्ले की पानी की टंकी पर चढ़ गयी और शोले के…See More
2 hours ago
Samar kabeer commented on Abha saxena Doonwi's blog post ग़ज़ल: हर शख़्स ही लगा हमें तन्हा है रात को
"मुहतरमा आभा सक्सेना जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'जलता दिया भी देखिये…"
2 hours ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post अहसास .. कुछ क्षणिकाएं
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी क्षणिकाएँ हुई हैं,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
2 hours ago
Samar kabeer commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post उसने इतना कह मुझे मेरी ग़लतियों को रख दिया (ग़जल)
"जनाब आमोद बिंदौरी जी आदाब,ग़ज़ल अभी समय चाहती है,शिल्प,व्याकरण,और शब्दों को बरतना अभी आपको सीखना…"
3 hours ago
Samar kabeer commented on vijay nikore's blog post आज फिर ...
"प्रिय भाई विजय निकोर जी आदाब,हमेशा की तरह एक उम्द: और दिल को छू लेने वाली रचना हुई है आपकी,इस…"
3 hours ago
Samar kabeer commented on Gurpreet Singh's blog post दो ग़ज़लें (2122-1212-22)
"जनाब गुरप्रीत सिंह जी आदाब,बहुत दिनों बाद आपकी ग़ज़लें ओबीओ पर पढ़ने का मौक़ा मिला,कहाँ रहे भाई? दोनों…"
3 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service