For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

बसंत कुमार शर्मा
  • Male
  • जबलपुर, मध्यप्रदेश
  • India
Share

बसंत कुमार शर्मा's Friends

  • santosh khirwadkar
  • रोहित डोबरियाल "मल्हार"
  • Prakash Chandra Baranwal
  • Samar kabeer
  • C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"

बसंत कुमार शर्मा's Groups

 

बसंत कुमार शर्मा's Page

Latest Activity

Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post पीपल वाला गाँव नहीं है-ग़ज़ल
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें । 'दिखते हैं कुछ पेड़ मगर' ये मिसरा बह्र में नहीं देखिये । 'यदि जमीन पर पाँव नहीं है' इस मिसरे में 'ज़मीन' की जगह "धरती" शब्द उचित होगा…"
22 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post पीड़ा के दोहे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
" आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सादर नमस्कार , लाजबाब दोहे आपके  उस पर करती  रात - दिन, मँहगाई पथराव।३। लाजबाब **"
yesterday
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post पीपल वाला गाँव नहीं है-ग़ज़ल
"आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सादर नमस्कार - आपकी हौसलाअफजाई को सादर नमन "
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post पीपल वाला गाँव नहीं है-ग़ज़ल
"आ. भाई बसंत जी, सादर अभिवादन । उत्तम गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Thursday
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

पीपल वाला गाँव नहीं है-ग़ज़ल

मापनी 22 22 22 22पंछी को अब ठाँव नहीं है,पीपल वाला गाँव नहीं है.   दिखते हैं कुछ पेड़ मगर,उनके नीचे छाँव नहीं है. लाती जो पिय का संदेशा, कागा की वह काँव नहीं है   मुश्किल है कैसे सँभलोगे, यदि जमीन पर पाँव नहीं है.   राह प्रेम की सीधी -सादी,  चलता उल्टा दॉंव नहीं है."मौलिक एवं अप्रकाशित"See More
Thursday
बसंत कुमार शर्मा commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post लोटा है साँप फिर से जो उसके कलेजे पर - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"आदरणीय सादर नमस्कार, बहुत खूब ग़ज़ल कही आपने बधाई स्वीकारें "
Thursday
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ले के खाली गिलास बैठे हैं- ग़ज़ल - बसंत
"आदरणीय Shyam Narain Verma जी सादर नमस्कार , आपकी हौसलाअफजाई  के लिए शुक्रिया "
May 11
TEJ VEER SINGH commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ले के खाली गिलास बैठे हैं- ग़ज़ल - बसंत
"हार्दिक बधाई आदरणीय  बसंत कुमार शर्मा जी ।बहुत बढ़िया गज़ल। दोस्त जो आसपास बैठे हैं, जाने क्यों सब उदास बैठे हैं    सोचते हैं कि कोई आएगा,  ले के खाली गिलास बैठे हैं. "
May 8
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ले के खाली गिलास बैठे हैं- ग़ज़ल - बसंत
"आ. भाई बसंत जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
May 8
Awanish Dhar Dvivedi commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ले के खाली गिलास बैठे हैं- ग़ज़ल - बसंत
"बहुत सुन्दर"
May 7
सालिक गणवीर commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ले के खाली गिलास बैठे हैं- ग़ज़ल - बसंत
"भाई बसंत कुमार शर्मा जी. कौन बांचेगा प्रेम की पाती,मौन सब कालिदास बैठे हैं.। बढ़िया ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें."
May 7
Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ले के खाली गिलास बैठे हैं- ग़ज़ल - बसंत
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें । 'लोग सब ख़ास ख़ास बैठे हैं' इस मिसरे में उर्दू के हिसाब से क़ाफ़िया ग़लत है,देखियेगा । "
May 6
Shyam Narain Verma commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ले के खाली गिलास बैठे हैं- ग़ज़ल - बसंत
"आदरणीय बसंत कुमार शर्मा जी, प्रणाम, बहुत ही सुंदर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
May 6
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

ले के खाली गिलास बैठे हैं- ग़ज़ल - बसंत

मापनी 2122 1212 22/112दोस्त जो आसपास बैठे हैं,जाने क्यों सब उदास बैठे हैं  सोचते हैं कि कोई आएगा, ले के खाली गिलास बैठे हैं.  फिर से दरबार सज गया उनका, लोग सब ख़ास ख़ास बैठे हैं.  कोई यूँ ही तो मिल नहीं सकता, द्वार पर उनके दास बैठे हैं.  कौन बाँचेगा प्रेम की पाती मौन सब कालिदास बैठे हैं.  आज क्यों सब निकालने के लिए, दिल में रख के भड़ास बैठे हैं.  फूल से दुश्मनी निभाने को ले के वो चंद्रहास बैठे हैंSee More
May 6
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ज़िंदगी का हिसाब हो जाऊँ - ग़ज़ल - बसंत
"आदरणीय Samar kabeer जी सादर नमस्कार, जी कर दिया, आपकी हौसलाअफजाई का दिल का शुक्रिया "
May 5
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

ज़िंदगी का हिसाब हो जाऊँ - ग़ज़ल - बसंत

मापनी 2122 1212 22/112गर कहो तो जनाब हो जाऊँतुम जो देखो वो ख़्वाब हो जाऊँ रोज पढ़ने का गर करो वादाप्रेम की मैं क़िताब हो जाऊँ  मुझको काँटों से डर नहीं लगता चाहता हूँ गुलाब हो जाऊँ  गर ज़रूरत पड़े उजालों कीजल के ख़ुद आफ़ताब हो जाऊँ डायरी में अगर मुझे लिख लो ज़िंदगी का हिसाब हो जाऊँ  तुम मेरे वास्ते सवाल बनो मैं सरल सा जवाब हो जाऊँ  जाने कब से यही तमन्ना है इश्क़ में क़ामयाब हो जाऊँ"मौलिक एवं अप्रकाशित"See More
May 4

Profile Information

Gender
Male
City State
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
Native Place
धौलपुर
Profession
भारतीय रेल यातायात सेवा
About me
बोन्साई एवं कविता लेखन में रूचि

बसंत कुमार शर्मा's Blog

पीपल वाला गाँव नहीं है-ग़ज़ल

मापनी 22 22 22 22

पंछी को अब ठाँव नहीं है,

पीपल वाला गाँव नहीं है.  

 

दिखते हैं कुछ पेड़ मगर,

उनके नीचे छाँव नहीं है.

 

लाती जो पिय का संदेशा, 

कागा की वह काँव नहीं है  

 …

Continue

Posted on July 2, 2020 at 5:19pm — 3 Comments

ले के खाली गिलास बैठे हैं- ग़ज़ल - बसंत

मापनी 2122 1212 22/112

दोस्त जो आसपास बैठे हैं,

जाने क्यों सब उदास बैठे हैं 

 

सोचते हैं कि कोई आएगा, 

ले के खाली गिलास बैठे हैं. 

 

फिर से दरबार सज गया उनका, 

लोग सब ख़ास ख़ास बैठे…

Continue

Posted on May 5, 2020 at 8:28pm — 7 Comments

ज़िंदगी का हिसाब हो जाऊँ - ग़ज़ल - बसंत

मापनी 2122 1212 22/112

गर कहो तो जनाब हो जाऊँ

तुम जो देखो वो ख़्वाब हो जाऊँ

 

रोज पढ़ने का गर करो वादा

प्रेम की मैं क़िताब हो जाऊँ 

 

मुझको काँटों से डर नहीं लगता 

चाहता हूँ गुलाब हो…

Continue

Posted on May 1, 2020 at 12:30pm — 6 Comments

हक़बयानी लिख रहे हैं  - ग़ज़ल - बसंत

 

मापनी २१२२ २१२२ २१२२ २१२२ 

दूध को जो दूध और पानी को पानी लिख रहे हैं 

लोग वो कम ही बचे जो हक़बयानी लिख रहे हैं 

 

खेत में ओले पड़े हैं नष्ट सब कुछ हो चुका है 

कूल है मौसम बहुत वे ऋतु सुहानी लिख रहे हैं 

 …

Continue

Posted on April 27, 2020 at 6:59pm — 10 Comments

Comment Wall (1 comment)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 2:23pm on September 28, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

|

|

|

|

|

|

|

|

आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट (क्लिक करें) कर सकते है.

और अधिक जानकारी के लिए कृपया नियम अवश्य देखें.

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतुयहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

 

ओबीओ पर प्रतिमाह आयोजित होने वाले लाइव महोत्सवछंदोत्सवतरही मुशायरा वलघुकथा गोष्ठी में आप सहभागिता निभाएंगे तो हमें ख़ुशी होगी. इस सन्देश को पढने के लिए आपका धन्यवाद.

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post उमड़ता जब हृदय में प्यार कविता जन्म लेती है (११५ )
"जनाब गिरधारी सिंह गहलोत जी, आदाब।  सुन्दर रचना हुई है बधाई स्वीकार करें। सादर। "
39 minutes ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( आएगी कल वफ़ात भी तू सब्र कर अभी...)
"प्रिय रुपम आदाब ग़ज़ल पर हाज़िरी और सराहना के लिए मश्कूर-ओ-ममनून हूँ. शुक्रिया बालक."
1 hour ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( आएगी कल वफ़ात भी तू सब्र कर अभी...)
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद' साहिब आदाब. ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति एवं सराहना के लिए तह-ए-दिल से…"
1 hour ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( आएगी कल वफ़ात भी तू सब्र कर अभी...)
"आदरणीय समर कबीर साहिब आदाब ग़ज़ल पर आपकी हाज़िरी और सराहना के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ. आपकी…"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post उमड़ता जब हृदय में प्यार कविता जन्म लेती है (११५ )
"आ. भाई गिरधारी सिंह जी, सादर अभिवादन । उत्तम गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
3 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (क्या नसीब है)
"मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब, आदाब। ग़ज़ल पर आपकी हाज़िरी, इस्लाह और हौसला अफ़ज़ाई के लिये तहे-दिल से…"
11 hours ago
Alok Rawat replied to डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's discussion ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्य-संध्या माह मई 2020–एक प्रतिवेदन ::  डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव
"वाक़ई, ओबीओ लखनऊ चैप्टर की माह मई 2020 की मासिक गोष्ठी बहुत ही शानदार ढंग से सम्पन्न हुई | इस गोष्ठी…"
18 hours ago
Dr. Chandresh Kumar Chhatlani commented on Dr. Chandresh Kumar Chhatlani's blog post नया पकवान / लघुकथा / चंद्रेश कुमार छतलानी
"रचना पसंद कर उस पर अपनी टिप्पणी देने हेतु हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी…"
18 hours ago
Usha Awasthi posted a blog post

क्यों ना जड़ पर चोट ?

पैसों से क्या जान कोहम पाएगें तोल ?सदा - सदा को बुझ गएजब चिराग़ अनमोलकिन-किन के थे वरद हस्तजो पनपी…See More
18 hours ago
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"आदरणीय समर कबीर साहब बहुत बहुत आभार सर आपकी सलाह के बिना मेरी हर ग़ज़ल अधूरी है आप कुशल से तो है ना…"
21 hours ago
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफ़िर जी हार्दिक आभार जो टंकण त्रुटियां आपको दिखाई दें उन्हें बता भी दिया…"
21 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"दोस्तो आदाब, पारिवारिक समस्याओं के कारण कुछ समय ओबीओ पर हाज़िर नहीं हो सकूँगा,सिर्फ़ तरही मुशाइर: में…"
21 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service