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आदरणीय साहित्य प्रेमियो,

जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर नव-हस्ताक्षरों, के लिए अपनी कलम की धार को और भी तीक्ष्ण करने का अवसर प्रदान करता है. इसी क्रम में प्रस्तुत है :

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-132

विषय - "तेरा सहारा"

आयोजन अवधि- 16 अक्टूबर 2021, दिन शनिवार से 17 अक्टूबर 2021, दिन रविवार की समाप्ति तक अर्थात कुल दो दिन.

ध्यान रहे : बात बेशक छोटी हो लेकिन ’घाव करे गंभीर’ करने वाली हो तो पद्य- समारोह का आनन्द बहुगुणा हो जाए. आयोजन के लिए दिये विषय को केन्द्रित करते हुए आप सभी अपनी मौलिक एवं अप्रकाशित रचना पद्य-साहित्य की किसी भी विधा में स्वयं द्वारा लाइव पोस्ट कर सकते हैं. साथ ही अन्य साथियों की रचना पर लाइव टिप्पणी भी कर सकते हैं.

उदाहरण स्वरुप पद्य-साहित्य की कुछ विधाओं का नाम सूचीबद्ध किये जा रहे हैं --

तुकांत कविता, अतुकांत आधुनिक कविता, हास्य कविता, गीत-नवगीत, ग़ज़ल, नज़्म, हाइकू, सॉनेट, व्यंग्य काव्य, मुक्तक, शास्त्रीय-छंद जैसे दोहा, चौपाई, कुंडलिया, कवित्त, सवैया, हरिगीतिका आदि.

अति आवश्यक सूचना :-

रचनाओं की संख्या पर कोई बन्धन नहीं है. किन्तु, एक से अधिक रचनाएँ प्रस्तुत करनी हों तो पद्य-साहित्य की अलग अलग विधाओं अथवा अलग अलग छंदों में रचनाएँ प्रस्तुत हों.
रचना केवल स्वयं के प्रोफाइल से ही पोस्ट करें, अन्य सदस्य की रचना किसी और सदस्य द्वारा पोस्ट नहीं की जाएगी.
रचनाकारों से निवेदन है कि अपनी रचना अच्छी तरह से देवनागरी के फॉण्ट में टाइप कर लेफ्ट एलाइन, काले रंग एवं नॉन बोल्ड टेक्स्ट में ही पोस्ट करें.
रचना पोस्ट करते समय कोई भूमिका न लिखें, सीधे अपनी रचना पोस्ट करें, अंत में अपना नाम, पता, फोन नंबर, दिनांक अथवा किसी भी प्रकार के सिम्बल आदि भी न लगाएं.
प्रविष्टि के अंत में मंच के नियमानुसार केवल "मौलिक व अप्रकाशित" लिखें.
नियमों के विरुद्ध, विषय से भटकी हुई तथा अस्तरीय प्रस्तुति को बिना कोई कारण बताये तथा बिना कोई पूर्व सूचना दिए हटाया जा सकता है. यह अधिकार प्रबंधन-समिति के सदस्यों के पास सुरक्षित रहेगा, जिस पर कोई बहस नहीं की जाएगी.
सदस्यगण बार-बार संशोधन हेतु अनुरोध न करें, बल्कि उनकी रचनाओं पर प्राप्त सुझावों को भली-भाँति अध्ययन कर संकलन आने के बाद संशोधन हेतु अनुरोध करें. सदस्यगण ध्यान रखें कि रचनाओं में किन्हीं दोषों या गलतियों पर सुझावों के अनुसार संशोधन कराने को किसी सुविधा की तरह लें, न कि किसी अधिकार की तरह.

आयोजनों के वातावरण को टिप्पणियों के माध्यम से समरस बनाये रखना उचित है. लेकिन बातचीत में असंयमित तथ्य न आ पायें इसके प्रति टिप्पणीकारों से सकारात्मकता तथा संवेदनशीलता अपेक्षित है.

इस तथ्य पर ध्यान रहे कि स्माइली आदि का असंयमित अथवा अव्यावहारिक प्रयोग तथा बिना अर्थ के पोस्ट आयोजन के स्तर को हल्का करते हैं.

रचनाओं पर टिप्पणियाँ यथासंभव देवनागरी फाण्ट में ही करें. अनावश्यक रूप से स्माइली अथवा रोमन फाण्ट का उपयोग न करें. रोमन फाण्ट में टिप्पणियाँ करना, एक ऐसा रास्ता है जो अन्य कोई उपाय न रहने पर ही अपनाया जाय.

फिलहाल Reply Box बंद रहेगा जो - 16 अक्टूबर 2021, दिन शनिवार लगते ही खोल दिया जायेगा।

यदि आप किसी कारणवश अभी तक ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार से नहीं जुड़ सके है तो www.openbooksonline.com पर जाकर प्रथम बार sign up कर लें.

महा-उत्सव के सम्बन्ध मे किसी तरह की जानकारी हेतु नीचे दिये लिंक पर पूछताछ की जा सकती है ...
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मंच संचालक
ई. गणेश जी बाग़ी 
(संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक)
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आयोजन में अभी तक एक भी प्रतिभागी नही ......!!

गज़ल

जगत में कहीं कुछ हमारा न होता
जो माता पिता का सहारा न होता

ये सूरत किसी भी लायक न होती
अगर भोली माँ ने सँवारा न होता

उठाती न पीड़ा उदर में अगर माँ
कभी पाँव मैंने पसारा न होता

लगाती न टीका कभी भाल पर माँ
कहीं इस नज़र का नज़ारा न होता

सदन में ये खुशियाँ दिखाई न देतीं
जो ममता से आँगन बहारा न होता

अगर माँ पिता जी छुड़ाते न दामन
जहाँ में कभी बेसहारा न होता

मुझे फ़ल सदा ही सुकर्मों का मिलता
जो नियत से मैं भी नकारा न होता

मौलिक एवं अप्रकाशित

आदरणीय भाई छोटेलालजी

विषय पर अच्छी गजल हुई है| हार्दिक बधाई | गजल विधा के बारे में प्रबुद्धजन बतायेंगे|

भाग्य के लिए शब्द  नियति है|  

उत्साहवर्धन के लिए सादर आभार आदरणीय श्रीवास्तव जी

हे विघ्न विनाशक  

अत्याचार है अनाचार है, गणपति इसका निदान करें।

कुछ न सूझे तो हे बप्पा , मेरे कथन का ध्यान धरें॥

विघ्न डालिए उनके कार्य में, जो हैं देश के भ्रष्‍टाचारी।

लेकिन उन्हें निराश ना करें, द्वार जो आये सदाचारी॥

बालीवुड

भ्रष्ट लोग हैं बालीवुड में, वहाँ नशेड़ी हैं ज्यादा |                                                                                                                        लक्ष्मण रेखा कहीं नहीं है, ना ही कोई मर्यादा॥
हे मम्मा हे डैड सोचिए, धन किसलिए कमाना है ?
किये न बच्चों को संस्कारित, कहते नया जमाना है॥

गठबंधन का सहारा

 

अच्छे दिन की आस में, सभी विरोधी साथ।

जीवन भर गाली दिए, मिला लिए फिर हाथ॥

मेढक नागिन नेवला, सत्ता की है प्यास।

गठबंधन से जीत का, पूरा है विश्वास॥

 

 

मौलिक अप्रकाशित

सादर अभिवादन आदरणीय आपने बहुत ही सुंदर लिखा सादर शुभकामनाएं

प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद  आदरणीय

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कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

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