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बसंत कुमार शर्मा
  • Male
  • जबलपुर, मध्यप्रदेश
  • India
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बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ले के खाली गिलास बैठे हैं- ग़ज़ल - बसंत
"आदरणीय Shyam Narain Verma जी सादर नमस्कार , आपकी हौसलाअफजाई  के लिए शुक्रिया "
May 11
TEJ VEER SINGH commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ले के खाली गिलास बैठे हैं- ग़ज़ल - बसंत
"हार्दिक बधाई आदरणीय  बसंत कुमार शर्मा जी ।बहुत बढ़िया गज़ल। दोस्त जो आसपास बैठे हैं, जाने क्यों सब उदास बैठे हैं    सोचते हैं कि कोई आएगा,  ले के खाली गिलास बैठे हैं. "
May 8
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ले के खाली गिलास बैठे हैं- ग़ज़ल - बसंत
"आ. भाई बसंत जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
May 8
Awanish Dhar Dvivedi commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ले के खाली गिलास बैठे हैं- ग़ज़ल - बसंत
"बहुत सुन्दर"
May 7
सालिक गणवीर commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ले के खाली गिलास बैठे हैं- ग़ज़ल - बसंत
"भाई बसंत कुमार शर्मा जी. कौन बांचेगा प्रेम की पाती,मौन सब कालिदास बैठे हैं.। बढ़िया ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें."
May 7
Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ले के खाली गिलास बैठे हैं- ग़ज़ल - बसंत
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें । 'लोग सब ख़ास ख़ास बैठे हैं' इस मिसरे में उर्दू के हिसाब से क़ाफ़िया ग़लत है,देखियेगा । "
May 6
Shyam Narain Verma commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ले के खाली गिलास बैठे हैं- ग़ज़ल - बसंत
"आदरणीय बसंत कुमार शर्मा जी, प्रणाम, बहुत ही सुंदर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
May 6
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

ले के खाली गिलास बैठे हैं- ग़ज़ल - बसंत

मापनी 2122 1212 22/112दोस्त जो आसपास बैठे हैं,जाने क्यों सब उदास बैठे हैं  सोचते हैं कि कोई आएगा, ले के खाली गिलास बैठे हैं.  फिर से दरबार सज गया उनका, लोग सब ख़ास ख़ास बैठे हैं.  कोई यूँ ही तो मिल नहीं सकता, द्वार पर उनके दास बैठे हैं.  कौन बाँचेगा प्रेम की पाती मौन सब कालिदास बैठे हैं.  आज क्यों सब निकालने के लिए, दिल में रख के भड़ास बैठे हैं.  फूल से दुश्मनी निभाने को ले के वो चंद्रहास बैठे हैंSee More
May 6
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ज़िंदगी का हिसाब हो जाऊँ - ग़ज़ल - बसंत
"आदरणीय Samar kabeer जी सादर नमस्कार, जी कर दिया, आपकी हौसलाअफजाई का दिल का शुक्रिया "
May 5
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

ज़िंदगी का हिसाब हो जाऊँ - ग़ज़ल - बसंत

मापनी 2122 1212 22/112गर कहो तो जनाब हो जाऊँतुम जो देखो वो ख़्वाब हो जाऊँ रोज पढ़ने का गर करो वादाप्रेम की मैं क़िताब हो जाऊँ  मुझको काँटों से डर नहीं लगता चाहता हूँ गुलाब हो जाऊँ  गर ज़रूरत पड़े उजालों कीजल के ख़ुद आफ़ताब हो जाऊँ डायरी में अगर मुझे लिख लो ज़िंदगी का हिसाब हो जाऊँ  तुम मेरे वास्ते सवाल बनो मैं सरल सा जवाब हो जाऊँ  जाने कब से यही तमन्ना है इश्क़ में क़ामयाब हो जाऊँ"मौलिक एवं अप्रकाशित"See More
May 4
Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ज़िंदगी का हिसाब हो जाऊँ - ग़ज़ल - बसंत
"//गर कहो तो जनाब हो जाऊँ तुम जो देखो वो ख़्वाब हो जाऊँ// जी,ठीक है । अरकान भी एडिट कर दें ।  "
May 3
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ज़िंदगी का हिसाब हो जाऊँ - ग़ज़ल - बसंत
"आदरणीय Samar kabeer जी सादर नमस्कार, आपकी तरमीम का मुझे हमेशा इंतज़ार रहता है, दिल से शुक्रिया आपका  मैंने इसमें कुछ और किया देखें शायद आपको पसंद आये  गर कहो तो जनाब हो जाऊँ तुम जो देखो वो ख़्वाब हो जाऊँ   रोज पढ़ने का गर…"
May 3
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ज़िंदगी का हिसाब हो जाऊँ - ग़ज़ल - बसंत
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी सादर नमस्कार, आपकी हौसला अफजाई  का दिल से शुक्रिया "
May 3
Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ज़िंदगी का हिसाब हो जाऊँ - ग़ज़ल - बसंत
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'तुम कहो तो जनाब हो जाऊँ तुम पियो वो शराब हो जाऊँ' मतले के दोनों मिसरों में 'तुम' शब्द खटक रहा है,ऊला में 'तुम' की जगह "गर" कर सकते हैं…"
May 3
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ज़िंदगी का हिसाब हो जाऊँ - ग़ज़ल - बसंत
"बसन्त कुमार शर्मा जी सादर अभिवादन। मतला मजेदार है। डायरी में मुझे लिख लो.... हरेक शेर में कुछ खास है। तरूणाई की बहार आ गयी ग़ज़ल पढ़कर। बहुत बहुत बधाई इस ग़ज़ल पर"
May 3
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post हक़बयानी लिख रहे हैं  - ग़ज़ल - बसंत
"आदरणीय श्री सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी सादर नमस्कार , आपकी हौसलाअफजाई के लिए दिल से शुक्रिया "
May 3

Profile Information

Gender
Male
City State
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
Native Place
धौलपुर
Profession
भारतीय रेल यातायात सेवा
About me
बोन्साई एवं कविता लेखन में रूचि

बसंत कुमार शर्मा's Blog

ले के खाली गिलास बैठे हैं- ग़ज़ल - बसंत

मापनी 2122 1212 22/112

दोस्त जो आसपास बैठे हैं,

जाने क्यों सब उदास बैठे हैं 

 

सोचते हैं कि कोई आएगा, 

ले के खाली गिलास बैठे हैं. 

 

फिर से दरबार सज गया उनका, 

लोग सब ख़ास ख़ास बैठे…

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Posted on May 5, 2020 at 8:28pm — 7 Comments

ज़िंदगी का हिसाब हो जाऊँ - ग़ज़ल - बसंत

मापनी 2122 1212 22/112

गर कहो तो जनाब हो जाऊँ

तुम जो देखो वो ख़्वाब हो जाऊँ

 

रोज पढ़ने का गर करो वादा

प्रेम की मैं क़िताब हो जाऊँ 

 

मुझको काँटों से डर नहीं लगता 

चाहता हूँ गुलाब हो…

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Posted on May 1, 2020 at 12:30pm — 6 Comments

हक़बयानी लिख रहे हैं  - ग़ज़ल - बसंत

 

मापनी २१२२ २१२२ २१२२ २१२२ 

दूध को जो दूध और पानी को पानी लिख रहे हैं 

लोग वो कम ही बचे जो हक़बयानी लिख रहे हैं 

 

खेत में ओले पड़े हैं नष्ट सब कुछ हो चुका है 

कूल है मौसम बहुत वे ऋतु सुहानी लिख रहे हैं 

 …

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Posted on April 27, 2020 at 6:59pm — 10 Comments

मैं तुम्हारे दिल में आकर बैठ जाऊँगा - ग़ज़ल सादर समीक्षा

2122 2122 2122 2 

एक ग़ज़ल  मीठी सुनाकर बैठ जाऊँगा 

मैं तुम्हारे दिल में आकर बैठ जाऊँगा 

 

वक्त मुझको अपने आने का बताओ तो 

राह में पलकें बिछाकर बैठ जाऊँगा 

 

सामने सबके कहूँगा प्यार है तुझसे 

ये न सोचो मैं…

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Posted on April 21, 2020 at 5:30pm — 4 Comments

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At 2:23pm on September 28, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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