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डॉ छोटेलाल सिंह
  • Varanasi, Uttar Pradesh
  • India
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डॉ छोटेलाल सिंह commented on Sushil Sarna's blog post अपने दोहे .......
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डॉ छोटेलाल सिंह commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (दिलों से ख़राशें हटाने चला हूँ )
"आदरणीय अमीर साहब जी बहुत ही सुंदर रचना दिली मुबारकबाद कुबूल कीजिए"
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डॉ छोटेलाल सिंह commented on नाथ सोनांचली's blog post विदाई के वक़्त बेटी के उद्गार
"आदरणीय सोनांचली जी इस आकर्षक रचना के लिए बहुत बहुत बधाई, शेष परमादरणीय गुरुदेव समर साहब की बातों पर अमल करें।"
14 hours ago
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-132
"उत्साहवर्धन के लिए सादर आभार आदरणीय श्रीवास्तव जी"
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डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-132
"सादर अभिवादन आदरणीय आपने बहुत ही सुंदर लिखा सादर शुभकामनाएं"
yesterday
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-132
"गज़ल जगत में कहीं कुछ हमारा न होताजो माता पिता का सहारा न होता ये सूरत किसी भी लायक न होतीअगर भोली माँ ने सँवारा न होता उठाती न पीड़ा उदर में अगर माँकभी पाँव मैंने पसारा न होता लगाती न टीका कभी भाल पर माँकहीं इस नज़र का नज़ारा न होता सदन में ये…"
yesterday
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"बहुत लाजबाब गजल हुई आदरणीय सादर शुभकामनाएं"
Jun 26
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"बहुत अच्छी गज़ल हुई आदरणीय सादर बधाई क़ुबूल कीजिए"
Jun 26
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आदरणीय आजमी जी कितनी भी प्रशंसा करूँ कम है आपकी गज़ल में बहुत दम है सादर शुभकामनाएं क़ुबूल करें"
Jun 25
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले साहब सादर अभिवादन अति प्रशंसनीय गज़ल इस सुंदर सार्थक संदेशप्रद गज़ल के लिए दिली मुबारकबाद देता हूँ"
Jun 25
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आदरणीय दिनेश कुमार जी बहुत बेहतरीन गज़ल एक से बढ़कर एक शेर वाह जी वाह दिली मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए"
Jun 25
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आदरणीया राजेश कुमारी जी बेहतरीन गज़ल के लिए सादर शुभकामनाएं क़ुबूल कीजिए"
Jun 25
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आदरणीय संजय शुक्ला जी बेहतरीन गज़ल के लिए सादर शुभकामनाएं"
Jun 25
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आदरणीय सुरेंद्र इंसान जी बहुत बढ़िया गज़ल हुई सादर बधाई स्वीकार करें"
Jun 25
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आदरणीय तनहा जी बेहतरीन गज़ल के लिए सादर शुभकामनाएं क़ुबूल कीजिए"
Jun 25
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आदरणीय गुरुदेव रवि सर जी आपका जबाब नहीं शेर दर शेर मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए सादर"
Jun 25

Profile Information

Gender
Male
City State
Varanasi
Native Place
Varanasi
Profession
Teacher
About me
I am a hindi lecturer in karra intercollege Jaunpur Uttar Pradesh

डॉ छोटेलाल सिंह's Blog

परम पावनी गंगा

चन्द्रलोक की सारी सुषमा, आज लुप्त हो जाती है।

लोल लहर की सुरम्य आभा, कचरों में खो जाती है

चाँदी जैसी चंचल लहरें, अब कब पुलकित होती हैं

देख दुर्दशा माँ गंगा की, हरपल आँखे रोती हैं।

बस कागज पर निर्मल होती, मीठी-मीठी बातों से।

कल्पनीय चपला जस शोभित, होती हैं सौगातों से।

व्यथित सदा ही गंगा होती, मानव के संतापों से।

फिर कैसे वह मुक्त करेगी, उसे भयंकर पापों से।

एक समय था गंगा लहरें, उज्ज्वल रूप दिखाती थी।

धवल मनोहर रात चाँदनी, गंगा…

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Posted on June 1, 2020 at 5:45pm — 5 Comments

श्रमजीवी

श्रमिक दिवस पर श्रमजीवी को आओ शीश झुकाएँ।

बलाक्रान्त शोषित निर्बल को मिलकर सभी बचाएँ।

दुरित दैन्य दुख झेल रहे हैं

सदा मौत से खेल रहे हैं।

तृषा तपन पावस तुसार सह

जीवन नौका ठेल रहे हैं।

हर सुख से जो सदा विमुख हो उस पर बलि-बलि जाएँ।

निर्मित जो करता नवयुग तन,उसे नहीं ठुकराएँ।

आजीवन कटु गरल पी रहे

दुर्धर जीवन सभी जी रहे।

हाँफ-हाँफ कर विदीर्ण दामन

जीने के हित सदा सी रहे।

कर्म निरत गुरु गहन श्रमिक…

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Posted on May 1, 2020 at 11:30am — 8 Comments

नव विहान (नवगीत)

नव विहान का गीत मनोहर गाता चल।

जीवन में मुस्काता चल।।

मन मराल को कभी मनोहत मत करना ।

हो कण्टक परिविद्ध तनिक भी ना डरना।

गम को भूल सभी से नेह लगाता चल।

जीवन में मुस्काता चल।।

वैर भाव की ये खाई पट जाएगी।

वर्गभेद तम की बदली छँट जाएगी।

बनकर मयार मधुत्व रस छलकाता चल।

जीवन में मुस्काता चल।।

महदाशा रख मर्ष भाव अंतर्मन में

जानराय बन ओज जगाओ जनजन में।

हो भवितव्य पुनर्नव राह बनाता चल।

जीवन में मुस्काता…

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Posted on January 1, 2020 at 1:00pm — 8 Comments

आक्रोश

प्रतिदिन बढ़ता जा रहा, सामूहिक दुष्कर्म

क्रूर दरिन्दे भेड़िये, क्या जाने सत्कर्म।।1

जाएँ तो जाएँ किधर, चहुँ दिशि लूट खसोट

दानव सदा कुकर्म के, दिल पर करते चोट।।2

आये दिन ही राह में, होता अत्याचार।

छुपे हुए नर भेड़िये, करते रोज़ शिकार।।3

हवसी नर जो कर रहा, सारी सीमा पार।

सरेआम हैवान को, अब दो गोली मार।।4

शैतानों की चाल से, बढ़े रोज व्यभिचार।

रोम-रोम विचलित हुआ, सुनकर चीख पुकार।।5

खूनी पंजे कर रहे,…

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Posted on December 3, 2019 at 7:30am — 4 Comments

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At 11:31am on September 29, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय डॉ. छोटेलाल सिंह जी समय देकर ग़ज़ल तक आने का और हौसला अफ़जाई का बहुत बहुत शुक्रिया
At 1:24pm on August 16, 2019, TEJ VEER SINGH said…

जन्मदिन की हार्दिक बधाई आदरणीय डॉ छोटे लाल सिंह जी।

 
 
 

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