For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष
Share

नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष's Groups

 

नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष's Page

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष's blog post गृहस्थ
"आ. नवीन जी, सुंदर रचना हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
Nov 25, 2018
Samar kabeer commented on नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष's blog post गृहस्थ
"जनाब नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष जी आदाब,ओबीओ पटल पर पहली बार आपकी रचना से रूबरू हो रहा हूँ । आल्हा वीर छन्द पर अच्छी रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Nov 19, 2018
नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष posted a blog post

गृहस्थ

छंद-आल्हा/वीर, बृज मिश्रित-------------------------जय जय जय भगवती भवानीकृपा कलम पर रखियो मातआज पुनः लिख्यौ है आल्हाजामै चाहूँ तेरौ साथमहावीर बजरंगी बालाइष्टदेव मन ध्यान लगायनिज विचार गृहस्थ पर मेरेआल्हा में भर रह्यो सुनायनर नारी दोनों ही साधकसर्जन पालन जिनकौ कामएकम एक बनौ मिल गृहस्थकठिन साधना बारौ नामबात कहूँ गृहस्थ की पहलीरखो बंधुवर जाकौ ध्याननहीं बुराई करौ नारि कीजातै जुडौ आपकौ मानएक अकेले में चल जावैभरी भीर में दीजौ ध्याननारि सोचती है कछु ज्यादाकरियौ वही करे गुणगानबात दूसरी मर्यादा कीभूले ते…See More
Nov 19, 2018
नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष joined Admin's group
Thumbnail

भारतीय छंद विधान

इस समूह में भारतीय छंद शास्त्रों पर चर्चा की जा सकती है | जो भी सदस्य इस ग्रुप में चर्चा करने के इच्छुक हों वह सबसे पहले इस ग्रुप को कृपया ज्वाइन कर लें !See More
Nov 18, 2018
नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष joined Admin's group
Thumbnail

हिंदी की कक्षा

हिंदी सीखे : वार्ताकार - आचार्य श्री संजीव वर्मा "सलिल"
Nov 18, 2018
नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष joined Admin's group
Thumbnail

आंचलिक साहित्य

यहाँ पर आंचलिक साहित्य की रचनाओं को लिखा जा सकता है |See More
Nov 18, 2018
नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

भजन : रट लै रट लै हरि कौ नाम ,प्राणी भव तर जायगौ

रट लै रट लै हरी कौ नाम, प्राणी भव तर जायेगौरे प्राणी भव तर जायेगो, तेरो जनम सुधर जायेगौरट लै रट लै हरि कौ......बड़े जतन तन मानुस पायौमोहपाश में समय गँवायौकोउ न आवै काम अंत में, रे जब ऊपर जायेगौरट लै रट लै हरि कौ नाम, प्राणी भव तर जायेगौपाँच गुणन की काया प्यारीमल मल काया गयी निखारीचले साथ प्राणन के बल पे, रे पीछे मर जायेगौरट लै रट लै हरी कौ नाम, प्राणी भव तर जायगौसब प्राणिन की है ई नगरीकर्मन ते भर जीवन गगरीपाप पुण्य पावै तू बूही,हाथन कर जायेगौरट लै तट लै हरी कौ नाम,प्राणी भव तर जायेगौपर पीरा कूँ…See More
Aug 21, 2018
नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष joined Admin's group
Thumbnail

धार्मिक साहित्य

इस ग्रुप मे धार्मिक साहित्य और धर्म से सम्बंधित बाते लिखी जा सकती है,See More
Aug 21, 2018

Profile Information

Gender
Male
City State
राजस्थान
Native Place
बयाना
Profession
अकाउंटेंट
About me
हिंदी साहित्य प्रेमी

नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष's Blog

गृहस्थ

छंद-आल्हा/वीर, बृज मिश्रित

-------------------------

जय जय जय भगवती भवानी

कृपा कलम पर रखियो मात

आज पुनः लिख्यौ है आल्हा

जामै चाहूँ तेरौ साथ
महावीर बजरंगी बाला

इष्टदेव मन ध्यान लगाय

निज विचार गृहस्थ पर मेरे

आल्हा में भर रह्यो सुनाय
नर नारी दोनों ही साधक

सर्जन पालन जिनकौ काम

एकम एक बनौ मिल गृहस्थ

कठिन साधना बारौ नाम
बात कहूँ गृहस्थ की पहली

रखो बंधुवर जाकौ ध्यान

नहीं बुराई करौ नारि की

जातै जुडौ…
Continue

Posted on November 18, 2018 at 5:00pm — 2 Comments

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Surkhab Bashar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आली जनाब बलराम धाकड़ साहब आदाब बहुत बहुत  शुक्रिया आपने मुझ ख़ाक सार की ग़ज़ल  आपने पसंद…"
5 minutes ago
anjali gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आदरणीय Balram Dhakar जी ,हौसला अफ़ज़ाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया"
6 minutes ago
anjali gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आदरणीय बासुदेव जी , ग़ज़ल में शिरक़त और हौसला अफ़ज़ाई के लिए तहेदिल से शुक्रिया"
7 minutes ago
anjali gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आदरणीय mirza javed beig जी ,हौसला अफ़ज़ाई के लिए दिली शुक्रिया"
8 minutes ago
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आदरणीय लक्ष्मण जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर प्रस्तुति । हार्दिक बधाई स्वीकार करें। सादर।"
35 minutes ago
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आदरणीया अंजलि जी, सादर अभिवादन। ग़ज़ल के सभी अशआर ख़ूबसूरत हुए हैं। दाद के साथ मुबारक़बाद क़ुबूल…"
38 minutes ago
Md. anis sheikh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"सोचते रह गए हम हौसला कर जाना था  आग के दरिया में हमको भी उतर जाना था | क्यूँ बग़ावत नहीं की…"
40 minutes ago
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आदरणीय दिगंबर जी, सादर अभिवादन। ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है। हार्दिक बधाई स्वीकार करें। सादर।"
41 minutes ago
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"जनाब तस्दीक़ साहब, सादर अभिवादन। ग़ज़ल के सभी अशआर बहुत खूबसूरत हुए हैं। इस सुन्दर ग़ज़ल के लिए शेर दर…"
48 minutes ago
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आदरणीय सुरेंद्र जी, सादर अभिवादन। इस बहुत खूबसूरत प्रस्तुति पर हृदयतल से बधाई स्वीकार करें। सादर।"
50 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन । गजल पर सिरकत , स्नेह व मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार । इंगित कमियों…"
52 minutes ago
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"जनाब सुरख़ाब साहब, आदाब। यूँ तो सभी शेर क़ाबिले दाद हुए हैं ग़ज़ल में लेकिन, ख़ार ही ख़ार नज़र आये हमें…"
55 minutes ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service