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नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष's blog post गृहस्थ
"आ. नवीन जी, सुंदर रचना हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
Nov 25
Samar kabeer commented on नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष's blog post गृहस्थ
"जनाब नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष जी आदाब,ओबीओ पटल पर पहली बार आपकी रचना से रूबरू हो रहा हूँ । आल्हा वीर छन्द पर अच्छी रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Nov 19
नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष posted a blog post

गृहस्थ

छंद-आल्हा/वीर, बृज मिश्रित-------------------------जय जय जय भगवती भवानीकृपा कलम पर रखियो मातआज पुनः लिख्यौ है आल्हाजामै चाहूँ तेरौ साथमहावीर बजरंगी बालाइष्टदेव मन ध्यान लगायनिज विचार गृहस्थ पर मेरेआल्हा में भर रह्यो सुनायनर नारी दोनों ही साधकसर्जन पालन जिनकौ कामएकम एक बनौ मिल गृहस्थकठिन साधना बारौ नामबात कहूँ गृहस्थ की पहलीरखो बंधुवर जाकौ ध्याननहीं बुराई करौ नारि कीजातै जुडौ आपकौ मानएक अकेले में चल जावैभरी भीर में दीजौ ध्याननारि सोचती है कछु ज्यादाकरियौ वही करे गुणगानबात दूसरी मर्यादा कीभूले ते…See More
Nov 19
नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष joined Admin's group
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हिंदी की कक्षा

हिंदी सीखे : वार्ताकार - आचार्य श्री संजीव वर्मा "सलिल"
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Nov 18
नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
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भजन : रट लै रट लै हरि कौ नाम ,प्राणी भव तर जायगौ

रट लै रट लै हरी कौ नाम, प्राणी भव तर जायेगौरे प्राणी भव तर जायेगो, तेरो जनम सुधर जायेगौरट लै रट लै हरि कौ......बड़े जतन तन मानुस पायौमोहपाश में समय गँवायौकोउ न आवै काम अंत में, रे जब ऊपर जायेगौरट लै रट लै हरि कौ नाम, प्राणी भव तर जायेगौपाँच गुणन की काया प्यारीमल मल काया गयी निखारीचले साथ प्राणन के बल पे, रे पीछे मर जायेगौरट लै रट लै हरी कौ नाम, प्राणी भव तर जायगौसब प्राणिन की है ई नगरीकर्मन ते भर जीवन गगरीपाप पुण्य पावै तू बूही,हाथन कर जायेगौरट लै तट लै हरी कौ नाम,प्राणी भव तर जायेगौपर पीरा कूँ…See More
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धार्मिक साहित्य

इस ग्रुप मे धार्मिक साहित्य और धर्म से सम्बंधित बाते लिखी जा सकती है,See More
Aug 21

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Male
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राजस्थान
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बयाना
Profession
अकाउंटेंट
About me
हिंदी साहित्य प्रेमी

नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष's Blog

गृहस्थ

छंद-आल्हा/वीर, बृज मिश्रित

-------------------------

जय जय जय भगवती भवानी

कृपा कलम पर रखियो मात

आज पुनः लिख्यौ है आल्हा

जामै चाहूँ तेरौ साथ
महावीर बजरंगी बाला

इष्टदेव मन ध्यान लगाय

निज विचार गृहस्थ पर मेरे

आल्हा में भर रह्यो सुनाय
नर नारी दोनों ही साधक

सर्जन पालन जिनकौ काम

एकम एक बनौ मिल गृहस्थ

कठिन साधना बारौ नाम
बात कहूँ गृहस्थ की पहली

रखो बंधुवर जाकौ ध्यान

नहीं बुराई करौ नारि की

जातै जुडौ…
Continue

Posted on November 18, 2018 at 5:00pm — 2 Comments

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