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अमीरुद्दीन 'अमीर'
  • Male
  • बाग़पत, उत्तर प्रदेश.
  • India
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अमीरुद्दीन 'अमीर''s Friends

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अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (वो नज़र जो क़यामत की उठने लगी)
"सभी रचनाकारों और उस्तादों से विनम्र निवेदन है कि इस ग़ज़ल या मेरी किसी भी रचना को बिल्कुल भी एक आदर्श उदाहरण के तौर पर भले ही न लिया जाए लेकिन जब कभी भी किसी की रचना पर टिप्पणी करें या उसका क्रिटिकल एनालिसिस (विश्लेषण) करें तो रचनाकार की भावनाओं को…"
Thursday
Nilesh Shevgaonkar commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (वो नज़र जो क़यामत की उठने लगी)
"आ. अमीर साहब, अपनी ग़ज़ल के पक्ष में किसी उस्ताद शाइर की दलील दे सकें तो बेहतर होगा.. अन्यथा आप जैसा उचिल मानें.सादर (अंतिम टिप्पणी)जो भी नए रचनाकार इस बहस को पढ़ें,, वो यह ध्यान रखें कि ग़ज़ल ऐसे न कही  जाए.."
Wednesday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (वो नज़र जो क़यामत की उठने लगी)
"आ. नीलेश 'नूर' जी, आपका कहना है कि  "इस मंच की परिपाटी है कि सदस्यों की रचनाओं का क्रिटिकल एनालिसिस होता है और इसी परम्परा के तहत आ. समर साहब ने और बाद में मैंने भी अपने सीमित ज्ञान के अनुसार आप की रचना को बेहतर करने का प्रयास…"
Wednesday
Nilesh Shevgaonkar commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (वो नज़र जो क़यामत की उठने लगी)
"आ. अमीरुद्दीन अमीर साहब, "आप किसी पूर्वाग्रह से ग्रस्त हैं तभी तो येन केन प्रकारेण आपका उद्देश्य सिर्फ मुझे नीचा दिखाना प्रतीत होता है," आपकी यह टिप्पणी आपकी ग़ज़ल के मतले की तरह दोषपूर्ण है अत: मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा. आप को मानना…"
Tuesday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (वो नज़र जो क़यामत की उठने लगी)
"आदरणीय जनाब नीलेश 'नूर' साहिब, ऐसा लगता है कि आप किसी पूर्वाग्रह से ग्रस्त हैं तभी तो येन केन प्रकारेण आपका उद्देश्य सिर्फ मुझे नीचा दिखाना प्रतीत होता है, अगर ऐसा नहीं होता तो अपने लिये और मेरे लिये अलग अलग मानदण्ड स्थापित नहीं करते, ज़रा…"
Monday
Nilesh Shevgaonkar commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (वो नज़र जो क़यामत की उठने लगी)
"आ. अमीरुद्दीन "अमीर" साहब,अधिक विस्तार के लिए http://www.openbooksonline.com/group/gazal_ki_bateyn/forum/topics/5170231:Topic:282903 लिंक पढ़ें अथवा होम पेज पर नीचे काफ़िया पढ़ें सादर "
Monday
Nilesh Shevgaonkar commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (वो नज़र जो क़यामत की उठने लगी)
"आ. अमीरुद्दीन "अमीर" साहब,ग़ज़ल मतले से शरुअ होती है और अगर मतले में ही दोष नज़र आ जाए तो आगे बढ़ा नहीं जाता.. जिस गाडी का इंजन स्टार्ट न होता हो, उस में लम्बी यात्रा का प्लान कम से कम मैं नहीं करता.. और फिर ऐसी गाड़ी के इंटीरियर, फीचर्स आदि की…"
Monday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post अतुकांत : अमावस की कविता (गणेश बाग़ी)
"आदरणीय जनाब गणेशजी बागी जी आदाब, बहुत ही ख़ूबसूरत कविता का सृजन हुआ है बधाई स्वीकार करें।  महोदय शायद टंकण त्रुटि के कारण प्रफुल्लित शब्द ग़लत टाईप हो गया है। सादर। "
Sunday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Harash Mahajan's blog post लौटकर शख्स मेरे दर पे यूँ आया होगा
"आदरणीय जनाब हर्ष महाजन जी आदाब, वाह क्या पर्वाज़ है ग़ज़ल का हर एक शे'र ज़बरदस्त तख़य्युलात पेश करता है, शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ। मगर कुछ सुझाव भी पेश करना चाहता हूँ : "लौटकर शख्स मेरे दर पे यूँ आया…"
Sep 13
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (वो नज़र जो क़यामत की उठने लगी)
"आदरणीय नीलेश "नूर" साहिब आदाब अर्ज़ करता हूँ। मुहतरम आप ख़ाक़सार की ग़ज़ल पर तशरीफ़ लाए ये मेरे लिए बाइस-ए-मसर्रत है आप सुख़न-ओ-तहज़ीब का गहवारा हैं, मुहतरम समर कबीर साहिब भी आपकी ग़ज़लों के मिसरों पर तरही ग़ज़ल कह चुके हैं मगर मुहतरम,…"
Sep 13
Nilesh Shevgaonkar commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (वो नज़र जो क़यामत की उठने लगी)
"आ. अमीरुद्दीन साहब, इतनी लंबी बहस से बेहतर होता कि आप क़वाफी दुरुस्त कर लेते। आपके क़वाफी में "ने" स्थायी है अतः वो रदीफ़ का हिस्सा बन गया है। अब इसे हटा कर उठ और गिर में क्या राइमिंग है ये आप स्वयं तय कर सकते हैं। सादर"
Sep 12
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (वो नज़र जो क़यामत की उठने लगी)
"मुहतरम जनाब हर्ष महाजन जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई के लिये बहुत बहुत शुक्रिया।  जनाब इसमें कोई शक नहीं कि स्वस्थ परिचर्चा से बहुत कुछ सीखने को मिलता है आदरणीय, इस मंच की यही ख़ूबसूरती है। "
Sep 12
Harash Mahajan commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (वो नज़र जो क़यामत की उठने लगी)
"पहले टिप्पणी फिर परिचर्चा बेहद खूबसूरत । आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' जी आदाब । आपकी ग़ज़ल बहुत ही उम्दा लगी । सबसे पहले तो मेरी जानिब से वहुत बहुत बधाई । गुणीजनों की रचनाओं से हमेशां आत्मसात करने को मिल ही जाता है । आपकी इस पेशकश से भी बहुत कुछ…"
Sep 12
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (वो नज़र जो क़यामत की उठने लगी)
"//भाई, मैं कोई उस्ताद नहीं हूँ, मह्ज़ ओबीओ का एक ख़ादिम हूँ....... // जनाब हमने आप ही को उस्ताद तस्लीम किया है और उम्मीद करते हैं कि आप भी हमें शागिर्द तस्लीम करेंगे।  सादर। "
Sep 12
सालिक गणवीर commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (वो नज़र जो क़यामत की उठने लगी)
"मुहतरम समर कबीर साहिब. आदाब जनाब ये आपका बड़प्पन है, आप हमें भले आपका शागिर्द न माने लेकिन हम तो आपको अपना उस्ताद मानते हैं आदरणीय."
Sep 12
Samar kabeer commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (वो नज़र जो क़यामत की उठने लगी)
"//मेरे और ओ बी ओ के सभी शाइरी के तालिब-इल्मों के उस्ताद जनाब समर कबीर साहिब ही हैं// भाई, मैं कोई उस्ताद नहीं हूँ, मह्ज़ ओबीओ का एक ख़ादिम हूँ, एक बात हमेशा ध्यान में रखें कि ओबीओ पर उस्ताद शागिर्द की कोई परिपाटी है ही नहीं,यहाँ सभी सदस्यों को अपनी…"
Sep 12

Profile Information

Gender
Male
City State
BAGHPAT , UTTAR PRADESH.
Native Place
BARAUT
Profession
Private job
About me
उर्दु शायरी हिन्दी में लिखने और पढ़ने का शौक़ है॥

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ग़ज़ल (वो नज़र जो क़यामत की उठने लगी)

फ़ाइलुन -फ़ाइलुन - फ़ाइलुन -फ़ाइलुन

2 1 2 - 2 1 2 - 2 1 2 - 2 1 2



वो नज़र जो क़यामत की उठने लगी 

रोज़ मुझपे क़हर बनके गिरने लगी

रोज़ उठने लगी लगी देखो काली घटा

तर-बतर ये ज़मीं रोज़ रहने लगी

जबसे तकिया उन्होंने किया हाथ पर

हमको ख़ुद से महब्बत सी रहने लगी

एक ख़ुशबू जिगर में गई है उतर

साँस लेता हूँ जब भी महकने…

Continue

Posted on September 12, 2020 at 2:27pm — 34 Comments

ग़ज़ल (किसी की याद में...)

1212 - 1122 - 1212 - (112 / 22) 

किसी की याद में ख़ुद को भुला के देखते हैं

निशान ज़ख्मों  के हम  मुस्कुरा के देखते हैं 

 

निकल तो आए हैं तूफ़ाँ की ज़द से दूर बहुत 

भँवर हैं कितने ही जो सर उठा के देखते हैं 

चले भी आओ कि अब इंतज़ार होता नहीं 

कि अब ये रस्ते हमें मुँह चिढ़ा के देखते हैं  

ये ज़िन्दगी भी फ़ना कर दी हमने जिनके लिए 

वही  तो  हैं  जो   हमें  आज़मा के  देखते  हैं  

मिटा दिए हैं…

Continue

Posted on August 22, 2020 at 5:00pm — 12 Comments

ग़ज़ल (मौत की दस्तक है क्या...)

2122 / 2122 / 2122 / 212

हो रही है  दिल पे खट-खट मौत की दस्तक  है क्या 

जा रहे वापस या उसके क़दमों की ठक-ठक है क्या

फिर उठा  है  हर तरफ़  ये इक धुआँ सा आज क्यों

आग जिससे घर जला था बढ़ गई दिल तक है क्या

भूल   बैठा   है  मुझे   तू   सुन  के  या   अन्जान  है

मेरी आहों  की  रसाई  आज  भी  तुझ  तक  है क्या

गुम हुआ  हूँ जबसे  मैं  उसके  ख़याल-ओ-ख़्वाब में

बोलता हूँ जब भी कुछ ये सुनता हूंँ बक-बक है…

Continue

Posted on August 20, 2020 at 6:06pm — 16 Comments

नग़्मा (आप यूँ ही अगर हमसे रूठे रहे)

आप यूँ ही अगर हमसे रूठे रहे 

एक आशिक़ जहाँ से गुज़र जाएगा 

ऐसी बातें करोगे अगर आप तो

ग़म का मारा ये दिल कुछ भी कर जाएगा

आप यूँ ही अगर... 

कैसी नाराज़गी है ओ जान-ए-वफ़ा

मुझसे क्या हो गई भूल कुछ तो बता 

हाय कुछ तो बता 

आप ख़ुद ही समझ लेंगे इक रोज़ ये

जब ख़ुमार आपका ये उतर जाएगा

आप यूँ ही अगर...

तेरे वादों पे हम कर यक़ीं लुट गए

तेरी भोली सी सूरत पे क्यूँ मिट गए

हाय क्यूँ मिट गए

मर…

Continue

Posted on July 22, 2020 at 6:30pm — 5 Comments

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At 6:21pm on March 9, 2020, Samar kabeer said…

जनाब अमीरुद्दीन साहिब,ओबीओ पर आपका स्वागत है,मैं हर ख़िदमत के लिए हाज़िर हूँ ।

 
 
 

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