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AMAN SINHA
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AMAN SINHA commented on AMAN SINHA's blog post अक्स
"@samar kabeer sahab  dhnyavaad"
Jun 28
Samar kabeer commented on AMAN SINHA's blog post अक्स
"जनाब अमन सिन्हा जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Jun 13
AMAN SINHA posted a blog post

अक्स

थक गया हूँ झूठ खुद से और ना कह पाऊंगापत्थरों सा हो गया हूँ शैल ना बन पाऊंगादेखते है सब यहाँ पे अजनबी अंदाज़ सेपास से गुजरते है तो लगते है नाराज़ सेबेसबर सा हो रहा हूँ जिस्म के लिबास मेंबंद बैठा हूँ मैं कब से अक्स के लिहाफ में काटता है खलीपन अब मन कही लगता नहींवक़्त इतना है पड़ा के वक़्त ही मिलता नहींरात भर मैं सोचता हूँ कल मुझे कारना है क्याहै नहीं कुछ हाथ मेरे सोच के डरना है क्याटोक न दे कोई मुझको मेरी इस बेकारी मेंकुछ नहीं है दोष मेरा मेरी इस लाचारी में चाह नाग बनने की है पर देव बनना है नहींराह…See More
Jun 12
AMAN SINHA commented on AMAN SINHA's blog post वो सुहाने दिन
"श्रीमान राम साहब और कबीर साहब, हौंसला बढ़ाने के लिए धन्यवाद। "
May 28
Ram Awadh VIshwakarma commented on AMAN SINHA's blog post वो सुहाने दिन
"बचपन की यादे आपकी कविता पढ़कर ताजा हो गईंं। खूबसूरत कविता. के लिये बधाई"
May 28
Samar kabeer commented on AMAN SINHA's blog post वो सुहाने दिन
"जनाब अमन सिन्हा जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
May 28
AMAN SINHA posted a blog post

वो सुहाने दिन

कभी लड़ाई कभी खिचाई, कभी हँसी ठिठोली थीकभी पढ़ाई कभी पिटाई, बच्चों की ये टोली थीएक स्थान है जहाँ सभी हम, पढ़ने लिखने आते थेबड़े प्यार से गुरु हमारे, हम सबको यहाँ पढ़ाते थेकोई रटे है " क ख ग घ", कोई अंग्रेजी के बोल कहेपढ़े पहाड़ा कोई यहां पर, कोई गुरु की डाँट सहे एक यहां पर बहुत तेज़ था, दूजा बिलकुल ढीला थाएक ने पाठ याद कर लिया, दूजे का चेहरा पीला था कमीज़ तंग थी यहाँ किसी की, पतलून किसी की ढीली थीकिसी ने अपने फटे झोले को, अपने हाथों से सी ली थीकपडे चमके यहाँ किसी के, किसी का बिलकुल मैला थापन्नी था पास…See More
May 27
डॉ छोटेलाल सिंह commented on AMAN SINHA's blog post बेगैरत
"आदरणीय अमन सिन्हा जी बहुत वेमिशाल रचना है बार बार पढ़ने को जी कर रहा ऐसे लग रहा जैसे मुँह की बात किसी ने छीन ली,बहुत बहुत बधाई"
May 25
AMAN SINHA commented on AMAN SINHA's blog post बेगैरत
"श्री "मुसाफिर" जी एवं "कबीर " साहब, समीक्षा के लिए धन्यवाद । "
May 24
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on AMAN SINHA's blog post बेगैरत
"आ. अमन जी, अच्छी कविता हुई है । हार्दिक बधाई ।"
May 24
Samar kabeer commented on AMAN SINHA's blog post बेगैरत
"जनाब अमन सिन्हा जी आदाब, अच्छी रचना है, बधाई स्वीकार करें ।"
May 21
Samar kabeer commented on AMAN SINHA's blog post पश्चाताप
"जनाब अमन सिन्हा जी आदाब,अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
May 21
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on AMAN SINHA's blog post बेकार की मनोदशा
"आद0 अमन सिन्हा जी अच्छी रचना हुई है।थोड़ा शब्दकल संयोजन और समान मात्राभार पर भी काम कीजिये,, इससे गेयता आएगी। सादर"
May 20
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on AMAN SINHA's blog post पहचाना सा एक चेहरा
"आद0 अमन सिंह जी सादर अभिवादन। बढ़िया भावपुरक रचना लिखी है आपने। बधाई स्वीकार कीजिये"
May 20
AMAN SINHA posted blog posts
May 20
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on AMAN SINHA's blog post पश्चाताप
"आ. भाई अमन जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
May 19

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AMAN SINHA's Blog

अक्स

थक गया हूँ झूठ खुद से और ना कह पाऊंगा

पत्थरों सा हो गया हूँ शैल ना बन पाऊंगा

देखते है सब यहाँ पे अजनबी अंदाज़ से

पास से गुजरते है तो लगते है नाराज़ से

बेसबर सा हो रहा हूँ जिस्म के लिबास में

बंद बैठा हूँ मैं कब से अक्स के लिहाफ में

 

काटता है खलीपन अब मन कही लगता नहीं

वक़्त इतना है पड़ा के वक़्त ही मिलता नहीं

रात भर मैं सोचता हूँ कल मुझे कारना है क्या

है नहीं कुछ हाथ मेरे सोच के डरना है क्या

टोक न दे कोई मुझको मेरी इस…

Continue

Posted on June 11, 2020 at 3:30pm — 2 Comments

वो सुहाने दिन

कभी लड़ाई कभी खिचाई, कभी हँसी ठिठोली थी

कभी पढ़ाई कभी पिटाई, बच्चों की ये टोली थी

एक स्थान है जहाँ सभी हम, पढ़ने लिखने आते थे

बड़े प्यार से गुरु हमारे, हम सबको यहाँ पढ़ाते थे

कोई रटे है " क ख ग घ", कोई अंग्रेजी के बोल कहे

पढ़े पहाड़ा कोई यहां पर, कोई गुरु की डाँट सहे 

एक यहां पर बहुत तेज़ था, दूजा बिलकुल ढीला था

एक ने पाठ याद कर लिया, दूजे का चेहरा पीला था

 

कमीज़ तंग थी यहाँ किसी की, पतलून किसी की ढीली…

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Posted on May 27, 2020 at 8:06am — 3 Comments

बेगैरत

वो मेरा करीबी था, मैं मगर फरेबी था

इश्क़ वो वफाओं वाली, चाह बन के रह गयी

जो भी सितम हुए, सब मैंने ही सनम किए

टोकड़ी दुआओं वाली, आह बनके रह गयी

 

था मेरा गरूर उसको, मेरा था शुरूर उसको

साथ जब मैंने छोड़ा, आंखे नम रह गयी

सपनों का था  एक क़िला, मिलने का वो सिलसिला

तोड़ा उसके दिल को मैंने, पल मे सारी ढह गयी

वादे उसकी सच्ची थी, मेरी डोर कच्ची…

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Posted on May 19, 2020 at 1:46pm — 4 Comments

पश्चाताप

तोड़े थे यकीन मैंने मोहल्ले की हर गली में

सुकून हम कैसे पाते इतनी आहे लेकर

मौत हो जाए मेहरबा हमपे नामुमकिन है

ठोकरे ही हमको मिलेंगी उसके दरवाज़े पर

 

हर परत रंग मेरा यूँ ही उतरता गया 

ज़मी थी शख्त मगर मैं बस धस्ता ही गया

गुनाह जो मैंने किये थे बेखयाली में

याद करके उन सबको मैं बस गिनता ही गया

 

किसी का हाथ छोड़ा किसी का साथ छोड़ दिया

मैंने हर बदनामी को उनकी तरफ मोड़ दिया

सामने जब भी वो आए अपना बनाने के…

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Posted on May 17, 2020 at 12:12pm — 2 Comments

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