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धार्मिक साहित्य Discussions (143)

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मकर-संक्रान्ति पर विशेष

  भारत वस्तुतः गाँवों का देश है. यहाँ के गाँव प्रकृति और प्राकृतिक परिवर्त्तनों से अधिक प्रभावित होते हैं, बनिस्पत अन्य भौतिक कारणों से. च…

Started by Saurabh PandeyLatest Reply

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भक्तिरस के दोहे :

भक्तिरस के दोहे : देना हो तो दीजिए, प्रभु ऐसा वरदान। मुख से निकले राम जब, प्राण करें प्रस्थान।1। पाना हो जो राम तो , बन जाओ हनुमान। अंतर्…

Started by Sushil Sarna

2 Aug 13
Reply by Sushil Sarna

गणपति वंदना

गणपति महाराजा, पूर्ण करो काजा, दयावंत, दयाधारी. गौरी नंदन , दूर करो क्रंदन, जाऊँ मैं  बलिहारी. रिद्धि-सिद्धि के स्वामी, अंतर्यामी, तुम हो…

Started by Anita Sharma

0 Oct 5, 2018

तुलसी : एक सच्चे गुरु

तुलसी :एक सच्चे गुरु 'उमा कहेउ मैं अनुभव अपना. सत हरि भजन जगत सब सपना.' इस एक चौपाई में संतकवि तुलसी जीवन के उस परम सत्य से साक्षात् कराते…

Started by Ganga Dhar Sharma 'Hindustan'

0 Aug 25, 2018

जपत रटत राम नाम, तरना है दुनिया

(छंद-उड़ियाना पद, विधान- उड़ियाना-12, 10 अंत में एक गुरू, उड़ियाना पद 12,12,12,10 अंत में एक गुरू) जपत रटत राम नाम, तरना है दुनिया जपत रटत रा…

Started by रमेश कुमार चौहान

0 May 31, 2018

हरो बाधा सभी हनुमन........

हरो बाधा सभी हनुमन..... विधाता छंद हरो बाधा सभी हनुमन.........शरण मैं आपकी आया। करो मुझपर कृपा ऐसी,....विमल हो बुद्धि मन काया।। नमन करता सद…

Started by Satyanarayan Singh

0 Apr 1, 2018

अनुष्टुप छंद

अनुष्टुप छंद यह छन्द न पूर्णतयः मात्रिक है, न ही पूर्णतयः वार्णिक। इसमें चार चरण होते हैं। हर चरण में आठ वर्ण होते हैं - पर मात्राएँ सबमें…

Started by SANDEEP KUMAR PATEL

2 Dec 30, 2017
Reply by SANDEEP KUMAR PATEL

मौसे कह गयो थो कान्हा (कविता)

मौसे कह गयो थो कान्हा बेगी ही आ जावेगो सलौनी सन्ध्या हो चली है जाने कब वो आवेगो माखन देखो सूख गयो है धूप में कान्हा जब से गयो है हाय हाय अ…

Started by KALPANA BHATT ('रौनक़')

0 Oct 12, 2017

शक्ति के रूप

शक्ति के रूप  (मौलिक एवं अप्रकाशित ) हिमालय की लाली मां, हैं बैल पर सवार | दिव्य रूप हाथ त्रिशूल, सुशोभित पद्म सार ||   सत्व सत्ता प्रकृति…

Started by VINOD GUPTA

2 Sep 6, 2017
Reply by VINOD GUPTA

मेरो किशन कन्हाई काहे मोहे तड़पायो

मेरो किशन कन्हाई काहे मोहे तड़पायो , मो कहूँ आवत नाही कबहू -२ ना मुख चंद्र दिखायो , मेरो किशन कन्हाई काहे मोहे तड़पायो। बहुत सुनिन्ह है तोरे…

Started by Mohit mishra (mukt)

2 Aug 30, 2017
Reply by Mohit mishra (mukt)

कान्हा को नाच नचा गयी राधा

बैरिन बंशी चुराने चली जब तो पहले सकुचा गयी राधा चोरी से चुपके से हौले से धीरे से कान्हा की आँख बचा गयी राधा पूछा किये मुरलीधर श्याम तो लीला…

Started by Alok Rawat

2 Aug 29, 2017
Reply by Alok Rawat

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"आ. नीलेश जी नमस्कार मैं इस मंच पर नई हूँ और इस मंच से सीखना चाहती हूँ, पढ़ना चाहती हूँ, लिखना चाहती…"
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