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अजय गुप्ता
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कैलेंडर

नौ तारीख तक कैलेंडर न आने से असुविधा होती है। यदि पहले से निर्धारित हो और 1-2 तारीख तक कैलेंडर आ जाए तो आसानी हो जाये।उम्मीद है आयोजक इस और ध्यान देंगेContinue

Started Apr 9, 2018

 

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Latest Activity

अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"बहुत बहुत शुक्रिया आपका "
Jun 27
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"शुक्रिया समर साहब। आपकी प्रेरणा से नव सृजन को शक्ति मिलती है। इंगित शेर में यह कहने का प्रयास है कि कपड़े जैसे भी पहने हों, इज़्ज़त समान रूप से देनी चाहिये। किसी के कपड़े देख कर उसे बुरी नज़र से देखना गलत है। कृपया सुझाव देन कि इसे कैसे बेहतर किया जा…"
Jun 27
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"जिस का था ख़्वाब रू-ब-रू है वही जैसा सोचा था हू-ब-हू है वही क्यों ज़माना नहीं बदल पाया इश्क़ का आज तक अदू है वही चाक दिल की मरम्मतें क्या हैं? हश्रे-जामा-ए-बा-रफ़ू है वही मौन मानव हुआ, सुना सबने कोयलों की कुहू-कुहू है वही अपनी नजरों को इतना…"
Jun 27
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"तेरा ही मिसरे पर एक अच्छी ग़ज़ल प्रस्तुत की हैं। इसी प्रकार अपना साथ बनाए रखिए और गुणीजनों की राय पर अम्ल करते हुए और अच्छे अशआर से इस पटल की शोभा बनाए रखिए"
Jun 26
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"तेरा ही मिसरे पर एक अच्छी ग़ज़ल प्रस्तुत की हैं। इसी प्रकार अपना साथ बनाए रखिए और गुणीजनों की राय पर अम्ल करते हुए और अच्छे अशआर से इस पटल की शोभा बनाए रखिए"
Jun 26
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"तेरा ही मिसरे पर एक अच्छी ग़ज़ल प्रस्तुत की हैं। इसी प्रकार अपना साथ बनाए रखिए और और अच्छे अशआर से इस पटल की शोभा बनाए रखिए"
Jun 26
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"तेरा ही मिसरे पर एक अच्छी ग़ज़ल प्रस्तुत की हैं। इसी प्रकार अपना साथ बनाए रखिए और गुणीजनों की राय पर अम्ल करते हुए और अच्छे अशआर से इस पटल की शोभा बनाए रखिए"
Jun 26
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"तेरा ही मिसरे पर एक अच्छी ग़ज़ल प्रस्तुत की हैं। इसी प्रकार अपना साथ बनाए रखिए और गुणीजनों की राय पर अम्ल करते हुए और अच्छे अशआर से इस पटल की शोभा बनाए रखिए"
Jun 26
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"तेरा ही मिसरे पर एक अच्छी ग़ज़ल प्रस्तुत की हैं। इसी प्रकार अपना साथ बनाए रखिए और गुणीजनों की राय पर अम्ल करते हुए और अच्छे अशआर से इस पटल की शोभा बनाए रखिए"
Jun 26
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"तेरा ही मिसरे पर एक अच्छी ग़ज़ल प्रस्तुत की हैं। इसी प्रकार अपना साथ बनाए रखिए और गुणीजनों की राय पर अम्ल करते हुए और अच्छे अशआर से इस पटल की शोभा बनाए रखिए"
Jun 26
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"तेरा ही मिसरे पर एक अच्छी ग़ज़ल प्रस्तुत की हैं। इसी प्रकार अपना साथ बनाए रखिए और गुणीजनों की राय पर अम्ल करते हुए और अच्छे अशआर से इस पटल की शोभा बनाए रखिए"
Jun 26
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-110 in the group चित्र से काव्य तक
"बीते हुए आनन्ददायक पलों को आंखोँ के सामने सजीव करती अनुपम प्रस्तुति "
Jun 21
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-110 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत बढ़िया प्रस्तुती जिसमें ग्राम्य जीवन और प्रकृति की सुन्दर छवि उत्पन्न हुई"
Jun 21
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-110 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत सुन्दर गीत। समसामयिकता के साथ सकारात्मकता का अनूठा मेल किया आपने।"
Jun 21
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-110 in the group चित्र से काव्य तक
"प्रयोगात्मक नवगीत (ताटंक छंद) बड़े ग़ज़ब की यार सवारी, ये साइकिलें होती हैं। जितने पाठ पढ़ाती है यें, ज्ञान भरे वह मोती हैं।।बंदा इसको खींचे है तो, ये ढोती है बंदे को, सामाजिक ताने-बाने का, उदाहरण जगता-जीता। बड़े ग़ज़ब की यार सवारी... लक्ष्य…"
Jun 21
अजय गुप्ता commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post मीर तक काश कभी दर्द का मंज़र पहुँचे (११२ )
"बहुत खूब गज़ल हुई है जनाब। वाह वाह। लाजलाजवाब ब"
Jun 20

Profile Information

Gender
Male
City State
Karnal (Haryana)
Native Place
Karnal
Profession
Business
About me
ग़ज़ल, कविता, लघुकथा लेखन में रूचि, तीन स्वतंत्र काव्य संग्रह प्रकाशित, 3 ऑनलाइन पुस्तकें प्रकाशित. एक काव्य संग्रह हरियाणा साहित्य अकादमी के सौजन्य से प्रकाशित. parivartaaajkal.com पर 'अजय की कलम' के शीर्षक से नियमित कॉलम

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अजय गुप्ता's Blog

एक ग़ज़ल (वैलेंटाइन डे स्पेशल)

एक ग़ज़ल।

**********

बँध गई हैं एक दिन से प्रेम की अनुभूतियाँ

बिक रही रैपर लपेटे प्रेम की अनुभूतियाँ

शाश्वत से हो गई नश्वर विदेशी चाल में

भूल बैठी स्वयं को ऐसे प्रेम की अनुभूतियाँ

प्रेम पथ पर अब विकल्पों के बिना जीवन नहीं

आज मुझ से, कल किसी से, प्रेम की अनुभूतियाँ

पाप से और पुण्य से हो कर पृथक ये सोचिए

लज्जा में लिपटी हैं क्यों ये प्रेम की अनुभूतियाँ

परवरिश बंधन में हो तो दोष किसको दीजिये

कैसे पहचानेंगे…

Continue

Posted on February 14, 2019 at 1:54pm — 4 Comments

एक ग़ज़ल (हिलता है तो लगता ज़िंदा है साया)

हिलता है तो लगता ज़िंदा है साया

लेकिन चुप है, शायद गूँगा है साया

कहने में तो है अच्छा हमराही पर

सिर्फ़ उजालों में सँग होता है साया

सूरज सर पर हो तो बिछता पाँवों में

आड़ में मेरी धूप से बचता है साया

असमंजस में हूँ मैं तुमसे ये सुनकर

अँधियारे में तुमने देखा…

Continue

Posted on February 7, 2019 at 12:38pm — 3 Comments

ग़ज़ल (छिपा बैठा चितेरा है)

दिखे हरसूँ अँधेरा है

कहाँ जाने सवेरा है

 

नहीं दिखता कहीं रस्ता

कुहासा है घनेरा है

 

हुनर सीखें नए कैसे

गुरु बिन आज चेरा है

 

चुराता जा रहा साँसें

समय है या लुटेरा है

 

बनाता है जो इंसा को

ये जीवन वो ठठेरा है

 

नहीं शिकवा है साँपों से

डसे जाता सपेरा है

 

नहीं घर रास है मुझको

दिलों में ही बसेरा है

 

तेरा क्या और क्या मेरा

चले माया का फेरा…

Continue

Posted on December 10, 2018 at 7:30pm — 5 Comments

Comment Wall (4 comments)

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At 7:49pm on September 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय अजय गुप्ता जी आदाब बहुत बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ाने का ग़ज़ल पसंद आयी तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ आपका
At 7:46pm on August 31, 2019, dandpani nahak said…
बहुत बहुत धन्यवाद् भाई साहब अजय गुप्ता जी समय निकाल कर आपने जो मेरा हौसला बढ़ाया है बहुत शुक्रगुज़ार हूँ
At 12:56pm on May 26, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय अजय गुप्ता जी आदाब आपने मेरी ग़ज़ल पढ़ी उसे सराहा उसके लिए बहुत शुक्रिया
At 12:18pm on November 23, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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