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सतविन्द्र कुमार राणा
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  • India
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सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"हम इस दुख की घड़ी में योगराज सर और उनके परिवार के साथ हैं, ईश्वर इस दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करे व दिवंगत आत्मा को स्वचरणों में स्थान दें!"
Jan 17
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-122
"दीदी मात्राएं तो ठीक हैं, रोला छंद के सम चरण समकल (द्विकल, चौकलआदि) से समाप्त होते हैं, यही पढ़ा है हमने। चूँकि कुण्डलिया छंद में पहला भाग दोहा तो दूसरा रोला छंद है। इसलिए इसका अंत रोला छंद का भी अंतिम चरण है, इसलिए मैनें जिज्ञासा व्यक्त की।"
Dec 13, 2020
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-122
"सादर आभार आदरणीया प्रतिभा दीदी"
Dec 13, 2020
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-122
"सादर नमन आदरणीया प्रतिभा दीदी, उत्तम कुण्डलिया हुई है। रोला छंद का चरणान्त 12 से हो सकता है?"
Dec 13, 2020
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-122
"सादर नमन आदरणीय, उत्तमाभिव्यक्ति!"
Dec 13, 2020
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-122
"न अपना हाल ही देखा न घर देखा,कि जब भी देखा हमने बस सफर देखा। लगा है ज़ोर रोटी को कमाने में,न उसको चैन से ही तोड़कर देखा। सियासत में रहा हूँ मैं सदा जुमला,सियासतदान के जो होठों पर देखा। जिसे भी मैं समझता साथ है मेरे,बदल जाती है बामौक़े नज़र देखा। कलम…"
Dec 13, 2020
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Saurabh Pandey's discussion ओबीओ परिवार के युवा साहित्यकार अरुन अनन्त की दैहिक विदाई
"ओह्ह दुःखद! विनम्र श्रद्धांजलि"
Oct 17, 2020
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-119
"आदरणीया सुनन्दा जी, मनोहारी रचना हुई है। बहुत-बहुत बधाई"
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सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-119
"आदरणीय बासुदेव जी बढ़िया गजल हुई है, हार्दिक बधाई।  गमाने शायद गंवाने है, सादर"
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सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-119
"आदरणीय सुरेन्द्रनाथ भाई जी, हर छन्द वास्तविक कथा कहता है। हार्दिक बधाई"
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सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-119
"आदरणीय डॉ साहब, सुन्दर चित्रण। हार्दिक बधाई"
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"आदरणीय ओमप्रकाश सर,  बहुत बढ़िया प्रस्तुति हुई है। सादर बधाई"
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"आदरणीय अजय भाई, बहुत-बहुत आभार"
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"आदरणीय ओम प्रकाश क्षत्रिय सर, सादर हार्दिक आभार नमन"
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"आदरणीय अखिलेश जी, सादर वंदन सह आभार"
Sep 13, 2020

Profile Information

Gender
Male
City State
करनाल हरियाणा
Native Place
गाँव व डाक बालराजपूतान
Profession
अध्यापक
About me
I am a simple person living simply.I have interests in reading,movies and enjoy these timely.try to write somthings when there is time to do so.Believe in nationalism as an ideology.

सतविन्द्र कुमार राणा's Blog

खुद को पा लेने की घड़ी होगी- गजल

2122 1212 22

खुद को पा लेने की घड़ी होगी,

वो मयस्सर मुझे कभी होगी।

हाथ से हाथ को छू लेने से

दिल की सिलवट भी खुल गयी होगी।

याद लिपटी है उसकी चादर-सी,

देह लाज़िम मेरी तपी होगी।

उसके बिन मैं सँभल चुका हूँ अब,

मस्त उसकी भी कट रही होगी।

बोल ज्यादा मगर सभी मीठे,

आज भी वैसे बोलती होगी?

तब शरारत ढकी थी चुप्पी में,

आज भी उसको ढाँपती होगी।

दिल में कोई चुभन हुई मेरे,…

Continue

Posted on July 24, 2020 at 12:00am — 4 Comments

छोड़ दो काफ़ी सियासत हो गयी है

2122 2122 2122

.

जानते हैं तुम में ताकत हो गयी है,

और किस-किस पे ये आफत हो गयी है।

झूठ है जो, झूठ बिन कुछ भी नहीं, पर

अब जमाने में सदाक़त हो गयी है।

जब चमन का फूल होने का भरो दम,

क्यों चमन से ही अदावत हो गयी है?

जिस्म पर ठंडा लबादा, आग मुँह में,

जिसने रक्खे उसकी शुहरत हो गयी है।

कौम के अच्छे की खातिर काम हो अब,

छोड़ दो काफ़ी सियासत हो गयी है।

हर खुशी पर, मेरी बोलो तो भला क्यों,…

Continue

Posted on January 2, 2020 at 12:00pm — 14 Comments

तेरा होना मेरा सर्जन है

मैं बीज पड़ा तेरे आँगन में

तेरी आर्द्रता से अंकुरण है

ये तन पौध बना फिर देख बढ़ा

तेरा होना मेरा सर्जन है।

कल-कल बहती हैं नदियाँ तुझ पर

मीठे-मीठे गीत सुनातीं हैं

जीवन को सींच रही हैं पल-पल

हरियाली को लेकर आतीं हैं

नित चलती पथ पर ये बिना रुके

आगे को ही बढ़ती जातीं हैं

बाधाओं को पार करें कैसे

ऐसा सबको पाठ पढ़ातीं हैं।

फिर मीत सिंधु के जा साथ मिलें

दिख जाता क्या प्रेम समर्पण है?

ये तन पौध बना फिर देख बढ़ा…

Continue

Posted on November 2, 2019 at 11:00am — 2 Comments

नहीं अच्छा है यूँ मजबूर होना- ग़ज़ल

1222 1222 122
नहीं अच्छा है यूँ मजबूर होना
दिखो नजदीक लेकिन दूर होना।

कली का कुछ समय को ठीक है, पर
नहीं अच्छा चमन, मगरूर होना।

अँधेरों में उजालों को दे रस्ता
चिरागों का न थकना चूर होना

कोई कहता इसे वरदान है ये
खले लेकिन किसी को हूर होना।

अभी सूखा नहीं रख ले तसल्ली
दिखेगा ज़ख्म का नासूर होना।

कदम तो चूम लेगी जीत तेरे
है बाकी बस तुझे मंजूर होना।

मौलिक अप्रकाशित

Posted on September 20, 2019 at 2:00pm — 2 Comments

Comment Wall (8 comments)

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At 6:46am on July 2, 2018, राज़ नवादवी said…

"आदरणीय सतविन्द्र कुमार राणा  साहब, तरही मुशायरे में मेरी ग़ज़ल में शिरकत का दिल से शुक्रिया. समयाभाव था, कमेंट बॉक्स बंद हो चुका है. इसलिए यहाँ से आभार प्रकट कर रहूँ हूँ.सादर "

At 7:34am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
आदरणीय सतविंदर भाई ये मार्गदर्शन आपके द्वारा ही दिया गया है। हार्दिक आभार ।
At 7:41am on January 27, 2016, Omprakash Kshatriya said…
बहुतबहुत शुक्रिया आप का आदरणीय सतविंदर कुमार जी . आप ने मेरा जन्म दिन याद रख कर मुझे अमूल्य/अतुल्य शुभकामनाएं दी. इस हेतु मैं आप का आजीवन ऋणी रहूंगा .
At 8:46pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर शुभकामनाएं!
At 6:59pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 7:16pm on December 18, 2015, सतविन्द्र कुमार राणा said…
बहुत बहुत आभार आदरणीयEr Ganesh Jee Bagi सर।
At 7:54pm on December 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सतविंदर कुमार जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:59am on October 2, 2015,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

भाई सतविंदरजी, 

आपका हार्दिक धन्यवाद कि आपको मेरी विवेचना तोषकारी लगी है.

आप किसी आयोजन या इवेण्ट पर अपनी भावनाएँ उसी थ्रेड में पोस्ट किया करें. यदि आपने अपना धन्यवाद ज्ञापन संकलित लघुकथाओं के पोस्ट में ही किया होता या अब भी कर दें तो यह अधिक उचित होगा.

पुनः धन्यवाद, भाईजी

 
 
 

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