For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,

जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर नव-हस्ताक्षरों, के लिए अपनी कलम की धार को और भी तीक्ष्ण करने का अवसर प्रदान करता है. इसी क्रम में प्रस्तुत है :

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-144

विषय - "उजाले की ओर"

आयोजन अवधि- 15 अक्टूबर 2022, दिन शनिवार से 16 अक्टूबर 2022, दिन रविवार की समाप्ति तक अर्थात कुल दो दिन.

ध्यान रहे : बात बेशक छोटी हो लेकिन ’घाव करे गंभीर’ करने वाली हो तो पद्य- समारोह का आनन्द बहुगुणा हो जाए. आयोजन के लिए दिये विषय को केन्द्रित करते हुए आप सभी अपनी मौलिक एवं अप्रकाशित रचना पद्य-साहित्य की किसी भी विधा में स्वयं द्वारा लाइव पोस्ट कर सकते हैं. साथ ही अन्य साथियों की रचना पर लाइव टिप्पणी भी कर सकते हैं.

उदाहरण स्वरुप पद्य-साहित्य की कुछ विधाओं का नाम सूचीबद्ध किये जा रहे हैं --

तुकांत कविता, अतुकांत आधुनिक कविता, हास्य कविता, गीत-नवगीत, ग़ज़ल, नज़्म, हाइकू, सॉनेट, व्यंग्य काव्य, मुक्तक, शास्त्रीय-छंद जैसे दोहा, चौपाई, कुंडलिया, कवित्त, सवैया, हरिगीतिका आदि.

अति आवश्यक सूचना :-

रचनाओं की संख्या पर कोई बन्धन नहीं है. किन्तु, एक से अधिक रचनाएँ प्रस्तुत करनी हों तो पद्य-साहित्य की अलग अलग विधाओं अथवा अलग अलग छंदों में रचनाएँ प्रस्तुत हों.
रचना केवल स्वयं के प्रोफाइल से ही पोस्ट करें, अन्य सदस्य की रचना किसी और सदस्य द्वारा पोस्ट नहीं की जाएगी.
रचनाकारों से निवेदन है कि अपनी रचना अच्छी तरह से देवनागरी के फॉण्ट में टाइप कर लेफ्ट एलाइन, काले रंग एवं नॉन बोल्ड टेक्स्ट में ही पोस्ट करें.
रचना पोस्ट करते समय कोई भूमिका न लिखें, सीधे अपनी रचना पोस्ट करें, अंत में अपना नाम, पता, फोन नंबर, दिनांक अथवा किसी भी प्रकार के सिम्बल आदि भी न लगाएं.
प्रविष्टि के अंत में मंच के नियमानुसार केवल "मौलिक व अप्रकाशित" लिखें.
नियमों के विरुद्ध, विषय से भटकी हुई तथा अस्तरीय प्रस्तुति को बिना कोई कारण बताये तथा बिना कोई पूर्व सूचना दिए हटाया जा सकता है. यह अधिकार प्रबंधन-समिति के सदस्यों के पास सुरक्षित रहेगा, जिस पर कोई बहस नहीं की जाएगी.
सदस्यगण बार-बार संशोधन हेतु अनुरोध न करें, बल्कि उनकी रचनाओं पर प्राप्त सुझावों को भली-भाँति अध्ययन कर संकलन आने के बाद संशोधन हेतु अनुरोध करें. सदस्यगण ध्यान रखें कि रचनाओं में किन्हीं दोषों या गलतियों पर सुझावों के अनुसार संशोधन कराने को किसी सुविधा की तरह लें, न कि किसी अधिकार की तरह.

आयोजनों के वातावरण को टिप्पणियों के माध्यम से समरस बनाये रखना उचित है. लेकिन बातचीत में असंयमित तथ्य न आ पायें इसके प्रति टिप्पणीकारों से सकारात्मकता तथा संवेदनशीलता अपेक्षित है.

इस तथ्य पर ध्यान रहे कि स्माइली आदि का असंयमित अथवा अव्यावहारिक प्रयोग तथा बिना अर्थ के पोस्ट आयोजन के स्तर को हल्का करते हैं.

रचनाओं पर टिप्पणियाँ यथासंभव देवनागरी फाण्ट में ही करें. अनावश्यक रूप से स्माइली अथवा रोमन फाण्ट का उपयोग न करें. रोमन फाण्ट में टिप्पणियाँ करना, एक ऐसा रास्ता है जो अन्य कोई उपाय न रहने पर ही अपनाया जाय.

फिलहाल Reply Box बंद रहेगा जो - 15 अक्टूबर 2022, दिन शनिवार लगते ही खोल दिया जायेगा।

यदि आप किसी कारणवश अभी तक ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार से नहीं जुड़ सके है तो www.openbooksonline.com पर जाकर प्रथम बार sign up कर लें.

महा-उत्सव के सम्बन्ध मे किसी तरह की जानकारी हेतु नीचे दिये लिंक पर पूछताछ की जा सकती है ...
"OBO लाइव महा उत्सव" के सम्बन्ध मे पूछताछ

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" के पिछ्ले अंकों को पढ़ने हेतु यहाँ क्लिक करें

मंच संचालक

ई. गणेश जी बाग़ी 
(संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक)
ओपन बुक्स ऑनलाइन डॉट कॉम परिवार

Views: 360

Replies are closed for this discussion.

Replies to This Discussion

स्वागतम

दोहा-छंद 

तिमिर छोड़ अब दीजिए, चलें उजाले छोर । 

मित्रता न तम की भली, दीप जलें हर ओर ।।

जीत सत्य की झूठ पर, होती..........बारम्बार  ।

अंधकार सदैव क्षणिक, सच की जय जय कार।।

भ्रमित हुआ मानव जगत, मानस... होता द्वन्द  ।

माँ सीता ...रावण ...ठगा, साधू बन छल-छन्द ।।

श्रेय - प्रेय का ..द्वन्द.. सुन,  नाट्य कला मशहूर  ।

प्रिय हित वध या देश हित,  नायक मरण जरूर।।

सूर्य तिमिर अदृश्य ग्रहण, बिम्ब सदा यह छद्म  ।

जयद्रथ  सोचा दिन छिपा, माया थी वह ब्रह्म । ।

मौलिक व अप्रकाशित 

आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुन्दर दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई.

गज़ल
मापनी: 1222 1222

अँधेरे को भगाना है
सुहानी भोर लाना है

करें हम काम कुछ ऐसा
गरीबी को मिटाना है

बुराई है बहुत फैली
अनपढ़ों को पढ़ाना है

नई राहें नई चाहें
सभी को अब बताना है

नहीं कोई रहे पीछे
सभी को साथ लाना है

सदा रौशन वतन अपना
नया सूरज उगाना है

नई मंजिल मिले हमको
नये सपने सजाना है


(मौलिक एवं अप्रकाशित)
- दयाराम मेठानी

आ. भाई दयाराम जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुन्दर रचना हुई है। हार्दिक बधाई।

आदरणीय लक्ष्मण धामी ‘मुसाफिर’ जी, प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार।

चलो उजाले ओर

उषा अवस्थी

अविश्वास का घना अँधेरा
फैला चारों ओर
आपस का सौहार्द न टूटे
चलो उजाले ओर

जितने मुँह, उतनी ही बातें
भ्रम फैलाते नहीं अघाते
सत्य झूठ विलगा न पाएँ
बातों में उनकी आ जाएँ
भ्रम जीवी चँहु ओर
चलो उजाले ओर

इन्टरनेट का आज ज़माना
सच्चा झूठा लिखें फ़साना
आपा धापी, मारा मारी
कितने  दीख रहे व्यभिचारी
जिसका ओर न छोर
चलो उजाले ओर

कोई कुछ, कोई कुछ कहता
संशय का कोहरा नित बढ़ता
धुन्ध जल्द ही छँट जाएगी
हो समाप्त अज्ञान की 
रात्रि, खिलेगी भोर
चलो उजाले ओर

मौलिक एवं अप्रकाशित


चलो उजाले ओर

उषा अवस्थी

अविश्वास का घना अँधेरा
फैला चारों ओर
आपस का सौहार्द न टूटे
चलो उजाले ओर

जितने मुँह, उतनी ही बातें
भ्रम फैलाते नहीं अघाते
सत्य झूठ विलगा न पाएँ
बातों में उनकी आ जाएँ
भ्रम जीवी चँहु ओर
चलो उजाले ओर

इन्टरनेट का आज ज़माना
सच्चा झूठा लिखें फ़साना
आपा धापी, मारा मारी
कितने  दीख रहे व्यभिचारी
जिसका ओर न छोर
चलो उजाले ओर

कोई कुछ, कोई कुछ कहता
संशय का कोहरा नित बढ़ता
धुन्ध जल्द ही छँट जाएगी
हो समाप्त अज्ञान की 
रात्रि, खिलेगी भोर
चलो उजाले ओर

मौलिक एवं अप्रकाशित

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"जनाब अमित जी, हौसला अफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया. नुक्ते की परेशानी तो मेरे कीबोर्ड की वजह से…"
1 minute ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"सम्माननीय अमित भाई, ग़ज़ल का हर शेर बहुत उम्दा और क़ाबिले-तारीफ़ है। मतले का ऊला एक नज़र में विपरीत अर्थ…"
5 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"आ. भाई जैफ जी, सादर अभिवादन।अच्छी गजल हुई है, हार्दिक वधाई।"
9 minutes ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति के लिए आभार श्री मैथानी जी"
9 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"जी,बहतर ।"
18 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"आ. भाई दण्डपाणि जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार।"
18 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"जनाब दयाराम मेठानी जी आदाब, तरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है, बधाई स्वीकार करें । शेष जनाब…"
20 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"जी, मैं समझ गया ।"
23 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"आ. भाई नाथ सोनांचली जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
24 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"आ. भाई शिज्जू जी, अभिवादन व धन्यवाद।"
27 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"आ. भाई अजय जी, अभिवादन एवं हार्दिक धन्यवाद।"
29 minutes ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"जी हाँ। मजबूरी ख़त्म हो गई। क्योंकि पहले मैं अपने मोबाइल से टाइप नहीं कर पा रहा था। रेंज का इशू था।…"
29 minutes ago

© 2023   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service