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बाल साहित्य

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बाल साहित्य

यहाँ पर बाल साहित्य लिखा जा सकता है |

Location: World
Members: 166
Latest Activity: 9 hours ago

इस समूह में सभी रचनाकारों द्वारा बाल साहित्य के साथ-साथ ही, बच्चों द्वारा रचित कवितायेँ, कहानियाँ और चित्र भी सादर आमंत्रित है.

Discussion Forum

जुगत (बाल-लघुकथा/बाल-कहानी)

गुड्डू, गोविंद और गोपी तीनों अलग अलग कक्षाओं के थे और तीनों दोस्त भी नहीं थे। स्कूल में आज फिर वे तीनों न तो मध्यान्ह अवकाश में अपना मनपसंद गेम खेल पाये थे और न ही इस समय खेल के पीरियड में उन्हें उनकी कक्षा के साथियों ने अपने साथ किसी खेल में शामिल…Continue

Tags: बाल-कहानी, बाल-लघुकथा, लघुकथा

Started by Sheikh Shahzad Usmani Dec 28, 2018.

बाल कविता 2 Replies

फूल खिले जो बगिया मेंवह कितने सुन्दर लगते हैंलाल ,गुलाबी,नीले,पीलेमन खुशियों से भरते हैंतितली उड़ती रंग-बिरंगीफूलों पर है इधर-उधरभँवरे भी गुँजन करतेउन पर मंडराने लगते हैंचूँ-चूँ करती चिड़ियाँ भीआकर डाली पर खेल रहींइस डाली से उस डाली परउड़ कर झूला झूल…Continue

Started by Usha Awasthi. Last reply by Sheikh Shahzad Usmani Dec 29, 2018.

पापा जैसा चुनमुन (कहानी )

पापा जैसा चुनमुनसोमवार स्कूल का आखिरी दिन था |कल से गर्मियों की छुट्टियाँ थीं |चुनमुन स्कूल-वैन से घर लौट रहा था| ड्राईवर (संवाहक ) अंकल गाना गा रहे थे और बस चलाए जा रहे थे |“अंकल कल से आपकी भी छुट्टी पड़ गयी ?” चुनमुन ने पूछा“हाँ |” ड्राईवर अंकल ने…Continue

Tags: यातायात-साधन, काम-धंधे, दिन, के, सप्ताह

Started by somesh kumar May 21, 2018.

तब ही मंज़िल पाओगे | 2 Replies

उठो  पढ़ो  नित  नव उमंग  से , आलस दूर भगा डालो | सुबह शाम करो  याद  मन से , रोज  आदत बना डालो  | मेहनत से कभी डरो नहीं ,   आगे  कदम बढाते जा   | रोज  सुबह  की बेला में उठ , सभी पाठ दुहराते जा  | डरना नहीं किसी मौसम से , सर्दी गर्मी  हो  जाड़ा   |  लगन…Continue

Tags: |, कविता

Started by Shyam Narain Verma. Last reply by Shyam Narain Verma May 21, 2018.

कोयल (बाल कविता) 5 Replies

ताटंक छंद (16, 14 पर यति, अंत मे तीन गुरु)कोयल वसन्त ऋतु की रानी, सात सुरों की ज्ञाता हैगाती है जब अपनी धुन में,मन मधुरस हो जाता है।।दिखने में है काली लेकिन,लगती कितनी भोली हैस्वर्ग लोक से सीखी इसनेमिसरी जैसी बोली है।1।आम्र कुंज में उड़ती फिरती,लुक…Continue

Started by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'. Last reply by Sheikh Shahzad Usmani May 20, 2018.

बाल प्रार्थना (शक्ति छंद) 3 Replies

शक्ति छंद:122 122 122 12 (11=2 मांन्य)करें प्रार्थना प्रभु जरा ध्यान दोदया प्रेम दिल में भरा ज्ञान दोजुड़ें ना कभी हम किसी पाप सेबचें हम बुरे कर्म सन्ताप से।।जलाएँ न घर हम किसी और कासजाएँ वतन मिल नए दौर का।।लगे हर जगह आज घर द्वार साअखिल देश हो एक…Continue

Started by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'. Last reply by Sheikh Shahzad Usmani May 20, 2018.

गौरैया (विश्व गौरेया दिवस पर बाल कविता) 3 Replies

घर आँगन की राज दुलारी,प्यारी चुनमुन गौरैयाकभी अकेले कभी झुंड मेंकरती है ता ता थैया ।।चोंच दबाकर तिनका तिनका,अपना नीड़ बनाती हैफुदक फुदक कर घर आँगन के,कीड़े चट कर जाती है।।कभी नाचती कभी झगड़तीइधर इधर बलखाती हैछोटे छोटे पर है लेकिन,कभी पकड़ ना आती…Continue

Started by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'. Last reply by Sheikh Shahzad Usmani May 20, 2018.

चन्द बाल कविताएं ( शक्ति छंद) 3 Replies

बड़ा जग भरा नीर जूठा कियामगर घूँट भर ही लिया औ पियाउँडेला गया सब,बचा जो, उसेजरूरत कहाँ है न मन में घुसेखुले में जला फूँस करते धुआँरहे खोद खुद के लिए यूँ कुआँजहर से भरी वायु होगी जहाँभला ठीक साँसें मिलेंगी कहाँचलाएं पटाखे खुशी में सभीन सोचें सही ये न…Continue

Started by सतविन्द्र कुमार राणा. Last reply by Sheikh Shahzad Usmani May 20, 2018.

तुम भी तो कुछ किया करो

माँ कितना कुछ करती तुमकोतुम भी तो कुछ किया करोवह जब कामों से थक बैठेपानी, पीने को दिया करोपापा जब ऑफिस से आएँबैग हाथ में लिया करोछोटे-छोटे कामों कोअपने हाथों तुम किया करोअपना बस्ता आप सहेजोकाॅपी पेंसिल लिया करोजब शाला से वापस आओसही जगह पर धरा करोयदि…Continue

Started by Usha Awasthi Feb 28, 2018.

बाल कविता

      गौरैया              - उषा अवस्थी      छोटे छोटे पर फैलाकर      फुर-फुर कर वह उड़ जाती      कभी मुँडेर, कभी डाली पर       चहक-चहक कर इठलाती       एक काम तुम करो जरा       चावल या काकुन ले आओ        जो गौरैया को प्रिय लगता         खुली जगह पर…Continue

Started by Usha Awasthi Feb 12, 2018.

 
 
 

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"आदरणीय सत्यनारायण जी, आपकी सहभागिता के लिए हार्दिक धन्यवाद ..  आपकी प्रस्तुति के सभी दोहे…"
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"वाह वाह !  आपकी प्रस्तुति के लिए सादर धन्यवाद आदरणीय. सभी दोहे सार्थक और चित्रानुरूप हुए…"
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"अवश्य,मुहतरम ,चर्चा तो ज़रूरी है,लेकिन सार्थक चर्चा,जिसका कुछ नतीजा भी निकले,होता ये है कि चर्चा…"
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"क्या कहने !! सभी दोहे शानदार हुए हैं, अंतिम दोहा की अंतिम पंक्ति  ......बहकों को बहका…"
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"अभी समय कम है हुज़ूर-ए-वाला,आपको ये जानकारी अवश्य उपलब्ध कराई जाएगी,और देना ज़रूरी भी है,लेकिन कुछ…"
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"इसका कोई दूसरा मक़सद हो तो आप बताएं? //  किन्तु हमें संतुलन तो बना कर रखना ही होगा न कि भ्रम की…"
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मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 93 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय हरिहर झा जी, आपके द्वारा सृजित सभी दोहे शानदार लगें, बहुत बहुत बधाई इस प्रस्तुति हेतु। "
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