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अमीरुद्दीन 'अमीर'
  • Male
  • बाग़पत, उत्तर प्रदेश.
  • India
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अमीरुद्दीन 'अमीर''s Friends

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Latest Activity

अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post मेरे ही प्यार में पगी आई. - ग़ज़ल
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब, मतला समझने में क़ासिर हूँ, इस के इलावा ग़ज़ल के सभी अशआ़र लाजवाब हुए हैं, दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ।  सादर।"
4 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post एक नया दस्तूर (ग़ज़ल - शाहिद फिरोज़पुरी)
"मुहतरम जनाब रवि भसीन शाहिद साहिब आदाब, उम्दा ग़ज़ल हुई है शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ। सादर।"
4 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post सितारों के बिना ये आसमाँ अच्छा नहीं लगता
"जनाब रूपम कुमार 'मीत' जी आदाब, आल-ए-अहमद सुरूर साहिब की ज़मीन में अच्छी ग़ज़ल कही है आपने शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ। फ़ीचर ब्लॉग में ग़ज़ल शामिल होने की मुबारकबाद अलग से पेश है। "
Thursday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on anjali gupta's blog post ग़ज़ल
"मुहतरमा अंजलि 'सिफ़र' साहिबा आदाब,  लाजवाब अश'आ़र के साथ शानदार ग़ज़ल कही है आपने कुछ अश'आ़र में मामूली तरमीम कर सकते हैं, बहरहाल दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ। //शतरंज मे रिश्तों की मैं हारा नहीं होता :  रवानी के…"
Wednesday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ग़ज़ल को सँवारा है इन दिनों.- ग़ज़ल
"आदरणीय बसंत कुमार शर्मा जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ। उर्दू के अल्फा़ज़ वक़्त, नक़ाब, दरख़्त और ख़ूब में नुक़ते लगा लें।  मिसरा "मिलना गले न मिलाना किसी से हाथ,  बह्र में नहीं है देखियेगा, शायद कुछ छूट…"
Wednesday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (मौत की दस्तक है क्या...)
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद और हौसला अफ़ज़ाई के लिये तहे-दिल से शुक्रिया।  सादर।"
Wednesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (मौत की दस्तक है क्या...)
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन । बेहतरीन गजल हुई है । हार्दिक बधाई स्वीकारें ।"
Tuesday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (मौत की दस्तक है क्या...)
"जनाब बृजेश कुमार 'बृज' जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद और हौसला अफ़ज़ाई के लिये तहे-दिल से शुक्रिया। सादर।"
Aug 4
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (मौत की दस्तक है क्या...)
"बहुत बढ़िया ग़ज़ल हुई ज़नाब अमीर जी..मुबारकबाद"
Aug 4
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (मौत की दस्तक है क्या...)
"मुहतरम जनाब रवि भसीन शाहिद साहिब आदाब।हक़ीर की ग़ज़ल पर आपकी आमद, सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई के लिए आपका मशकूर-ओ-ममनून हूँ जनाब। आइन्द: भी आपकी नवाज़िश का मुश्ताक़ रहूँगा। सादर। "
Aug 4
रवि भसीन 'शाहिद' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (मौत की दस्तक है क्या...)
"आदरणीया अमीरुद्दीन 'अमीर' साहिब, आदाब अर्ज़ है। बहुत ख़ूब जनाब, इस वज़्न में बहुत कम क़वाफ़ी होने के बावजूद और बिना सौती क़ाफ़िया इस्तेमाल किये आपने सात अशआर कह दिए, इस पर आपको दाद और मुबारकबाद पेश करता हूँ।"
Aug 3
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (मौत की दस्तक है क्या...)
"आदरणीय जनाब सालिक गणवीर जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद, हौसला अफ़ज़ाई और इस्लाह का तहे दिल से शुक्रगुजा़र हूँ। जनाब 'तक' क़वाफ़ी के ज़्यादा इस्तेमाल पर आपसे सहमत हूँ, लेकिन अश'आ़र आपको अच्छे लगे हैं तो मेरे लिए ख़ुशी की बात है। …"
Aug 3
सालिक गणवीर commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (मौत की दस्तक है क्या...)
"आदरणीय अमीरूद्दीन 'अमीर' साहिबसादर अभिवादनबेहतरीन अश'आर से सजी एक उम्दा ग़ज़ल कही हैै आपने, निस्संदेह बधाई के पात्र हैं.स्वीकार करें आदरणीय, लेकिन तक क़वाफ़ी का ती न बार इस्तेमाल पसंद नहीं आया."
Aug 3
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on सालिक गणवीर's blog post लोग घर के हों या कि बाहर के...(ग़ज़ल : सालिक गणवीर)
"जनाब सालिक गणवीर जी आदाब, शानदार ग़ज़ल हुई है दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ। //यूँ तो पाबंदियाँ है उड़ने पर  : इस मिसरे में टंकण त्रुटि 'है' को 'हैं' कर लें। सादर। "
Aug 2
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post वो भी नहीं रही (ग़ज़ल - शाहिद फ़िरोज़पुरी)
"जनाब रवि भसीन 'शाहिद' जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ। //ख़ुद से जो अश्नाई थी वो भी नहीं रही [9]  "अश्नाई" ये लफ़्ज़ "आशनाई" है, शायद टंकण त्रुटि हो गयी है, देखियेगा। सादर। "
Aug 2
अमीरुद्दीन 'अमीर' posted a blog post

ग़ज़ल (मौत की दस्तक है क्या...)

2122 / 2122 / 2122 / 212-बढ़ रही है दिल की धड़कन मौत की दस्तक है क्या जा रहे वापस या उसके क़दमों की ठक-ठक है क्याफिर उठा  है  हर तरफ़  ये इक धुआँ सा आज क्योंआग जिससे घर जला था बढ़ गई दिल तक है क्याभूल   बैठा   है  मुझे   तू   सुन  के  या   अन्जान  हैमेरी आहों  की  रसाई  आज  भी  तुझ  तक  है क्यागुम हुआ  हूँ जबसे  मैं  उसके  ख़याल-ओ-ख़्वाब मेंबोलता हूँ जब भी कुछ ये सुनता हूंँ बक-बक है क्यागर  गिला  मुझसे  है  कोई  कहने  में  क्या  बात  है मैं  तेरा अपना  हूँ भाई  इसमें  भी कुछ  शक है…See More
Aug 2

Profile Information

Gender
Male
City State
BAGHPAT , UTTAR PRADESH.
Native Place
BARAUT
Profession
Private job
About me
उर्दु शायरी हिन्दी में लिखने और पढ़ने का शौक़ है॥

अमीरुद्दीन 'अमीर''s Blog

ग़ज़ल (मौत की दस्तक है क्या...)

2122 / 2122 / 2122 / 212

-

बढ़ रही है दिल की धड़कन मौत की दस्तक है क्या 

जा रहे वापस या उसके क़दमों की ठक-ठक है क्या

फिर उठा  है  हर तरफ़  ये इक धुआँ सा आज क्यों

आग जिससे घर जला था बढ़ गई दिल तक है क्या

भूल   बैठा   है  मुझे   तू   सुन  के  या   अन्जान  है

मेरी आहों  की  रसाई  आज  भी  तुझ  तक  है क्या

गुम हुआ  हूँ जबसे  मैं  उसके  ख़याल-ओ-ख़्वाब में

बोलता हूँ जब भी कुछ ये सुनता हूंँ बक-बक है…

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Posted on August 1, 2020 at 4:30pm — 8 Comments

नग़्मा (आप यूँ ही अगर हमसे रूठे रहे)

आप यूँ ही अगर हमसे रूठे रहे 

एक आशिक़ जहाँ से गुज़र जाएगा 

ऐसी बातें करोगे अगर आप तो

ग़म का मारा ये दिल कुछ भी कर जाएगा

आप यूँ ही अगर... 

कैसी नाराज़गी है ओ जान-ए-वफ़ा

मुझसे क्या हो गई भूल कुछ तो बता 

हाय कुछ तो बता 

आप ख़ुद ही समझ लेंगे इक रोज़ ये

जब ख़ुमार आपका ये उतर जाएगा

आप यूँ ही अगर...

तेरे वादों पे हम कर यक़ीं लुट गए

तेरी भोली सी सूरत पे क्यूँ मिट गए

हाय क्यूँ मिट गए

मर…

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Posted on July 22, 2020 at 6:30pm — 5 Comments

ग़ज़ल (क्या नसीब है)

2212 /1212 /2212 /12

क्या आरज़ू थी दिल तेरी और क्या नसीब है

चाहा था  टूट कर  जिसे वो अब  रक़ीब  है।

पलकों की छाँव थी जहाँ है ग़म की धूप अब

वो  भी   मेरा  नसीब  था  ये  भी  नसीब  है।

ऐसे  बदल   गये   मेरे   हालात   क्या   कहूँ

अब  चारा-गर  कोई  न  ही  कोई  तबीब है। 

कैसे  मिले  ख़ुशी  हों  भला  दूर  कैसे  ग़म

मुश्किल  कुशा  के  साथ वो  मेरा रक़ीब है।

उसने  बड़े  ही  प्यार  से  बर्बाद  कर …

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Posted on July 6, 2020 at 2:16pm — 11 Comments

ग़ज़ल (जो नज़र से पी रहे हैं )

212 /1212 /2

जो नज़र से पी रहे हैं

बस वही तो जी रहे हैं

ये हमारा रब्त देखो

बिन मिलाए पी रहे हैं

कोई रिन्द भी नहीं हम

बस ख़ुशी में पी रहे हैं

इक हमें नहीं मयस्सर

गो सभी तो पी रहे हैं

क्या पिलाएंगे हमें जो 

तिश्नगी में जी रहे हैं 

वो हमें भी तो पिला दें

जो बड़े सख़ी रहे हैं   

 

बेख़ुदी की ज़िन्दगी है 

बेख़ुदी में पी रहे हैं …

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Posted on June 14, 2020 at 9:00pm — 17 Comments

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At 6:21pm on March 9, 2020, Samar kabeer said…

जनाब अमीरुद्दीन साहिब,ओबीओ पर आपका स्वागत है,मैं हर ख़िदमत के लिए हाज़िर हूँ ।

 
 
 

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