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"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-54 (विषय: स्त्री)

आदरणीय साथिओ,

सादर नमन।
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"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-54 में आप सभी का हार्दिक स्वागत है. प्रस्तुत है:  
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"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-54
विषय: स्त्री
अवधि : 29-09-2019  से 30-9-2019 
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अति आवश्यक सूचना :-
1. सदस्यगण आयोजन अवधि के दौरान अपनी एक लघुकथा पोस्ट कर सकते हैं। 
2. रचनाकारों से निवेदन है कि अपनी रचना/ टिप्पणियाँ केवल देवनागरी फॉण्ट में टाइप कर, लेफ्ट एलाइन, काले रंग एवं नॉन बोल्ड/नॉन इटेलिक टेक्स्ट में ही पोस्ट करें।
3. टिप्पणियाँ केवल "रनिंग टेक्स्ट" में ही लिखें, १०-१५ शब्द की टिप्पणी को ३-४ पंक्तियों में विभक्त न करें। ऐसा करने से आयोजन के पन्नों की संख्या अनावश्यक रूप में बढ़ जाती है तथा "पेज जम्पिंग" की समस्या आ जाती है। 
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5. नियमों के विरुद्ध, विषय से भटकी हुई तथा अस्तरीय प्रस्तुति तथा गलत थ्रेड में पोस्ट हुई रचना/टिप्पणी को बिना कोई कारण बताये हटाया जा सकता है। यह अधिकार प्रबंधन-समिति के सदस्यों के पास सुरक्षित रहेगा, जिस पर कोई बहस नहीं की जाएगी.
6. रचना पोस्ट करते समय कोई भूमिका, अपना नाम, पता, फोन नंबर, दिनांक अथवा किसी भी प्रकार के सिम्बल/स्माइली आदि लिखने /लगाने की आवश्यकता नहीं है।
7. प्रविष्टि के अंत में मंच के नियमानुसार "मौलिक व अप्रकाशित" अवश्य लिखें।
8. आयोजन से दौरान रचना में संशोधन हेतु कोई अनुरोध स्वीकार्य न होगा। रचनाओं का संकलन आने के बाद ही संशोधन हेतु अनुरोध करें। 
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मंच संचालक
योगराज प्रभाकर
(प्रधान संपादक)
ओपनबुक्स ऑनलाइन डॉट कॉम

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मसाज (लघुकथा) :


"आती-जाती लहरों की तरह लड़के या मर्द मेरी ज़िन्दगी में आये और चले गये! मर्दांनगी दिखा गये मुझे या रुला गये!"


"बदक़िस्मती से मेरे तज़र्बे भी ऐसे ही रहे कि आती-जाती लहरों की तरह लड़़कियाँ या औरतें मुझे हसीं दुनिया दिखा गईं और चली गईं! लेकिन मैं रोया कभी नहीं।"


लिव-इन-रिलेशनशिप में जी रहे धनाढ्य परिवारों से संबंधित धनवान युगल ने अपनी ज़िन्दगी के राज़ आज उजागर कर ही दिये।


"तुम ठहरे पुरुष!" महिला साथी ने ऐसी लम्बी सांस लेते हुए कहा जैसे कि सिसक रही हो, लेकिन न रोयी और न ही सिसकी। बस, साथी पुरुष की ओर तनिक खिसकी।


" ... और तुम ठहरीं औरत! सामंजस्य कर एक नयी शुरुआत कर देती हो! परेशानी तो अहम और वहम वाले हम मर्दों को होती है!" यह कहते हुए पुरुष साथी ने उसे बाहों में समेट लिया। दोनों एक-दूसरे की आंखों में झाँक कर पता नहीं क्या--क्या जताने लगे; भरोसा, प्यार या प्रतिबद्धता!


"... पैंतीस के ऊपर होने वाली होगी अब तुम्हारी उम्र! ओहदा, धन-दौलत सब कुछ है ही तुम्हारे पास! शादी क्यों नहीं कर लेतीं?"


इस सवाल से उसे करेंट जैसा झटका लगा और उसके बदन से दूर होती हुई बोली, "विवाह! ... इस नाम की संस्था पर मुझे विश्वास नहीं! ... तुम भी तो चालीस पार कर रहे होगे! भरोसा है शादी के दस्तूर पर?"


"यही समझने के लिए पहली दफ़ा लिव-इन-रिलेशन में हूँ तुम्हारे जैसी पसंदीदा होनहार के साथ! सुना है कि पत्नी से जो प्यार और सेवायें मिलती हैं, वो किसी और से क़तई नहीं!"


"... कौन से ज़माने की बात कर रहे हो? ... इस देश में सब-कुछ बदल चुका है! लड़का-लड़की भी, औरत-मर्द भी और रिश्तों की परिभाषायें भी! बदला नहीं है, तो केवल स्त्री-शोषण और हरेसमेंट! ... लिव-इन-रिलेशनशिप के भी अपने अनोखे दस्तूर हैं और हदें हैं! दरअसल तुम्हारा यह पहला ट्रायल है न!"


यह सुनकर चौंक कर वह बोला, "... तो तुम..!"


"... हाँ, तुम मेरे तीसरे पार्टनर हो! ... लेकिन आज तक तुम्हें ऐसा महसूस नहीं हुआ होगा, है न! तुम जैसे जज़्बाती मर्दों की ज़रूरतों को बख़ूबी समझती हूँ!" इतना कहकर वह उसका सिर सहलाती हुई मसाज करने लगी।


उसकी आगोश में समा कर चुम्बन बरसाते हुए वह धीमे स्वर में बोला, "मेरी ज़रूरतें इतने कम दिनों में ही शायद तुम समझ गई हो। ... मैं नहीं समझा ... अच्छा, बताओ तो, तुम्हारी असल ज़रूरतें क्या हैं उम्र के इस पड़ाव पर?"


जवाबी चुम्बन सम्पन्न करने के बाद वह बोली, "मसाज! ... दिल, जिगर, नज़र और रूह की मसाज की ज़रूरत! लेकिन इस हुनर को सीखने में अधिकतर मर्दों को अधिक वक़्त लगता है!"


(मौलिक व अप्रकाशित)


आदरणीय शेख शहजाद उस्मानी जी, सब से पहली लघुकथा पोस्ट कर गोष्ठी का आरंभ करने के लिए आप को हार्दिक बधाई ।

आदाब। शुक्रिया जनाब ओमप्रकाश क्षत्रीय 'प्रकाश' साहिब।

स्त्री-पुरुष की दैहिक और मानसिक जरूरतों को इंगित करती एक अच्छी लघुकथा हेतु आपको बधाई आदरणीय उस्मानी जी।

बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय मनन कुमार सिंह साहिब।

लिवइन रिलेशनशिप  काफी पेचीदा और कथाओं में अक्सर उठाया जाने वाला विषय है। आप ही की कलम से दो तीन रचनाएँ पढ चुकी हूँ।प्रदत्त विषय स्त्री बहुत व्यापक है।आपने तथाकथित  आधुनिक स्त्री की सोच को दर्शाने का प्रयास किया है। स्त्री कोई भी हो आपसी समझ और प्यार हर रिश्ते की नींव है।

एक अच्छी कथा से गोष्ठी का आरंभ करने के लिये हार्दिक बधाई आदरणीय उस्मानी जी

आदाब। सही कहा आपने। व्यापक विषय है । रात बारह बजे से साढ़े बारह बजे तक गोष्ठी में कोई रचना आग़ाज़ करती न दिखी तो मैंंने ही पोस्ट कर दी।  दो घंटे पहले ही लिख सका सहभागिता हेतु। रचना पर समय देकर मुझे प्रोत्साहित करने के लिए बहु-बहुत शुक्रिया आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय साहिबा।

 

मोहतरम उस्मानी साहब पहली व ख़ूब सूरत पेशकश क़ाबिले तारीफ़ मुबारकबाद जनाब ।

आदाब। बहुत-बहुत शुक्रिया जनाब आसिफ़ ज़ैदी साहिब।

लिव इन रिलेशन पर आधारित उत्तम लघुकथा उस्मानी जी । पंच लाइन बहुत जोरदार हुई है ।

आदाब। रचना पर समय देकर अपनी राय साझा करते हुए इस प्रोत्साहक टिप्पणी के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीया कनक हरलाल्का साहिबा।

विषय आधारित सुंदर कथा जिसमें स्त्री के साथ पुरूष मानसिकता का चित्रण है बधाई  आद० शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी ।

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